Monday, July 13, 2026
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मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी शुल्क 4 रुपये किया जाए: ट्राई

नई दिल्ली। टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी फी को मौजूदा 19 रुपये से घटाकर अधिकतम 4 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। उसने संबंधित पक्षों को 29 दिसंबर तक इस प्रस्ताव पर राय देने को कहा है।

ट्राई की दलील है कि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी प्रवाइडर्स की ऑपरेशनल कॉस्ट पिछले दो वर्षों में घटी है जबकि पोर्टिंग के अनुरोधों की संख्या बढ़ी है और इसे देखते हुए प्रति ट्रांजैक्शन ज्यादा कॉस्ट रखने की तुक बेकार है।

ट्राई ने कहा, ‘प्रति पोर्ट ट्रांजैक्शन चार्ज (19 रुपये) अनुमानित फाइनैंशल डेटा और 2009 में दो एमएनपी सर्विस प्रवाइडर्स की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर तय किया गया था।’

उसने कहा, ‘दोनों ही एमएनपी प्रवाइडर्स के फाइनैंशल्स और पिछले दो वर्षों में पोर्टिंग के अनुरोधों के वॉल्यूम में बढ़ोतरी को देखते हुए अथॉरिटी की राय यह है कि 19 रुपये की मौजूदा सीमा ट्रांजैक्शन की कॉस्ट और वॉल्यूम को देखते हुए काफी ज्यादा है।’ लिहाजा अथॉरिटी ने प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 4 रुपये फी रखने का प्रस्ताव किया है।

ट्राई ने कहा कि अखिल भारतीय स्तर पर एमएनपी की इजाजत दिए जाने के बाद 2014-15 में पोर्टिंग के 3.68 करोड़ अनुरोध किए गए थे और 2016-17 में इनकी संख्या 6.36 करोड़ हो गई।

हालांकि ट्राई ने पांच वर्षों की अवधि में पोर्टिंग सब्सक्राइबर्स की अनुमानित संख्या से एमएनपी प्रोवाइडर्स की टोटल कॉस्ट में भाग दिया तो पाया कि 2009 के मुकाबले लागत काफी घट चुकी है।

रेग्युलेटर ने कहा कि जब प्रति पोर्ट ट्रांजैक्शन कॉस्ट 2016-17 के ऑडिटेड ऐनुअल अकाउंट्स के आधार पर रखी गई तो पता चला कि लागत घटकर 4 रुपये पर आ गई। हालांकि ऐनालिस्ट्स ने कहा कि लागत घटने से पोर्टिंग अनुरोधों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि इसके बजाय इसकी प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए। केपीएमजी इंडिया में टेलिकॉम, मीडिया और टेक्नॉलजी डिवीजन के हेड मृत्युंजय कपूर ने कहा, ‘जरूरी नहीं है कि कम प्राइस से अनुरोधों में बढ़ोतरी हो।

इसके बजाय कन्ज्यूमर्स के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने से बात बन सकती है।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा लागत हाई-एंड यूजर्स के लिए ज्यादा नहीं है, वहीं लोअर एंड पर ‘एक नया सिम लेने का विकल्प तो खुला ही रहता है।’

दिन भर में 3 सेल्फी यानी ‘सेल्फाइटिस’ की बीमारी

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लंदन। अगर किसी का दिन भर में तीन से ज्यादा सेल्फी लिए बिना मन नहीं भरता तो वह एक डिसॉर्डर का शिकार है। यह दावा  ने अपनी रिसर्च में किया है। यह रिसर्च इंटरनैशनल जर्नल ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड अडिक्शन में प्रकाशित की गई है।

इस रिसर्च के अनुसार शोधकर्ताओं ने सेल्फी से जुड़े इस डिसऑर्डर को ‘सेल्फाइटिस’ नाम दिया है। रिसर्च करने वाले नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के मार्क ग्रिफिथ ने बताया कि बीमारी का पता लगाने के लिए हमने दुनिया का पहला ‘सेल्फाइटिस बिहेवियर स्केल’ भी तैयार किया है।

अपनी तरह के इस अनूठे बिहेवियर स्कूल को 200 लोगों के फोकस ग्रुप और 400 लोगों पर सर्वे के बाद बनाया गया है। उनके मुताबिक, ज्यादा सेल्फी लेने वालों की आदतें काफी हद तक नशेबाजी की तरह होने लगती हैं। बढ़ रहे हैं सेल्फी की लत से कुहनी में समस्या के मामले इसलिए भारत में की गई रिसर्च-

  • वजह-1: भारत में फेसबुक के सबसे ज्यादा यूजर्स हैं।
  • वजह-2: सेल्फी की वजह से होने वाली सबसे ज्यादा 60 फीसदी मौतें भारत में होती हैं।

कब-कब ‘काल’ बनी सेल्फी?

  • मार्च 2014 से सितंबर 2016 के बीच दुनियाभर में 127 मौतें सेल्फी लेने के दौरान हुईं।
  • इन 127 मौतों में से 76 मौतें अकेले भारत में हुईं।

(कॉर्नेजी मेलन यूनिवर्सिटी और इंद्रप्रस्थ इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फर्मेशन दिल्ली की सर्वे रिपोर्ट)

सेल्फाइटिस को ऐसे पहचानें
 अध्ययन के मुताबिक सेल्फाइटिस बीमारी के तीन स्तर होते हैं।

  • पहला: दिन में 3 सेल्फी लेने की आदत होना, लेकिन सेल्फी सोशल मीडिया पर पोस्ट न करना।
  • दूसरा: सेल्फी सोशल मीडिया में शेयर करना शुरू कर देना।
  • तीसरा: हर समय अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की कोशिश करना। ऐसे लोग दिन में कम से कम 6 फोटो पोस्ट करते हैं।

इसलिए हो जाते हैं आदी
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि सेल्फाइटिस से ग्रस्त लोग ज्यादातर अपना आत्मविश्वास, मूड ठीक करने, अपनी यादें संजोने, खुद की स्वीकार्यता दिलाने और दूसरों से आगे रहने के लिए बार-बार सेल्फी लेते हैं। भारत के लोगों में कुछ ज्यादा है सेल्फी की सनक

देश का सॉफ्टवेयर बाजार 2018 के अंत तक 5.1 अरब डॉलर होगा

नयी दिल्ली। भारत का सॉफ्टवेयर बाजार सालाना 11.9 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़कर 2018 के अंत तक 5.1 अरब डॉलर के स्तर को छु लेगा। शोध कंपनी आईडीसी ने आज यह जानकारी दी।

आईडीसी ने रपट में कहा, भारतीय सॉफ्टवेयर बाजार एपीईजे जापान को छोड़कर शेष एशिया प्रशांत क्षेत्र के भीतर सबसे तेजी से उभरते और गतिशील बाजारों में से एक है। डिजीटल परिवर्तन की पहल और एप्लीकेशन आधुनिकीरण अभियान की वजह से पिछले 12 महीनों में सॉफ्टवेयर बाजार में तेजी देखी गई।

आईडीसी इंडिया के एसोसिएट शोध प्रबंधक सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सेवा संदीप कुमार शर्मा ने कहा कि सभी संगठन डिजीटलीकरण की ओर बढ़ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहकों से जुड़ाव बढ़ाने और अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को अनुकूल बनाने के लिए कंपनियां ग्राहक व्यापार प्रबंधन सीआरएम जैसे सॉफ्टवेयर पर खर्च कर रही हैं।

रपट में कहा गया है कि सुरक्षा सॉफ्टवेयरों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 2017 की पहली छमाही में यह देश का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता हुआ सॉफ्टवेयर बाजार है।

कोटा के उपभोक्ताओं की गैस सब्सिडी एयरटेल ने हड़पी 

कोटा। संभाग के गैस उपभोक्ताओं की सब्सिडी उनके बैंक खातों के बजाय एयरटेल के खाते में जा रही है। ऐसे में उपभोक्ता सब्सिडी अपने खाते में डलवाने के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं।

बैंक से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एजेंसियों में शिकायत कर रहे हैं। एजेंसी संचालक द्वारा एयरटेल कम्पनी के प्रतिनिधियों से वार्ता की जा रही है। लेकिन उन्हें संतोषप्रद जवाब नहीं दिया जा रहा।

जानकारी के अनुसार इन दिनों लोगों को घरेलू गैस पर 248 रुपए तक की सब्सिडी मिल रही है। पहले यह सब्सिडी उपभोक्ता के बैंक खातों में जमा होती थी। लेकिन दो माह से कई उपभोक्ताओं की सब्सिडी एयरटेल पेमेंट बैंक खाते में जमा हो रही है।

यह उन उपभोक्ताओं के साथ हो रहा है जो एयरटेल कम्पनी की मोबाइल सिम का उपयोग करते हैं। एयरटेल कम्पनी द्वारा उपभोक्ताओं से आधार कार्ड मांगा जा रहा है। कम्पनी द्वारा ज्योंही सिम से आधार कार्ड को लिंक किया जाता है।  कम्पनी का प्रतिनिधि उपभोक्ता से पूछे बगैर ही सब्सिडी के लिए एयरटेल पेमेंट बैंक का ऑप्शन चुन लेता है।

सांगोद के गैस एजेंसी संचालक मुकेश खींची ने बताया कि कई सालों से लोगों की सब्सिडी उनकी गैस एजेन्सी पर दिए गए बैंक खातों में आ रही थी, लेकिन दो माह से कई लोगों के बैंक खातों में सब्सिडी नहीं आई। अधिकांश की सब्सिडी एयरटेल पेमेंट बैंक में जा रही है।

अब कोर्ट की तैयारी
हाड़ौती एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के महासचिव अरविंद गुप्ता ने बताया कि रोजाना करीब दो दर्जन से अधिक उपभोक्ता एयरटेल के एकाउंट में सब्सिडी ट्रांसफर की शिकायत करने आते हैं। इस बारे में एयरटेल कम्पनी के अधिकारियों से जवाब भी मांगा है।

लेकिन उन्होंने अभी तक भी सब्सिडी उनके खातें में ट्रांसफर करवाने का अधिकृत जवाब नहीं दिया। अब एसोसिएशन उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए एयरटेल कम्पनी के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

31 लाख उपभोक्ताओं से हड़पी 190 करोड़ की सब्सिडी
एयरटेल ने देश के 31 लाख गैस उपभोक्ताओं के हिस्से की 190 करोड़ की गैस सब्सिडी अपने खाते में जमा करवाई है। जिसे एयरटेल ने अब उपभोक्ताओं के बैंक खाते में ब्याज समेत वापस जमा कराने के लिए नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया को लिखा है।

कम्पनी के अनुसार ई केवाईसी के दौरान मोबाइल नम्बर को आधार कार्ड से लिंक कराते समय सोमवार तक देश के 31 लाख उपभोक्ताओं की डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम की 190 करोड़ की गैस सब्सिडी उनके पेमेंट बैंक में जमा हो गई है। जिसे ब्याज सहित उपभोक्ताओं के खाते में जमा कराने के लिए नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया को अवगत कराया है।

जियो सिनेमा का वेब वर्जन लॉन्च, यूजर्स को ऐसे फ्री में मिलेगा फायदा

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कोटा । रिलायंस जियो ने जियो सिनेमा का वेब वर्जन लॉन्च कर दिया है। इससे अब जियो टीवी को कम्प्यूटर, लैपटॉप पर ऑनलाइन भी देखा जा सकेगा। अभी तक जियो टीवी मोबाइल ऐप पर ही उपलब्ध थी। जियो यूजर्स काफी लंबे समय से इसकी डिमांड कर रहे थे। अब जियो टीवी ऐप पर जो कंटेंट अवेलेबल होता है वो कंटेंट जियो टीवी वेब वर्जन पर भी अवेलेबल होगा। अब जियो व्यूअर्स को एसडी और एचडी चैनल्स का ऑप्शन भी मिल गया है।

देखने के लिए क्या करना होगा
जियो टीवी का वेब वर्जन देखने के लिए आपको अपने जियो अकाउंट से लॉगइन करना होगा। जिन यूजर्स के पास जियो की 4G सिम है, वही यह कंटेंट देख सकेंगे।

7 दिन पुराना कंटेंट भी देख सकेंगे
जियो टीवी के खास फीचर्स वेब वर्जन में भी अवेलेबल होंगे। जैसे इसमें व्यूअर्स पिछले 7 दिनों का कंटेंट देख सकेंगे। ऐसे में यदि आपने अपना कोई पसंदीदा प्रोग्राम मिस कर दिया है तो आप उसे बाद में ऑनलाइन देख सकेंगे।

550 चैनल्स हैं जियो के पास
इंडियन टेलीकॉम मार्केट में रिलायंस जियो टीवी लीडिंग लाइव टीवी सर्विस है। अभी जियो टीवी 550 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स दे रही है।

एयरटेल टीवी, वोडफोन प्ले, आइडिया मूवीज एंड टीवी से इस मामले में जियो काफी आगे है।
एंटरटेनमेंट से लेकर स्पोर्ट्स तक होगा।

वेब वर्जन में होंगी ये कैटेगरी
जियो टीवी के वेब वर्जन में एंटरटेनमेंट, मूवीज, किड्स, स्पोर्ट्स, लाइफस्टाइल, इंफोटेंमेंट, रिलिजियस, न्यूज, म्यूजिक, रीजनल, डिवोशनल, बिजनेस न्यूज जैसी कैटेगरी जियो टीवी के वेब वर्जन में व्यूअर्स को मिलेंगी।

हिंदी के साथ ही मराठी, पंजाबी, उर्दू, बंगाली, इंग्लिश, मलयालम, तमिल, गुजराती, तेलुगु, भोजपुरी, नेपाली आदि लैंग्वेज भी यहां अवेलेबल हैं। जियो यूजर्स किसी भी ब्राउजर में https://jiotv.com/ ये टाइप कर जियो टीवी देख सकते हैं।

हिप्र में दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में लौटी बीजेपी, मोदी लहर ने गुजरात बचाया

नई दिल्‍ली। राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष की मजबूत किलेबंदी के बावजूद मोदी लहर ने गुजरात बचा लिया। बीजेपी ने गुजरात में लगातार छठी बार सत्‍ता में वापसी की है। हालांकि इस बार उसे 16 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। 182 में से बीजेपी के हिस्‍से में 99 सीटें आई हैं, जबकि कांग्रेस को 77 सीटों पर जीत हासिल हुई है।

2012 में बीजेपी ने 115 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर पहाड़ी राज्‍य हिमाचल की बात करें तो यहां बीजेपी करीब दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्‍ता में लौटी है। 2012 में कांग्रेस ने बीजेपी से सत्‍ता छीन ली थी।  
 
रिफॉर्म्स के लिए तैयार है देशः मोदी
दोनों राज्यों में जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “गुजरात और हिमाचल की जनता ने विकास के रास्ते को चुना। इस मार्ग से ही जनता की समस्याओं का हल निकलेगा। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में भारत को आगे जाना है तो विकास की नई ऊंचाइयों को पार करना होगा।”

उन्होंने कहा, “इन नतीजों से एक बात साबित हो गई है कि देश रिफॉर्म्स के लिए तैयार है। परफॉर्म करने को तैयार है और ट्रांसफॉर्म होकर रहेगा। लोकतंत्र में चुनाव सरकार के काम का लेखा-जोखा होते हैं।”

उन्होंने कहा, “हिमाचल ने जिस प्रकार से नतीजे दिखाए हैं, वे इस बात का सबूत हैं कि अगर आप विकास नहीं करते। गलत कामों में उलझे हैं तो पांच साल बाद जनता आपको स्वीकार नहीं करेगी।”
 
नई सरकार को बधाई: राहुल
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए नई सरकारों को बधाई दी। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, “कांग्रेस जनता के फैसले को स्वीकार करती है और दोनों राज्यों की नई सरकार को बधाई देती है। मैं गुजरात और हिमाचल प्रदेश के लोगों को हमें प्यार देने के लिए दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।”
 
 ये परफॉर्मेंस की जीत: शाह
उधर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ”देश की राजनीति में परफॉर्मेंस बेस्ड पॉलिटिक्स की जीत हुई है। इसका पूरा श्रेय राज्य की जनता और कार्यकर्ताओं को जाता है। गुजरात में हम छठी बार सरकार बनाने जा रहे हैं। हमारा वोट प्रतिशत बढ़ा है। इतने घोर जातिवादी प्रचार के बाद भी 1.25% की बढ़ोतरी हुई है।”

गुजरात के नतीजे (कुल सीटें-182)
पार्टी        जीत     वोट शेयर (% में)
बीजेपी      99            49.1
कांग्रेस      77            41.4
अन्‍य         6              9.5
 
हिमाचल प्रदेश के नतीजे (कुल सीटें- 68)
पार्टी      जीत     वोट शेयर (% में)
बीजेपी    44            48.7
कांग्रेस    21            41.8
अन्‍य       3              9.5

जीएसटीआर-1 फॉर्म में मंथली और क्वार्टरली फाइलिंग के विकल्प उपलब्ध

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नई दिल्ली । वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) जिसने नई कर व्यवस्था की तकनीकी सेटअप तैयार किया है ने बताया कि उसने अपने पोर्टल पर एक नया विकल्प उपलब्ध करवाया है जिसकी मदद से टैक्सपेयर जीएसटीआर-1 भरते समय मंथली और क्वार्टरली विकल्प का चयन कर पाएंगे।

किसे मिलेगा तिमाही रिटर्न का फायदा: इस नए विकल्प का फायदा उन कारोबारियों को मिलेगा जिनका पिछले वित्त वर्ष में कुल टर्नओवर 1.5 करोड़ तक का रहा है या फिर इतना टर्नओवर चालू वित्त वर्ष में होने का अनुमान है वो इस विकल्प (तिमाही रिटर्न) का इस्तेमाल कर सकते हैं। फॉर्म GSTR-1 एक करदाता की सभी बिक्री का सारांश देता है।

यह फैसला जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक ही किया गया है। इस विकल्प के मिल जाने के बाद करदाता प्रासंगिक रिटर्न अवधि के लिए GSTR 1 फाइल कर सकते हैं। इसमें कहा गया है कि करदाता जो तिमाही रिटर्न दाखिल करने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें ड्रॉप डाउन मेनू से तिमाही के अंतिम महीने का चयन करना होगा।

इसके अलावा, सभी करदाता, जो मासिक रिटर्न दाखिल करने का विकल्प चुनते हैं वो अब अगस्त से नवंबर तक जीएसटी 1 फाइल कर सकते हैं। पिछले महीने का रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।

जीएसटीएन की स्थापना इसलिए की गई है ताकि वो केंद्र के साथ साथ राज्य सरकारों,करदाताओं और हितधारकों को जीएसटी कार्यान्वयन के लिए आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवा मुहैया करवाए। आपको बता दें कि वस्तु एवं सेवा कर को 1 जुलाई 2017 को पूरे देश में लागू कर दिया गया था।

आयकर विभाग ने 7,961 करोड़ की अघोषित आय उजागर की

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नई दिल्ली। आयकर विभाग ने नोटबंदी के बाद 7,961 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता लगाया है। यह आंकड़ा पिछले साल नवंबर महीने से लेकर इस साल के मार्च महीने तक का है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बीते साल नोटबंदी का फैसला 8 नवंबर को लिया था। इस फैसले के बाद ही 9 नवंबर 2016 से उस वक्त बाजार में प्रचलित 500 और 1000 रुपए के नोट अमान्य कर दिए गए थे जो कि कुल करेंसी का 86 फीसद हिस्सा थे।

लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्री पॉन राधाकृष्णन ने बताया कि विभाग ने इस अवधि के दौरान हमने 900 समूहों के ठिकानों पर छापेमारी की थी जिसमें करीब 900 करोड़ रुपए जब्त किए गए और 7,961 करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता चला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल नोटबंदी की घोषणा कालेधन पर अंकुश लगाने, जाली करेंसी को खत्म करने और भ्रष्टाचार का खात्मा करने के इरादे से की थी। 

मंत्री ने आगे कहा कि एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) में उपलब्ध डेटा के मुताबिक नोटबंदी के बाद 30 नवंबर 2017 तक राज्य पुलिस की ओर से करीब 18.70 करोड़ रुपए के जाली नोट पकड़े गए थे, जबकि इससे पिछले वर्ष करीब 15.70 करोड़ रुपए के जाली नोट पकड़े गए थे।

मोटोरोला ने पेश किए 3 नये मोटो मोड्स

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नई दिल्ली। मोटोरोला ने भारत में अपने प्रीमियम प्रमुख मोटो जेड फ्रेंचाइजी के लिये तीन नये मोटो मोड्स की घोषणा की। इनमें जेबीएल साउंडबूस्ट 2 स्पीकर मोड, मोटो टर्बोपावर पैक बैटरी मोड और गेमपैड मोड शामिल हैं। अपने मोटो जेड, मोटो जेड प्ले या मोटो जेड2 प्ले स्मार्टफोन को एक हैंडहेल्ड गेमिंग कंसोल में बदलें, इसे प्रीमियम जेबीएल साउंड दें या सफर के दौरान अपने फोन को टर्बो चार्ज करें।

आपको चाहे कुछ भी करना हो, आपके लिये एक मोड मौजूद है। ये सभी तीनां मोड्स 17 दिसंबर से फ्लिपकार्ट और मोटोरोला के सभी एक्सक्लूसिव स्टोर्स- मोटो हब्स पर बिक्री के लिये उपलब्ध होंगे।

मोटो मोड्स के साथ यूजर अपने मोटो जेड सीरीज स्मार्टफोन्स को बिल्कुल वैसा बना सकते हैं, जैसी उनकी जरूरत हो और जब जरूरत हो। मोटो मोड्स चुम्बकीय रूप से फोन के साथ जुड़ जाते हैं और बाधारहित उन्नत कार्यात्मकता उपलब्ध कराते हैं।

इनमें पिछले उत्पादों की तरह ही कुछ क्रांतिकारी नई खूबियों को पेश किया गया है, जैसे कि मोटो इंस्टा-शेयर प्रोजेक्टर, हैसलब्लैड ट्रू जूम या जेबीएलो साउंडबूस्ट, हैंडसेट के पीछे चुम्बकीय रूप से नये मोड्स स्नैप और नई एवं उन्नत कार्यात्मकता, जोकि यूजर्स को कहीं से भी अपने जुनून को पूरा करने में सक्षम बनाती है।

नवाचार एवं बेमिसाल उपभोक्ता अनुभव के अपने सिद्धांत के अनुरूप मोटोरोला ने रेंटोमोजो के साथ अपनी तरह की पहली अनूठी साझेदारी की है। इस गठबंधन से ग्राहकों को इन नवीनतम मोटो मोड्स को खरीदने से पहले ही उनका अनुभव प्राप्त होता है।

वे 23 दिसंबर से सिर्फ 399 रूपये में एक सप्ताह के लिये अपने पसंदीदा मोटो मोड को किराये पर ले सकते हैं। यह सर्विस शीर्ष 8 महानगरों में उपलब्ध होगी और ग्राहकों को इन नये मोटो मोड्स की सुविधा एवं आनंद का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

सुधीन माथुर, प्रबंध निदेशक, मोटोरोला मोबिलिटी इंडिया ने कहा, ‘‘ नये मोड्स के माध्यम से असीमित संभावनाओं के वादे के साथ एक बेहतर मोबाइल भविष्य का निर्माण करने की हमारी प्रतिबद्धता को बरकरार रखा है।‘‘

रेंटोमोजो के साथ साझेदारी हमारी इस समझ पर आधारित है कि हमारे ग्राहक बेहतर हैं। इसके अलावा यह सुनिश्चित करती है कि हम उन बाधाओं को हटाने के लिये काम करें, जो उन्हें नई नवाचारों को अपनाने से रोकती है। यह एक अनूठी अवधारणा है और हमें पूरा भरोसा है कि हमारे ग्राहक इसे अपनायेंगे।‘‘