नई दिल्ली। Minimum Average Balance Penalty: खाते में मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं होने से पर बैंक पेनल्टी वसूलते हैं। अलग-अलग बैंकों में यह राशि अलग-अलग है। सरकार ने संसद में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने ग्राहकों से उनके खातों में मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) बनाए न रखने पर लगभग ₹7,100 करोड़ की पेनल्टी वसूली।
यह रकम पिछले साल के लगभग ₹6,800 करोड़ से ज्यादा है। कुल चार्ज का करीब 70% यानी ₹4,948 करोड़ प्राइवेट बैंकों ने वसूला। उनके मिनिमम एवरेज बैलेंस चार्ज में फाइनेंशियल ईयर 2026 में 17% की बढ़ोतरी हुई।
इस दौरान देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक ने लगभग ₹1,800 करोड़ वसूले। इसके बाद एक्सिस बैंक (₹1,081 करोड़) का नंबर रहा। आईसीआईसीआई बैंक ने ₹353 करोड़, कोटक महिंद्रा बैंक ने ₹290 करोड़, यस बैंक ने ₹195 करोड़ और आईडीबीआई बैंक ने ₹175 करोड़ का चार्ज लगाया।
सरकारी बैंकों का हाल
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि 12 सरकारी बैंकों में से 10 ने सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस न बनाए रखने पर पेनल्टी चार्ज लगाना बंद कर दिया है। बाकी दो बैंकों ने इसे व्यावहारिक बनाया है। इससे 12 सरकारी बैंकों की MAB वसूली पिछले फाइनेंशियल ईयर में घटकर ₹2,137 करोड़ रह गई जो 2024-25 में ₹2,775 करोड़ थी।
एसबीआई करंट अकाउंट पर चार्ज लगाता है। उसने पिछले वित्त वर्ष में मिनिमम एवरेज बैलेंस पेनल्टी चार्ज के रूप में ₹477 करोड़ वसूले। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा (₹394 करोड़), इंडियन बैंक (₹299 करोड़) और केनरा बैंक (₹213 करोड़) का नंबर रहा।
16,000 करोड़ की वसूली
वित्त वर्ष 2021-22 से सरकारी बैंकों ने MAB चार्ज के तौर पर लगभग ₹12,000 करोड़ वसूले हैं। हालांकि प्राइवेट बैंकों के लिए वित्त वर्ष 2022-23 से पहले का डेटा नहीं रखा जाता है। लेकिन तब से उन्होंने ग्राहकों से पेनल्टी के तौर पर कुल मिलाकर लगभग ₹16,000 करोड़ वसूले हैं।
सरकार ने कहा, “अगर खातों में तय मिनिमम बैलेंस नहीं रखा जाता है, तो RBI ने बैंकों को सलाह दी है कि वे ग्राहकों को SMS, ईमेल, चिट्ठी या दूसरे सही तरीकों से इसकी सूचना दें। आम तौर पर, पेनल्टी लगाने से पहले ग्राहकों को जरूरी मिनिमम बैलेंस बनाए रखने के लिए समय दिया जाता है।”

