अब भारत बनेगा ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब, कैबिनेट ने दी सेमिकॉन 2.0 को मंजूरी

0
8

नई दिल्ली। Semicon 2.0 approved: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट वाली सेमिकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D), नई फैब इकाइयों और कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सेमिकॉन 2.0 के तहत चिप डिजाइन के क्षेत्र में शुरुआती सफलता को आगे बढ़ाया जाएगा। अब तक 105 स्टार्टअप चिप डिजाइन पर काम शुरू कर चुके हैं। नई योजना के तहत रणनीतिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए चिप, सिस्टम डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) विकसित करने पर जोर होगा, ताकि भारत वैश्विक चिप डिजाइन IP केंद्र बन सके।

इस मिशन के जरिये सेमिकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनें, सामग्री, रसायन और गैसों के उत्पादन तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) से जुड़ी कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे देश में प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

पहला सेमीकंडक्टर फैब 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद सरकार सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब और डिस्प्ले फैब जैसी नई इकाइयों को भारत में स्थापित करने के लिए वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करेगी।

इस मिशन के माध्यम से ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) और OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) इकाइयों को बढ़ावा दिया जाएगा। लक्ष्य है कि भारत में अत्याधुनिक पैकेजिंग तकनीक लाई जाए और देश इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बने।

भारत ने 28nm से 110nm तकनीक से शुरुआत की है। अब सरकार अधिक उन्नत चिप तकनीकों और एडवांस्ड नोड्स के विकास के लिए देश और विदेश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगी।

देश के 315 विश्वविद्यालयों में अब तक करीब 68,000 छात्रों को आधुनिक EDA (Electronic Design Automation) टूल्स के जरिए चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे कॉलेज स्तर पर प्रशिक्षण को और मजबूत किया जाएगा तथा क्लीन रूम, फैब निर्माण और अन्य तकनीकी कौशल पर भी उद्योग के साथ मिलकर काम होगा।

सरकार के अनुसार, सेमिकॉन 2.0 सभी क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति देगा, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, राष्ट्रीय सुरक्षा को बेहतर बनाएगा और भारत को महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में मदद करेगा। सरकार का कहना है कि सेमिकॉन 1.0 की सफलता के बाद अब सेमिकॉन 2.0 के जरिए भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को लंबे समय तक समर्थन दिया जाएगा, ताकि देश दुनिया के प्रमुख चिप निर्माण और डिजाइन केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सके।

सेमिकॉन 1.0 में अब तक क्या हुआ?
सेमिकॉन 1.0 मिशन के तहत तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव आए हैं। इनमें 1 सिलिकॉन फैब, 1 सिलिकॉन कार्बाइड फैब, 1 एकीकृत गैलियम नाइट्राइड (GaN) माइक्रो LED डिस्प्ले फैब और 9 सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं। ये इकाइयां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों की चिप जरूरतों को पूरा करेंगी। स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से Micron, Kaynes और CG Semi ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य कंपनी 2026 में उत्पादन शुरू करने की तैयारी में है।

डिजाइन के मामले में अब तक स्टार्टअप और एमएसएमई की 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है, जबकि 105 स्टार्टअप/एमएसएमई को उद्योग-स्तरीय EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। ये कंपनियां सैटेलाइट संचार, ड्रोन, निगरानी कैमरे, IoT, LED ड्राइवर, AI, दूरसंचार उपकरण और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्रों के लिए चिप और सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) विकसित कर रही हैं। सफल प्रोटोटाइप के बाद इन परियोजनाओं को व्यावसायिक स्तर पर तैनात किया जाएगा।