गुरु मार्ग दिखाते हैं, चलना स्वयं की उपादान शक्ति पर निर्भर: मुनि विवर्धनसागर

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने रविवार को अपने सारगर्भित प्रवचन में ‘निमित्त’ और ‘उपादान’ के आध्यात्मिक सिद्धांत को सरल उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए उपादान शक्ति और निमित्त दोनों का अपना-अपना महत्व है। उपादान वह मूल सामर्थ्य है, जो किसी वस्तु या जीव के भीतर स्वाभाविक रूप से विद्यमान रहती है, जबकि उस शक्ति को प्रकट करने में सहायक बनने वाले साधन, परिस्थितियां और व्यक्ति निमित्त कहलाते हैं।

मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक कुम्हार केवल मिट्टी मिल जाने से घड़ा नहीं बना देता। पहले वह उपयुक्त मिट्टी का चयन करता है, उसे पैरों से रौंदकर मुलायम बनाता है, फिर चाक पर आकार देता है और अंत में अग्नि में पकाता है। तब जाकर वह मिट्टी का घड़ा जल धारण करने योग्य बनता है।

उन्होंने कहा कि घड़ा बनने की मूल क्षमता मिट्टी में पहले से ही विद्यमान होती है। कुम्हार, चाक और अग्नि केवल निमित्त हैं। यदि मिट्टी के स्थान पर रेत हो तो हजार प्रयास करने पर भी घड़ा नहीं बन सकता, क्योंकि रेत में वह उपादान शक्ति ही नहीं होती।

इसी सिद्धांत को आत्मकल्याण से जोड़ते हुए मुनिश्री ने कहा कि गुरु के प्रवचन सुनने के लिए सैकड़ों लोग आते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही व्यक्ति आत्मसाधना के मार्ग पर आगे बढ़ पाते हैं। इसका कारण यह है कि जिसके भीतर उपादान शक्ति जागृत होती है, वही वैराग्य और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होकर जीवन का वास्तविक लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास करता है।

मुनिश्री ने कहा कि जैन सिद्धांत के अनुसार पंचम काल में प्रत्यक्ष मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं मानी गई है, लेकिन मोक्षमार्ग पर चलना, आत्मशुद्धि करना और मोक्ष की दिशा में अपनी दूरी कम करना पूर्णतः संभव है। निर्मल भाव, संयम, स्वाध्याय और साधना के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपनी आत्मा को उन्नत कर सकता है तथा भविष्य में मोक्ष प्राप्ति के योग्य बन सकता है।

इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा, मंत्री पंकज खटोड़, कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, टीकम पाटनी, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, राजकुमार पाटनी, पूर्व न्यायाधीश जिनेन्द्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।