महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया में तनाव से तय होगा बाजार का मूड

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नई दिल्ली। Stock Market Outlook: आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी, इसे लेकर जानकारों ने अहम संकेत दिए हैं। छुट्टियों के कारण यह हफ्ता बाजार के लिए छोटा होने वाला है, क्योंकि सोमवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर शेयर बाजार बंद रहेगा। लेकिन कारोबार के कम दिनों के बावजूद बाजार में काफी हलचल देखने को मिल सकती है।

जानकारों की मानें तो इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक, भारत के महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव बाजार का मूड तय करेंगे।

रेलीगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च SVP अजीत मिश्रा के मुताबिक, इस हफ्ते पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले फैसले पर टिकी होंगी। फेड का आगे का क्या रुख रहता है, यह बाजार के लिए बहुत मायने रखेगा। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड ऑयल की चाल भी अहम भूमिका निभाएगी।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने बताया कि 11 सितंबर को आए अमेरिकी महंगाई दर के आंकड़ों ने सबका ध्यान खींचा है। वहां मुख्य CPI मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत बढ़ी है और सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत पर बनी हुई है। वहीं कोर इन्फ्लेशन महीने के आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़कर सालाना स्तर पर घटकर 2.4 प्रतिशत पर आ गई है।

अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो इससे डॉलर और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि 15-16 सितंबर को होने वाली फेड की FOMC बैठक बाजार के लिए सबसे बड़ा ग्लोबल ट्रिगर साबित होगी।

भारतीय बाजार के लिए घरेलू आंकड़े भी बेहद खास रहने वाले हैं। अजीत मिश्रा के अनुसार, इस हफ्ते देश के अगस्त महीने के WPI और CPI महंगाई के आंकड़े जारी होंगे। इसके साथ ही बेरोजगारी और व्यापार संतुलन (बैलेंस ऑफ ट्रेड) से जुड़े आंकड़े भी सामने आएंगे।

कच्चे तेल को लेकर हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि भारत के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। अगर पश्चिम एशिया में तनाव के चलते तेल की सप्लाई प्रभावित होती है और कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे भारत में महंगाई का दबाव बढ़ेगा।

इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा, रुपये की कीमत पर असर पड़ेगा और कंपनियों के मुनाफे में कमी आ सकती है। एन्चैंट मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक और भू-राजनीतिक तनावों की वजह से भारतीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रह सकता है।