नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े संशोधित बिल में बड़ा बदलाव करते हुए रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अधिकतम टैरिफ 500% से घटाकर 100% कर दिया है। साथ ही, इस टैरिफ को सभी देशों के बजाय रूसी तेल और प्राकृतिक गैस के केवल पांच सबसे बड़े खरीदारों तक सीमित रखने का प्रस्ताव है, जिसमें भारत भी शामिल है।
यह बिल Sanctioning Russia Act का संशोधित संस्करण है, जिसे पहली बार अप्रैल 2025 में पेश किया गया था। उस समय रूस से तेल, गैस और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था।
ग्राहम ने पिछले सप्ताह अपनी मृत्यु से एक दिन पहले यूक्रेन दौरे के दौरान कहा था कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ इस बिल को आगे बढ़ाने पर सहमति बना ली थी। यह सहमति एक साल से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद बनी थी। सीनेट के सहयोगियों (Senate aides) ने बताया कि इस बिल को 26 सीनेटरों का समर्थन मिल चुका है और आने वाले दिनों में इसे और अधिक समर्थन मिलने की उम्मीद है।
टैरिफ बड़े खरीदार देशों तक सीमित
संशोधित बिल में सबसे बड़ा बदलाव रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित टैरिफ को कम करना और उसका दायरा सीमित करना है। पहले सभी खरीदार देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। अब नए प्रस्ताव में अधिकतम 100% टैरिफ का प्रावधान रखा गया है और इसे केवल रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों तक सीमित कर दिया गया है।
वॉशिंगटन में 14 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा, “यह टैरिफ सभी देशों पर नहीं, बल्कि केवल रूस से तेल खरीदने वाले 5 सबसे बड़े देशों पर लागू होगा। इसकी अधिकतम दर 100% होगी। साथ ही, विशेष परिस्थितियों में छूट देने का अधिकार भी होगा, लेकिन वह सीमित होगा। रूसी तेल के पांच सबसे बड़े खरीदार देश चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान हैं।”
रूस पर निर्भरता कम करने वालों को छूट
संशोधित बिल में उन देशों के लिए छूट का भी प्रावधान किया गया है, जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम खरीदते हैं और रूस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। सीनेट के सहयोगियों के मुताबिक, इस छूट का फायदा जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम जैसे देशों को मिल सकता है।
टैरिफ के अलावा, इस बिल में रूस की अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। इनमें ऊर्जा, रक्षा, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।इसके तहत पश्चिमी देशों की समुद्री सेवाओं से बाहर काम करने वाले रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (तेल टैंकरों का बेड़ा), रूस के केंद्रीय बैंक और सरकार समर्थित बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स जैसे यामल LNG तथा आर्कटिक LNG 1, 2 और 3 को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया गया है। इस प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर उन्हें लगे कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, तो वे इन प्रतिबंधों (Sanctions) में छूट (Waiver) दे सकते हैं।
पहले के प्रस्ताव में क्या था
Sanctioning Russia Act 2025 के मूल प्रस्ताव में अमेरिका के अब तक के सबसे कड़े द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) का प्रावधान था। इसके तहत उन देशों से आयात होने वाले सामान और सेवाओं पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, जो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम या अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदते हैं।
इसका सबसे अधिक असर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर पड़ता, क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी इन देशों ने रियायती कीमतों पर रूसी क्रूड ऑयल का आयात जारी रखा था। अमेरिकी कांग्रेस की वेबसाइट के अनुसार, इस बिल में एक और प्रावधान था, जिसके तहत उन देशों से आने वाले आयात पर 500% तक शुल्क (ड्यूटी) लगाने का प्रस्ताव था, जो जानबूझकर रूस से जुड़े यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में शामिल होते हैं।

