नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनेभर से ज्यादा समय तक चले आंदोलन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी ले ली। प्रधान को आखिरकार इस्तीफा देना ही पड़ा और उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
सीजेपी के आंदोलन में हजारों स्टूडेंट्स ने जंतर-मंतर समेत पूरे देशभर में हिस्सा लिया। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही सीजेपी का आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन उसी तरह की एक नई पार्टी ने सोशल मीडिया पर जन्म ले लिया है। इस पार्टी का नाम E20 जनता पार्टी है।
सोशल मीडिया पर पेट्रोल में एथनॉल- ई20 को मिलाए जाने को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा था। इसको लेकर कुछ समूहों ने प्रदर्शन भी किया था। अब इस पर एक पूरी पार्टी बन गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर तेजी से इसके फॉलोवर्स भी बढ़ रहे हैं। कुछ ही घंटों में इसके फॉलोवर्स एक्स पर 22 हजार से ज्यादा हो गए तो इंस्टाग्राम पर 30 हजार हो गए हैं।
जैसे कॉकरोच जनता पार्टी की डिमांड नीट पेपर लीक को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। उसी तरह ई-20 जनता पार्टी की मांग शुद्ध पेट्रोल दिए जाने को लेकर है।
एक्स पर ई20 जनता पार्टी ने पोस्ट किया, ”हमारी कारों पर एक्सपेरिमेंट करना बंद करो! इंडिया फ्यूल की चॉइस चाहता है। हमारी गाड़ियां टेस्ट मशीन नहीं हैं। हमने उन्हें सालों पहले टैक्स देकर अपनी मेहनत की कमाई से खरीदा है।”
लिखा गया है कि हम मिडिल क्लास वाले देश हैं, और फ्यूल एफिशिएंसी + गाड़ी की परफॉर्मेंस सीधे हमारे रोजाना के खर्च पर असर डालती है। तो गाड़ी के मैनुअल को मानने के बजाय हमारे इंजन पर एक्सपेरिमेंट क्यों किए जा रहे हैं?
ई20 जनता पार्टी ने डिमांड की है कि हम आसान अधिकार चाहते हैं- मैन्युफैक्चरर की सलाह के अनुसार फ्यूल हो, आम नागरिकों पर कोई जबरदस्ती एक्सपेरिमेंट न हो, जिस फ्यूल पर हम भरोसा करते हैं उसे चुनने की आजादी, हमें वह दें जिसके लिए हमने पैसे दिए हैं, न कि वह जो हम पर टेस्ट किया जा रहा है।” अकाउंट के जरिए ये तीन डिमांड्स तेल को लेकर रखी गई है।
दरअसल, कुछ समय पहले सीजेआई सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कॉकरोच संबंधित टिप्पणी की थी। इससे ही विवाद शुरू हुआ और बाद में उस समय बॉस्टन में रह रहे अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी बनाई।
एक्स और इंस्टाग्राम, दोनों पर ही इसे काफी ज्यादा समर्थन मिला और तेजी से फॉलोवर्स बढ़े। इसके बाद, जब दीपके भारत लौटे तो उन्होंने नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने का ऐलान किया।
शुरुआत में कई शहरों में प्रदर्शन हुए और बाद में जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन हुआ। इसमें संसद चलो मार्च में बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठे हुए। लगातार छात्रों की संख्या बढ़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया।

