नई दिल्ली। सरकार और पेट्रोलियम कंपनियां किस तरह हमें चूना लगा रही हैं, इसका अंदाजा भी आपको नहीं होगा। हमे 58 रुपये लीटर का इथेनॉल पेट्रोल के भाव यानी 112 रुपये प्रति लीटर बेच रही है। पेट्रोल में 20 से 30 फीसदी मिलाकर 54 रुपये लीटर कीमत अधिक वसूल रही है। इस तरह यह इथेनॉल आपकी जेब पर कितना भारी पड़ रहा है।
ऊपर से वाहनों का माइलेज कम होना। इतनी है नहीं, गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे उनकी मेंटेनेंस का खर्चा अलग। यानी वाहन मालिकों का हर तरह से नुकसान।
ताज्जुब की बात तो यह है आम जनता यदि किसी वस्तु में मिलावट करे तो उसे सजा हो जाती है। किन्तु सरकार और पेट्रोलियम कंपनियां मिलावट करे तो उनको कोई सजा नहीं। बल्कि सजा से बचने के लिए पहले ही सरकार कानून में संशोधन कर लेती है।
इन सबके पीछे सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की अपने बेटे निखिल को फायदा पहुंचाने की जो साजिश चल रही है। वह पूरा देश देख रहा है और समझ भी रहा है। मगर इसके लिए जनता कोई आंदोलन नहीं कर रही।
जनता की सुस्ती ही आपकी जेब कटवा रही है। आप लुट रहे हो और दूसरों को भी लुटवा रहे हो। विदेशी मुद्रा बचाने की आड़ में जनता की सरकार जनता द्वारा ही चुनी गई जनता का ही शोषण करने को आमादा है।
हम आपको बता दें क्रूड ऑयल के तेजी से बढ़ते दामों और जियो पॉलिटिक्स के चलते शिपमेंट में देरी जैसी कई समस्याओं को देखते हुए, केंद्र सरकार इथेनॉल (Ethanol) को तेजी से बढ़ावा दे रही है।
भारत सरकार ने सेंटर मोटर व्हीकल रूल्स में बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जानकारी दी कि इन संशोधनों में E85 ईंधन और E100 ईंधन के प्रावधान शामिल हैं। बता दें कि E100 होने पर वाहन लगभग पूरी तरह शुद्ध इथेनॉल पर चल सकेंगे।
इथेनॉल को सस्ता और इनवायरमेंट फ्रेंडली बताया जा रहा है लेकिन जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं उसके हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जो इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाले पानी से जुड़ी है।
1 लीटर इथेनॉल में हजार लीटर पानी बर्बाद
कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने 27 सितंबर 2024 को नई दिल्ली में ISMA (इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन) के एक कार्यक्रम में बताया था कि चावल से 01 लीटर इथेनॉल बनाने में 10,790 लीटर पानी का इस्तेमाल किया जाता है। मक्के से 1 लीटर इथेनॉल तैयार करने पर 4,670 लीटर और गन्ने से 1 लीटर इथेनॉल बनाने पर 3,630 लीटर पानी खर्च होता है। वहीं 1 किलो चावल उगाने के लिए लगभग 3,000 से 5000 लीटर पानी खर्च होता है।
वहीं 1 किलो चावल उगाने के लिए लगभग 3,000 से 5000 लीटर पानी खर्च होता है, चूंकि 1 टन (1000 किलो) चावल से लगभग 425 से 470 लीटर तक इथेनॉल बनता है, इसलिए केवल फसल उगाने के अनुपात में ही प्रति लीटर इथेनॉल पर हजारों लीटर पानी का भार आता है।

