भारतीय मजदूर संघ की तीन दिन में समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
कोटा। स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ, रानपुर एवं भारतीय मजदूर संघ ने स्टोन शिपर्स लिमिटेड प्रबंधन के खिलाफ आन्दोलन तेज करने को लेकर मोर्चा खोल दिया है। श्रमिक नेताओं ने पत्रकार वार्ता में प्रबंधन पर कर्मचारियों के साथ घोर अन्यायपूर्ण व्यवहार, गैर-कानूनी छंटनी, डराने-धमकाने और जातिगत रूप से प्रताड़ित करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
भारतीय मजदूर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी तीन दिनों के भीतर इस संवेदनशील मामले का उचित समाधान नहीं निकाला गया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र एवं व्यापक रूप दिया जाएगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर कंपनी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।
स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नाथूलाल गोस्वामी ने बताया कि कंपनी के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे असहाय कर्मचारियों को डराने, धमकाने और जातिगत रूप से अपमानित व प्रताड़ित किया गया है।
इस संबंध में रानपुर थाना पुलिस ने कंपनी के दो रसूखदार प्रबंधकीय अधिकारियों गजानंद गौड़ एवं विष्णु दत्त शर्मा के विरुद्ध गंभीर धाराओं तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आज तक पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है। जिससे पीड़ित कर्मचारियों में गहरा भय, निराशा और भारी आक्रोश व्याप्त है।
गोस्वामी ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि गत 30 जून की रात्रि को कंपनी प्रबंधन ने श्रम नियमों को ताक पर रखकर, बिना किसी पूर्व सूचना के फैक्ट्री गेट पर अचानक 49 कर्मचारियों की छंटनी की सूची चस्पा कर दी।
अगले दिन जब ये कर्मचारी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी पर पहुंचे, तो उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। तब से सभी प्रभावित कर्मचारी फैक्ट्री गेट के बाहर टेंट लगाकर लगातार धरने पर बैठे हैं।
भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री रवि गौतम ने प्रबंधन की तानाशाही नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि स्टोन शिपर्स प्रबंधन ने पूर्व में हुई द्विपक्षीय वार्ताओं और समझौतों की खुलेआम अवहेलना की है। स्थापित श्रम कानूनों और औद्योगिक संबंधों के तय नियमों को दरकिनार करते हुए, वरीयता क्रम के सिद्धांतों की अनदेखी कर एकतरफा छंटनी की गई है।
यह कदम गरीब श्रमिकों के पेट पर लात मारने वाला और औद्योगिक शांति को भंग करने वाला है। जब श्रमिक प्रतिनिधिमंडल इस समस्या के समाधान हेतु प्रबंधन से मिलने गया, तो उच्च अधिकारियों ने मर्यादाएं लांघते हुए उन्हें अपमानित किया। उन पर जातिगत टिप्पणियां कीं और गंभीर मानसिक यंत्रणा दी।
राजेंद्र शर्मा ने स्पष्ट किया कि भारतीय मजदूर संघ सदैव श्रमिक हितों की रक्षा के लिए संकल्पित रहा है। यदि तीन दिन में सकारात्मक पहल नहीं हुई तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन तेज किया जाएगा।
इस दौरान सीपी शर्मा, अवधेश मिश्रा, जिलामंत्री रवि गौतम, संदीप राजानी, राजस्थान विकास प्रकोष्ठ प्रभारी ब्रजेश कांत, महामंत्री राजेश पाराशर सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें
- कंपनी द्वारा जारी किए गए एकतरफा छंटनी नोटिस को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा सभी 49 प्रभावित कर्मचारियों को सेवा में वापस बहाल कर ससम्मान कार्य पर लिया जाए।
- गतिरोध को समाप्त करने के लिए कंपनी प्रबंधन, श्रमिक संघ और श्रम विभाग के बीच तत्काल प्रभाव से औपचारिक वार्ता आयोजित की जाए।
- औद्योगिक संबंधों, कर्मचारियों के अधिकारों और श्रम कानूनों से संबंधित सभी वैधानिक प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
- कर्मचारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार, मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना, सामाजिक अपमान और मानहानि के एवज में उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।
- पुलिस में दर्ज एफआईआर के आधार पर नामजद आरोपियों गजानंद गौड़ और विष्णु दत्त शर्मा के विरुद्ध निष्पक्ष, त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

