नई दिल्ली। एथेनॉल वाले पेट्रोल (E20) को लेकर पूरे देश में बहस चल रही है। कई लोगों की शिकायत है कि इससे गाड़ियों का माइलेज प्रभावित हो रहा है और इंजन में खराबी आ रही है। सरकार ने भी माना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में मामूली गिरावट आती है।
सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही है ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। इस बीच सरकार का कहना है कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने 40 फीसदी घाटे पर एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को चावल बेचा है।
सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कहा कि FCI ने जून 2025 और जून 2026 के बीच एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को लिए 2,250-2,320 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर चावल बेचा जबकि कॉर्पोरेशन की औसत खरीद लागत 3,720-3,889 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी एफसीआई ने एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को करीब लगभग 40% कम कीमत पर चावल बेचा।
किसे मिला सबसे ज्यादा फायदा
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बांभनिया ने बताया कि FCI ने पिछले 12 महीनों के दौरान अपने गोदामों से एथेनॉल प्लांट्स को 6.35 मिलियन टन चावल भेजा। इसकी कुल कीमत 14,596.78 करोड़ रुपये थी। सबसे ज्यादा चावल हरियाणा की एथेनॉल डिस्टीलरीज को मिला। इस राज्य को पिछले एक साल में एफसीआई से 844,141 टन चावल मिला।
हरियाणा के बाद उत्तर प्रदेश (838,645 टन), पंजाब और हिमाचल प्रदेश (दोनों मिलाकर 658,952 टन), पश्चिम बंगाल (584,672 टन) और मध्य प्रदेश (432,485 टन) का नंबर रहा। ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) के तहत एथेनॉल कंपनियों के लिए चावल की कीमत जून से अक्टूबर 2025 तक 2,250 रुपये प्रति क्विंटल थी।
इसके बाद नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक इसे 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। नवंबर 2026 से जून 2027 के लिए इसे 2,390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

