पेपर लीक किया तो होगी 10 साल की जेल, लोकसभा में पेश हुआ एंटी पेपर लीक बिल

0
1

नई दिल्ली। Anti Paper Leak Bill: केंद्र सरकार ने लोकसभा में ‘The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया है। इसका मकसद पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा में होने वाली धांधली पर पहले से कहीं ज्यादा सख्ती करना है।

प्रस्तावित कानून के तहत संगठित पेपर लीक के मामलों में अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही जांच और सुनवाई को भी तय समय में पूरा करने का प्रावधान किया गया है।

जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, यही कारण है कि यह बिल लाया गया। सरकार का कहना है कि ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए कानून को और मजबूत बनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सख्त कार्रवाई, तेज जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट का भरोसा जता चुके हैं। इसके साथ ही एनटीए में तकनीकी सुधारों के सुझाव देने के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है। आइए जानते हैं इस बिल से जुड़ी ये 5 खास और बड़ी बातें…

पेपर लीक पर अब 10 साल तक की जेल
सबसे बड़ा बदलाव सजा में किया गया है। संगठित तरीके से पेपर लीक कराने या नकल गिरोह चलाने वालों को अब अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। पहले यह सजा 5 साल तक थी। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों के पीछे संगठित गिरोह काम करते हैं, इसलिए कड़ी सजा जरूरी है।

जुर्माना बढ़कर 10 करोड़ रुपये तक
बिल में आर्थिक सजा भी काफी बढ़ाई गई है। अब दोषियों पर अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा यदि पेपर लीक के कारण परीक्षा दोबारा करानी पड़े, तो उसका खर्च भी दोषियों से वसूला जा सकेगा।

डिजिटल और AI से होने वाली नकल भी अपराध
अब केवल प्रश्नपत्र लीक ही नहीं, बल्कि AI की मदद से नकल, परीक्षा प्रणाली की हैकिंग, ऑनलाइन पेपर भेजना और साइबर धोखाधड़ी भी कानून के दायरे में आएगी।

केवल छात्र नहीं, एजेंसियां भी होंगी जिम्मेदार
यदि परीक्षा कराने वाली एजेंसी, सर्विस प्रोवाइडर, तकनीकी कंपनी या कोई अधिकारी लापरवाही या मिलीभगत का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। इससे पूरी परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय होगी।

जांच और सुनवाई होगी तेज
बिल में जांच एजेंसियों को ज्यादा अधिकार देने, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और फास्ट ट्रैक अदालतों में मामलों की जल्द सुनवाई का प्रावधान किया गया है। सरकार का मकसद है कि पेपर लीक के मामलों का जल्दी निपटारा हो और दोषियों को समय पर सजा मिले।