Sunday, July 12, 2026
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हॉस्टलों में राष्ट्रगान अनिवार्य, वसुंधरा सरकार का नया फैसला

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जयपुर।  राजस्थान सरकार ने अब स्कूल के स्टूडेंट्स में देशभक्ति की भावना को ‘जगाने’ के लिए हॉस्टलों में
राष्ट्रगान को अनिवार्य कर दिया है।

राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने ओबीसी, एससी तथा एसटी के सभी 789 हॉस्टलों को राष्ट्रगान गाने का निर्देश जारी किया है।

निर्देश के अनुसार सभी हॉस्टलों में सुबह 7 बजे राष्ट्रगान अनिवार्य होगा। सरकार के द्वारा सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार सभी आवासीय स्कूलों में राष्ट्रगान अनिवार्य होगा। यह परंपरा हॉस्टलों में भी फॉलो की जाएगी। विभाग द्वारा जारी यह निर्देश रविवार से ही प्रभावी हो गया है।

विभाग के प्रमुख सचिव समित शर्मा ने बताया कि राष्ट्रगान गाने की यह परंपरा हॉस्टलों की दिनचर्या में पहले से शामिल है।उन्होंने कहा, ‘हॉस्टलों में रहने वाले बच्चे हर सुबह प्रार्थना के लिए तो एकत्र होते हैं। स्टाफ की कमी की वजह से राष्ट्रगान गाने के निर्देश का पालन नहीं हो पा रहा था।

यह निर्देश इसलिए जारी किया गया है कि राष्ट्रगान को नियमित तौर पर गाया जाए।’ विभाग के अंतर्गत में करीब 800 हॉस्टल हैं, जिनमें 40 हजार स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इससे पहले जयपुर के मेयर अशोक लाहोटी ने भी सुबह राष्ट्रगान और शाम को वंदेमातरम गाना अनिवार्य कर दिया था।

इसके बाद राजस्थान यूथ बोर्ड ने 8 नवंबर को सवाई मान सिंह स्टेडियम में ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम का आयोजन किया था। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी इस कार्यक्रम में शामिल हुईं थीं।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ज्वार-बाजरा देने की तैयारी

नई दिल्ली । केंद्र सरकार राशन की दुकानों और मिड डे मील जैसी योजनाओं में ज्वार, बाजरा और रागी जैसे छोटे दाने वाले अनाज भी वितरित करने की तैयारी कर रही है। कृषि सचिव एस. के. पटनायक ने सोमवार को यह जानकारी दी। सरकार पोषक अनाज के रूप में इनकी ब्रांडिंग और देश भर में इनके प्रसार की तैयारी भी कर रही है।

एक कार्यक्रम के दौरान पटनायक ने कहा, ‘नीति आयोग ने इन अनाजों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में शामिल करने का सुझाव दिया है। अन्य अनाजों की तुलना में इनमें पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। रागी में कैल्शियम की प्रचुर मात्र होती है। इसीलिए सरकार पोषक अनाज के रूप में इनकी ब्रांडिंग करने की तैयारी में है।

अभी इन अनाजों की उपज बहुत कम है। उत्पाद बढ़ाने के लिए हमें ज्यादा पैदावार वाली किस्मों की जरूरत है। भंडारण और उत्पादन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है।’ पटनायक ने कहा कि इन अनाजों के क्षेत्र में शोध व अनुसंधान की जरूरत है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ज्यादा पैदावार वाली वैरायटी विकसित करने पर काम कर रहा है। जल्द ही इसके नतीजे दिख सकते हैं। इन अनाजों को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखने के लिए भंडारण से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करने पर भी काम हो रहा है।

इन अनाजों के बेहतर उत्पादन और मार्केटिंग के लिए राज्यों को भी किसान उत्पादन संगठन (एफपीओ) स्थापित करने और कृषि आय बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए। कृषि सचिव ने बताया कि ज्वार व बाजरा जैसे अनाजों के लिए मैकेनिकल हार्वेस्टर विकसित करने पर भी काम हो रहा है।

तीन फीसद प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ भारत 22 ETF

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नई दिल्ली । शेयर बाजार में आज भारत 22 ईटीएफ की लिस्टिंग हो गई है। इसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर लिस्ट किया गया है। भारत 22 ईटीएफ, शुरुआती कारोबार में तीन फीसद तक की तेजी के साथ 37.33 रुपये प्रति यूनिट पर लिस्ट हुआ है।

 भारत 22 ईटीएफ कुल 4 गुना सब्सक्राइब्ड हुआ था, जबकि एंकर इन्वेस्टर का हिस्सा 6 गुना सब्सक्राइब्ड किया गया। सरकार ने इसके जरिए कुल 14500 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें केंद्र सरकार की कंपनियां, एसयूयूटीआई, पीएसयू बैंक जैसी 6 कोर सेक्टर की 22 कंपनियों के शेयर शामिल हैं। इसका इश्यू प्राइस 35.97 रुपये प्रति यूनिट है।

डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक ऐसेट मैनेजमेंट के सचिव नीरज कुमार गुप्ता ने बताया था कि भारत 22 ईटीएफ ने चालू वित्त वर्ष में अबतक विनिवेश के जरिए 52500 करोड़ रुपये जुटा लिये हैं। यह एंकर इन्वेस्टर्स के लिए 14 नवंबर से एनएफओ के लिए और रिटेल निवेशकों के लिए 15 नवंबर से 17 नवंबर तक खुला था।

इस दौरान इसे 4 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ था। इस ईटीएफ के जरिये सरकार का इरादा 8,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। यह ईटीएफ 22 ब्लूचिप कंपनियों का एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो था। यह सरकार के समग्र विनिवेश कार्यक्रम का एक हिस्सा रहा है।

भारत 22 में कौन कौन कंपनियां शामिल:
भारत-22 ईटीएफ में सीपीएसई, पीएसयू बैंक और एसयूयूटीआई की कंपनियां शामिल हैं। अगर सीपीईसी की बात करें तो इसमें कंटेनर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, आईओसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, पीएफसी, कोल इंडिया, ओएनजीसी, गेल, एनर्जी इंडिया लिमिटेड, रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड शामिल हैं। वहीं भारत-22 ईटीएफ में 6 सेक्टर भी शामिल हैं।

ये आधारभूत सामग्री, ऊर्जा, वित्त, एफएमसीजी, औद्योगिक और उपभोक्ता सेवा से जुड़ी कंपनियां हैं। भारत-22 ईटीएफ में सेक्टोरल शेयर लिमिट 20 फीसदी तय की गई है, जबकि ईटीएफ में कंपनी विनिवेश पर लिमिट 15 फीसदी तय की गई है। इसमें तीन बैंक एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक शामिल हैं।

कोल इंडिया के शेयर्स भारत 22 ईटीएफ को किये ट्रांस्फर
सरकार ने कोल इंडिया के 507 करोड़ रुपये के शेयर्स भारत 22 ईटीएफ को हस्तांतरित कर दिये हैं। यह जानकारी सोमवार को रेग्युलेटरी फाइलिंग से मिली है। बीएसई की फाइलिंग में कोल इंडिया लिमिटेड ने बताया कि “कोल मंत्रालय ने देश के राष्ट्रपति की ओर से 1,92,99,613 इक्विटी शेयर्स भारत 22 ईटीएफ को 507 करोड़ रुपये में ट्रांस्फर कर दिये गये हैं।”

आरकॉम के 4G स्पेक्ट्रम पर हो सकती है जियो की नजर

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 कोलकाता। रिलायंस जियो इन्फोकॉम अब सिस्टेमा श्याम टेलिसर्विसेज (एसएसटीएल) का मर्जर करने से रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आरकॉम) को सात महत्वपूर्ण मार्केट्स में 850 Mhz बैंड में मिले 4G स्पेक्ट्रम को हासिल करने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि, ऐसा वह तभी कर पाएगा, जब टेलिकॉम सेक्टर रेग्युलेटर ट्राई की स्पेक्ट्रम की सीमा पर छूट देने की सिफारिश को सरकार से इजाजत मिल जाए।

सेक्टर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल्ली, कोलकाता, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश-पश्चिम और पश्चिम बंगाल में एसएसटीएल के 850 MHz बैंड में 4G स्पेक्ट्रम जियो के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि यह स्पेक्ट्रम फाइनैंशल इयर 2033 तक वैध है और इन सर्कल में आरकॉम का अधिकांश स्पेक्ट्रम चार वर्षों (जुलाई 2021) में समाप्त हो रहा है।

ऐनालिस्ट्स को जियो की ओर से महाराष्ट्र, पंजाब और आंध्र प्रदेश में आरकॉम के 4G स्पेक्ट्रम को निशाना बनाने की भी उम्मीद है क्योंकि इन सर्कल में एसएसटीएल के पास कोई 800 MHz स्पेक्ट्रम नहीं है। इस बारे में ईटी की ओर से ईमेल से भेजे गए प्रश्नों का जियो ने उत्तर नहीं दिया।

अगर टेलिकॉम कंपनियों पर प्रत्येक बैंड में स्पेक्ट्रम रखने की 50 पर्सेंट की सीमा को हटाने के ट्राई के प्रपोजल को सरकार मंजूरी देती है तो आरकॉम अपनी 4G स्पेक्ट्रम होल्डिंग मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।

ऐनालिस्ट्स का कहना है कि जियो महत्वपूर्ण 4G सर्विसेज के लिए सबसे अच्छे माने जाने वाले 850 MHz बैंड में अपना दबदबा बनाने की कोशिश करेगा।

इससे उसे देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। भारती भी इस महत्वपूर्ण बैंड में अपनी होल्डिंग बढ़ाने का प्रयास कर सकता है।

भारती एयरटेल अभी टाटा टेलिसर्विसेज का कन्ज्यूमर मोबाइल बिजनस अक्वायर कर रहा है और इसके जरिए उसे यह स्पेक्ट्रम भी मिलेगा। आरकॉम से 850 Mhz बैंड स्पेक्ट्रम खरीदने की योजना के बारे में पूछने पर भारती एयरटेल के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से मना कर दिया।

हालांकि, उनका कहना था कि कंपनी इंट्रा बैंड स्पेक्ट्रम के लिए 50 पर्सेंट की सीमा बरकरार रखने के पक्ष में है जिससे किसी एक टेलिकॉम कंपनी का उस बैंड में एकाधिकार नहीं हो सके।

इससे पहले भारती एयरटेल ने कहा था कि वह आरकॉम से चुनिंदा स्पेक्ट्रम और इक्विपमेंट खरीदने में दिलचस्पी रखता है, जिसे कर्ज के बोझ से दबी आरकॉम के लेंडर्स बेचना चाहते हैं।

मामूली गिरावट के साथ शेयर बाजार की शुरुआत

नई दिल्ली। मंगलवार को शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स ने दिन की शुरुआत 33,720 से की, वहीं निफ्टी 10,386 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का माहौल दिख रहा है। कारोबार के पहले घंटो में सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ कारोबर कर रहे हैं।

एक ओर जहां एनटीपीसी,आईटीसी, एचपीसीएल, पावर ग्रिड, ओएनजीसी, बीपीसीएल, आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में गिरावट देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐक्सिस बैंक, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी आदि के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई है।

सोमवार को बाजार ने कमजोर शुरुआत के बाद रफ्तार पकड़ी थी। सेंसेक्स 45 अंकों तक चढ़ने में कामयाब रहा था और निफ्टी ने बाद में रिकवरी दर्ज की थी। बीएसई का सेंसेक्स 45 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 33,724 पर और एनएसई का निफ्टी 10 अंक बढ़ 10,399 पर बंद हुआ था।

अनसोल्ड फ्लैटों पर लगेगा कुल मूल्य का 8 से 10 फीसदी टैक्स

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  •  फ्लैटों की जमाखोरी पर लगेगा अंकुश
  • अगले वित्त वर्ष से लागू होगा नया कर
  • अगस्त तक देश के प्रमुख आठ शहरों में करीब 9.50 लाख अनबिके फ्लैट का था स्टॉक
  • नए नियम से कीमतों में बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा

मुंबई। आयकर विभाग रियल एस्टेट डेवलपरों के पास एक साल से अधिक समय से पड़े अनबिके फ्लैटों पर टैक्स लगाने की तैयारी में है। इससे डेवलपरों के भविष्य में दाम बढऩे की उम्मीद में फ्लैटों को रोककर रखने की रणनीति पर लगाम लगेगी। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस तरह के फ्लैटों पर अगले वित्त वर्ष से ताजा कर लगाया जाएगा।

यह कर उन फ्लैटों पर लागू होगा जिन्हें डेवलपरों ने बिक्री के लिए स्टॉक (स्टॉक इन ट्रेड) के नाम रखा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि कर की दर संपत्ति की कुल कीमत की 8 से 10 फीसदी हो सकती है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) पहले ही इस बारे में आयकर अधिकारियों को आंतरिक दिशानिर्देश भेज चुका है। 

आय कर कानून की धारा 22 के तहत करदाता को संपत्ति से हुए मुनाफे पर आय कर लगेगा। अधिकारी ने कहा कि यह धारा स्टॉक इन ट्रेड पर भी लागू होगी। सूत्रों के मुताबिक संपत्ति के मूल्यांकन की गणना उसकी सालाना कीमत के आधार पर की जाएगी।

कर अधिकारियों का मानना है कि खासकर बड़े रियल एस्टेट डेवलपर सांठगांठ करके बाजार में कृत्रिम कमी दिखाते हैं जबकि असल में ऐसा नहीं होता है। अब तक वे अनबिके फ्लैटों को स्टॉक इन ट्रेड में दिखाकर कर से बचते रहे हैं। 

एक अधिकारी ने कहा, ‘हम पूरे देश में ऐसे अनबिके फ्लैटों के आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं जो एक साल से अधिक समय से डेवलपरों के पास पड़े हैं। कर विभाग राज्यवार ऐसे फ्लैटों की समीक्षा कर रहा है जो नई कर व्यवस्था के तहत आ सकते हैं।’

उन्होंने कहा कि फ्लैटों की कीमतों में गिरावट के बावजूद अनबिके फ्लैटों की संख्या में ठहराव की स्थिति है जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। रियल एस्टेट सलाहकार लायसेस फोरास के ताजा आंकड़ों के मुताबिक रियल एस्टेट बाजार के लिए अहम 8 शीर्ष शहरों में कुल करीब 10 लाख अनबिके फ्लैट हैं जबकि 50 शहरों में यह आंकड़ा 11.5 लाख है।

यह स्थिति तब है जबकि पिछले दो सालों में रियल एस्टेट बाजार में 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। रियल एस्टेट सलाहकारों के मुताबिक बिक्री की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए डेवलपरों को इन फ्लैटों को बेचने में कम से 44 महीने का समय लगेगा। 

लायसेस फोरास के संस्थापक और प्रबंध निदेशक पंकज कपूर ने कहा, ‘स्टॉक इन ट्रेड पर कर लगाने से रियल एस्टेट डेवलपरों पर बोझ पड़ेगा खासकर जब उन्हें मौजूदा बाजार कीमत पर स्टॉक बेचने में मुश्किल हो रही है। अलबत्ता इससे डेवलपर प्रतिस्पद्र्घी कीमत पर फ्लैट बेचने के लिए प्रेरित होंगे।’

सरकार ने नोटबंदी के जरिये काला धन रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है जिसका रियल एस्टेट बाजार में सकारात्मक असर पड़ा है। नोटबंदी के बाद कई डेवलपरों ने कीमतें घटाई हैं। लेकिन मुंबई, चेन्नई और बेंगलूरु में अब भी डेवलपरों ने कई कारणों का हवाला देते हुए कीमतें नहीं घटाई हैं।

इंडियन स्काउट बॉबर अब भारत में भी लॉन्च

बाइक के दीवानों के लिए आई ये नई बाइक, कीमत है 12.99 लाख रुपए

नई दिल्ली। अमेरिकी ब्रांड की बाइक इंडियन स्काउट बॉबर अब भारत में भी लॉन्च हो चुकी है। कंपनी ने इस बाइक के भारतीय संस्करण का नाम इंडियन स्काउट बॉबर रखा है।

कंपनी ने इसकी कीमत 12.99 लाख रुपए रखी है। पिछले सप्ताह गोवा में आयोजित इंडियन बाइक वीक 2017 के दौरान यह बाइक लॉन्च हुई।

इस बाइक को लोग 50 हजार रुपए देकर बुक कर सकते हैं। भारत में लॉन्च की गई इस बाइक को कंपनी ने स्ट्रिप्ड डाउन मॉडल यानी बोल्ड लुक वाली बाइक करार दिया है। इस का इंजन 1131 सीसी का लिक्विड कूल्ड वी ट्विन पॉवर का है। यह 99बीएचपी का पॉवर और 97.6एनएम का टॉर्क जेनरेट करता है।

इस बाइके इंजिन में 6 स्पीड गियर बॉक्स जुड़े हैं। इस बाइक में हैंडलबार अन्य बाइक्स की तुलना में छोटा है। कंपनी का दावा है कि टायर बड़े ग्रिप वाले हैं जो चालक को तेजी से मुड़ने में सहायता करते हैं। ईंधन टैंक पर इंडियन जिस तरह से लिखा गया है वह पूरी तरह से बाइक को नया लुक देता है।

कंपनी के मुताबिक यह पांच कलर- ब्रॉन्ज स्मॉक, लाल, स्टार सिल्वर स्मॉक, थंडर ब्लैक और थंडर ब्लैक स्मॉक में उपलब्ध होगी। इस बाइल की सीट और साइलेंसर को जिस तरह से डिजाइन किया गया है उससे  बाइक को एक आक्रामक लुक मिलता है।

कोटा में प्याज 50 रुपए किलो तक बिका

कोटा। प्याज की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई है। बाहर से आपूर्ति कम होने से कीमतें उछाल पर है। इस कारण प्याज का सोमवार को रिटेल (खुदरा) बाजार भाव 50 रुपए प्रति किलो रहा।

फल थोक सब्जीमंडी के व्यापारी भीखा भाई ने बताया कि अभी कोटा मंडी में प्याज की आवक कम हो रही है। संभावना है कि प्याज के वर्तमान में जो बाजार भाव चल रहे है, वह अभी करीब डेढ़ माह तक नीचे नहीं आएंगे।

सामान्य दिनों में फल थोक सब्जी मंडी में 4 से 5 हजार कट्‌टा प्याज की आवक रहती थी, उसमें काफी ज्यादा गिरावट आई है। व्यापारी वर्ग ने बताया कि किसानों द्वारा प्याज की खेती कम करने से संकट की स्थिति बनी है।

कोटा में मध्यप्रदेश के भानपुरा, रामपुरा, सोयत झालावाड़ जिले के भवानीमंडी बकानी क्षेत्र से सिर्फ 2 हजार कट्‌टा प्याज मंडी में रहा है। शहर में रोजाना 7 से 8 सौ कट्‌टा प्याज की खपत होती है। बाकी माल दिल्ली और यूपी जाने से प्याज के दामों में बढ़ोतरी एक सप्ताह में इन सब्जियों के भावों ऐसे आई तेजी है।

मार्बल, ग्रेनाइट, टाइल्स और कोटा स्टोन की रॉयल्टी 20% तक घटी

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मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद खान विभाग ने सोमवार को जारी की अधिसूचना

जयपुर/ कोटा।  राजस्थान सरकार ने मार्बल, कोटा स्टोन, चूना पत्थर, टाइल्स और ग्रेनाइट की रॉयल्टी 20 फीसदी तक घटा दी है। मुख्यमंत्री मंत्री वसुंधरा राजे की ओर से की गई घोषणा के बाद खान विभाग ने सोमवार को रॉयल्टी कम करने की अधिसूचना जारी कर दी। पहले 30 फीसदी तक दरें बढ़ाई गई थी, अब 10 फीसदी दरें बढ़ी मानी जाएगी।

किसकी रॉयल्टी कितनी कम हुई (रु./प्रति टन)
स्टोन                        पुराना रेट         नया रेट
कोटा स्टोन                 140 रु.         115 रु.
मार्बल मकराना           490 रु.         420 रु.
पूरे प्रदेश में मार्बल       560 रु.         475 रु.
टाइल्स                      455 रु.          385 रु.
ब्लाॅक                       310 रु.          280 रु.
ग्रेनाइट                     280 रु.          235 रु.

इससे आम आदमी को थोड़ी राहत मिल जाएगी। माना जा रहा है कि प्रदेश में होने वाले दो लोकसभा और एक विधानसभा उप चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया है।

एक माह पहले 27 अक्टूबर 2017 को खान विभाग ने सेजा पत्थर सहित 39 खनिजों पर 25 से 30 फीसदी रॉयल्टी बढ़ा दी थी।

अधिसूचना जारी
सीएमकी घोषणा के बाद विभाग की ओर से रॉयल्टी कम करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इससे आम आदमी को काफी राहत मिल जाएगी।
-अर्पणा अरोरा, प्रमुख सचिव खान एवं पेट्रोलियम

इसको लेकर प्रदेश भर में विरोध हुआ। खनन कारोबारियों से लेकर आम जनता तक के स्तर पर विरोध किया गया। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद उन्होंने रॉयल्टी कम करने की घोषणा की थी।

इसके बाद खान विभाग की ओर से मार्बल, कोटा स्टोन, टाइल्स और ग्रेनाइट की रायल्टी 20 फीसदी तक कम करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी।

मार्बल, ग्रेनाइट और टाइल्स की कीमत कम होने से घर बनाने वालों के जेब पर थोड़ा कम असर पड़ेगा। हालांकि अन्य खनन सामग्री पर रॉयल्टी कम नहीं की गई है।

 

GST कलेक्शन में 10 हजार करोड़ रुपये की गिरावट: वित्त मंत्रालय

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नई दिल्ली। नवंबर 2017 में जीएसटी कलेक्शन में बड़ी गिरावट आई है। सोमवार को वित्त मंत्रालय ने बताया कि 27 नवंबर तक फाइल किए गए रिटर्न्स से 83,346 करोड़ रुपये ही कलेक्ट हुए हैं।

जीएसटी के अंतर्गत अक्टूबर में 95,131 करोड़ रुपये और सितंबर में 93,141 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। पिछले महीनों के मुकाबले इस महीने के जीएसटी कलेक्शन में 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट है। इस बार का जीएसटी कलेक्शन कम रहने की सबसे बड़ी वजह सरकार द्वारा जीएसटी के स्लैब और रेट्स में बदलाव करना है।

मंत्रालय ने बताया, ‘जीएसटी के अंतर्गत अबतक 95.9 लाख टैक्सपेयर्स रजिस्टर हो चुके हैं। इनमें से 15.1 लाख कम्पोजिशन डीलर्स हैं, जिन्हें हर तिमाही में रिटर्न फाइल करने होते हैं। अक्टूबर से 26 नवंबर तक 50.1 लाख जीएसटी रिटर्न्स फाइल हुए हैं।’

केंद्र ने राज्यों को जुलाई और अगस्त महीने के लिए 10,806 करोड़ रुपये का मुआवजा भी जारी किया है। इसके अलावा राज्यों को सितंबर और अक्टूबर महीने के लिए 13,695 करोड़ रुपये कंपोजिशन के तौर पर जारी किए गए हैं। जीएसटी लागू होने के बाद यह चौथा महीना है।

जीएसटी के अंतर्गत रेवन्यू में गिरावट को समझाते हुए मंत्रालय ने बताया कि शुरुआत में इंटीग्रेटेड जीएसटी गुड्स के एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने पर लिया जाता था।