Monday, July 13, 2026
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अब सब्सिडी का बैंक खाता बदलने के लिए ग्राहक की अनुमति जरूरी

नई दिल्ली । उपभोक्ता की सब्सिडी की राशि वाला बैंक खाता बदलने के लिए बैंकों को अनिवार्य रूप से उसकी अनुमति लेनी होगी। यह निर्देश भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) ने बैंकों को दिये हैं। बिना जानकारी के सब्सिडी दूसरे बैंक खाते में जमा होने की शिकायतें आने के बाद यह व्यवस्था की गई है।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के अंतर्गत रसोई गैस समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं की सब्सिडी सीधे ग्राहकों के खाते में जाती है। हाल में बड़े पैमाने पर शिकायतें मिली हैं कि लोगों की जानकारी के बिना उनकी सब्सिडी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल के पेमेंट बैंक में खोले गये खाते में पहुंच रही है।

ज्यादातर शिकायतें एलपीजी की सब्सिडी से जुड़ी हैं। टेलीकॉम कंपनी पर यह भी आरोप है कि उसने आधार-सिम वेरीफिकेशन कराने वाले कई ग्राहकों से बिना अनुमति के पेमेंट बैंक में उनके खाते खोल दिए। सब्सिडी ट्रांसफर की व्यवस्था के तहत ग्राहक के आधार से सत्यापित होने वाले नवीनतम बैंक खाते में सब्सिडी स्वत: जमा होने लगती है।

इसका परिणाम यह हुआ कि कई ग्राहकों की जानकारी के बिना ही उनके एयरटेल पेमेंट बैंक खाते में सब्सिडी जाने लगी। शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए यूआइडीएआइ ने शनिवार को एयरटेल और एयरटेल पेमेंट बैंक का आधार वेरीफिकेशन लाइसेंस निलंबित कर दिया था।

पेट्रोलियम कंपनियों ने भी एयरटेल से लोगों की सब्सिडी के रूप में पहुंची राशि वापस करने को कहा है, जिस पर उसने सहमति जताई है। आगे इस तरह की अनियमितताओं से बचने के लिए ही प्राधिकरण ने ताजा निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक, सब्सिडी वाला खाता बदलने के 24 घंटे के भीतर ग्राहक को एसएमएस और ईमेल भेजकर सूचित किया जाएगा।

इसमें ग्राहक को पुराने बैंक खाते में ही सब्सिडी जारी रखने का भी विकल्प मिलेगा। प्राधिकरण ने सब्सिडी ट्रांसफर की व्यवस्था संभालने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) को भी सावधानी बरतने को कहा है।

यूआइडीएआइ ने कहा है कि एनपीसीआइ सब्सिडी वाले बैंक खाते बदलने के आवेदन को तभी स्वीकार करे, जब आवेदन में खाताधारक के वर्तमान खाते का जिक्र हो। साथ ही, यह भी सुनिश्चित हो कि इसके लिए जरूरी अनुमति ली गई है। ऐसा नहीं होने की स्थिति में एनपीसीआइ को ऐसे आवेदन खारिज करने को कहा गया है।

एयरटेल ने भरा 2.5 करोड़ जुर्माना
बिना बताए पेमेंट बैंक में लोगों का खाता खोलने के मामले में एयरटेल ने यूआइडीएआइ के समक्ष 2.5 करोड़ रुपये का अंतरिम जुर्माना जमा कराया है। कंपनी ने एलपीजी सब्सिडी के रूप में 31 लाख ग्राहकों के पेमेंट बैंक खाते में पहुंची 190 करोड़ रुपये की राशि भी 24 घंटे भीतर लौटाने की बात कही है।

एयरटेल ने बताया है कि सब्सिडी की राशि डीबीटी से जुड़े ग्राहकों के पुराने खाते में भेजी जा रही है। कंपनी ग्राहकों को सब्सिडी के लिए पुन: पुराना खाता जोड़े जाने की सूचना भी देगी।

सेंसेक्स 33,956 अंक की नयी ऊंचाई पर, निफ्टी भी उछला

मुंबई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार के और सुधार करने की उम्मीद से आज शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजार नयी ऊंचाई पर पहुंच गये।

बंबई शेयर बाजार बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 119.57 अंक यानी 0.35 प्रतिशत चढ़कर नया सर्वकालिक उच्च स्तर 33,956.31 अंक पर खुला। पिछले चार कारोबारी दिवस में यह 783.70 अंक मजबूत हो चुका है। इससे पहले सेंसेक्स ने सात नवंबर को 33,865.95 अंक पर पहुंचकर रिकॉर्ड बनाया था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एनएसई का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी भी 31.25 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की तेजी लेकर 10,495.45 नये सर्वकालिक उच्च स्तर 10,494.45 अंक पर पहुंच गया।

इससे पहले इसका सर्वकालिक उच्च स्तर 10,490.45 अंक था जो इसने छह नवंबर को हासिल किया था। अमेरिका में कर में कटौती से संबंधित विधेयक पर अंतिम निर्णय के निर्णायक दौर में पहुंच जाने से एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख रहा।

बीएसई के समूहों में ऑटो, रियल्टी, टिका उपभोक्ता उत्पाद 1.08 प्रतिशत तक की तेजी में रहे। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जीत से भी बाजार की धारणा सकारात्मक रही। डॉलर के मुकाबले रुपये की तेजी से भी इसे समर्थन मिला। सेंसेक्स की कंपनियों में मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, हीरो मोटोकॉर्प, कोल इंडिया और विप्रो के शेयर दो प्रतिशत तक की बढ़त में रहे।

जयपु‍री रजाइयों का कारोबार 50% गिरा, नोटबंदी और GST का असर

नई दिल्‍ली।  अपने लाइटवेट और गर्माहट के लिए जाने जानी वाली जयुपरी रजाई का बिजनेस इस साल ठंडा चल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बिजनेस पर पिछले साल नवंबर में हुई नोटबंदी का असर अभी  भी है। ऊपर से इस साल जुलाई में लागू हुए GST के चलते डिमांड कम होने से जयपुरी रजाई के बिजनेस को 50 फीसदी का झटका लगा है। 

 लोगों ने पुराने नोट चलाने के लिए खरीद लिया एक्‍स्‍ट्रा माल 
जयपुर रजाई व्‍यापार संघ के प्रेसिडेंट हरिओम लश्‍करी ने लेन देन न्यूज़ से बातचीत में बताया कि पिछले साल हुई नोटबंदी में पुराने नोट चलाने के लिए लोगों ने एक्‍स्‍ट्रा माल खरीद लिया, जिसके चलते इस साल माल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही है। ऊपर से इस साल GST लागू हो गया। जीएसटी की वजह से रजाइयां महंगी हो गईं और डिमांड गिर गई।

लश्‍करी ने बताया कि जयपुरी रजाई पर शुरुआत में 18 फीसदी और 28 फीसदी टैक्‍स लगाया गया था। 1000 रुपए तक की रजाई पर 18 फीसदी और इससे ज्‍यादा की रजाई पर 28 फीसदी टैक्‍स तय किया गया था। लेकिन व्‍यापारियों ने सरकार से अपील की कि इसे घटाया जाए।

उसके बाद जयुपरी रजाई पर टैक्‍स घटकर क्रमश: 5 फीसदी और 12 फीसदी हो गया। लेकिन चूंकि अब भी टैक्‍स की रेट ज्‍यादा है और डिमांड लगातार कम हो रही है, इसलिए व्‍यापारी टैक्‍स की रेट को घटाकर हर रेट वाली रजाई के लिए 5 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं ताकि ग्राहक इसे खरीद सकें। 
 
एक्‍सपोर्ट में भी गिरावट 
जयपुर से जापान, लंदन आदि जगहों पर जयुपरी रजाई का एक्‍सपोर्ट किया जाता है। लेकिन इस साल एक्‍सपोर्ट में भी गिरावट आई है। इसकी वजह है कि कारोबार ठंडा होने की वजह से व्‍यापारियों को पैसों की किल्‍लत हो रही है और वे माल तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
 
क्‍या है इस रजाई की खासियत 
जयपुरी रजाई का वजन बहुत हल्‍का होता है, उसके बावजूद यह बहुत गर्म होती है। इसके अलावा  इसकी रुई काफी अच्‍छी क्‍वालिटी की होती है। लाइटवेट और आसानी से फोल्‍ड हो सकने के कारण इन्‍हें सफर में आसानी से ले जाया जा सकता है।

जयुपर में 250 से 500 ग्राम रुई वाली रजाई भी बिकती हैं। बाजार में 300 से रुपए से लेकर 3000 रुपए तक की जयपुरी रजाई उपलब्‍ध है। कपड़े की बात करें तो यह कॉटन, सिल्‍क व वेलवेट तीनों तरह के कपड़े में बनाई जाती है। 3000 रुपए की रजाई में कॉटन और वेलवेट दोनों तरह की रजाई शामिल है। 
 
राजस्‍थान में केवल 10 फीसदी कारोबार
लश्‍करी ने बताया कि जयुपरी रजाई का 90 फीसदी बिजनेस अन्‍य राज्‍यों से है, केवल 10 फीसदी बिक्री राजस्‍थान में होती है। जयपुर से इस रजाई की सप्‍लाई यूपी, बिहार, असम,, पंजाब, दिल्‍ली आदि राज्‍यों में सप्‍लाई होती है।

बर्थ खाली रहने पर पैसेंजर्स को 50% तक डिस्काउंट देगा रेलवे

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नई दिल्‍ली।   सीटें खाली रहने पर भारतीय रेलवे पैसेंजर को डिस्‍काउंट ऑफर देगा। यह डिस्‍काउंट 50% तक पहुंच सकता है। यहां तक कि चार्ट लगने के बाद भी आप और डिस्‍काउंट लेकर यात्रा कर सकते हैं। इंडियन रेलवे द्वारा तैयार किए जा रहे डायनामिक प्राइसिंग मॉडल में इस तरह के प्रपोजल मिल रहे हैं। वहीं रेलवे की हाईलेवल कमेटी के पास ट्रेनों को 3 कैटेगरी में बांटने का प्रपोजल भी आया है।

 रेवेन्यू बढ़ा, पैसेंजर घटे 
– दरअसल, पिछले साल रेलवे ने कुछ प्रीमियम ट्रेनों में फ्लैक्‍सी फेयर मॉडल शुरू किया था। जिसके मुताबिक, पीक अवर में ट्रेनों का किराया बढ़ जाता है। इससे रेलवे को रेवेन्यू का तो फायदा हुआ, लेकिन पैसेंजर कम हो गए।

– वेस्‍टर्न रेलवे की एक रिपोर्ट बताती है कि फ्लैक्‍सी फेयर की वजह से इस जोन में जनवरी से अक्‍टूबर 2017 के बीच लगभग 1.34 लाख पैसेंजर्स घटे, हालांकि इस दौरान वेस्‍टर्न रेलवे ने लगभग 54 करोड़ रुपए ज्यादा रेवेन्यू हासिल किया। इस दौरान 2nd एसी का किराया हवाई जहाज के किराए से ज्यादा हो गया। 
 
एयरलाइंस की तरह होगा किराया 
पिछले दिनों रेलवे मिनिस्‍टर पीयूष गोयल ने कहा कि अब रेलवे का किराया एयरलाइंस की तरह डायनामिक प्राइसिंग मॉडल से तय होगा। इसके तहत किराया बढ़ेगा भी और घटेगा भी। यानी कि सीटें खाली रहने पर किराए में डिस्‍काउंट दिया जाएगा। इसके लिए एक हार्इ लेवल कमेटी बनाई गई है। 
 
क्‍या है प्रपोजल 
रेलवे की कमेटी के पास प्रपोजल आया है कि ट्रेनों को पैसेंजर एमेनिटीज, पंक्चुअल्टी और कैटरिंग सर्विस के आधार पर तीन कैटेगरी में बांटा जाएगा, जिसमें सुपर प्रीमियम ट्रेन, प्रीमियम ट्रेन और नॉन प्रीमियम ट्रेन होंगी।

– सुपर प्रीमियम ट्रेन का सालाना पंक्चुअल्टी 90% से ज्यादा होगी, जिसमें कस्‍टमर्स फीडबैक भी शामिल होगा। जबकि प्रीमियम ट्रेन की पंक्‍चुअल्‍टी 80 से 90% होगी और इससे कम पंक्‍चुअलटी वाली ट्रेनों को नॉन-प्रीमियम ट्रेन की कैटेगरी में रखा जाएगा। 
 
तीन सीजन में बांटा जाए 
– पूरे साल को छुट्टियों, त्‍योहारों, मैरिज और एग्‍जाम सीजन के आधार पर पीक, नॉन पीक और स्‍लैक सीजन में बांटा जाएगा।

– पीक सीजन में सुपर प्रीमियम ट्रेनों का किराया ज्यादा बढ़ाया जाएगा, जबकि नॉन पीक सीजन में थोड़ा और स्‍लैक सीजन में डिस्‍काउंट ऑफर किया जाएगा। इसी तरह पीक सीजन में प्रीमियम ट्रेनों का किराया थोड़ा बहुत ही बढ़ाया जाएगा, लेकिन नॉन-पीक और स्‍लैक सीजन में बेस रेट पर या किराए में छूट दी जाएगी।

नॉन प्रीमियम ट्रेन में भी पीक सीजन में थोड़ा बहुत किराया बढ़ाया जाएगा, जबकि नॉन-पीक में अच्‍छा खासा डिस्‍काउंट ऑफर किया जा सकता है।
 
ऐसे बढ़ेगा किराया 
सुपर प्रीमियम ट्रेन में पीक सीजन में ऐसा बढ़ेगा किराया 
पहली 10 फीसदी बर्थ पर : नॉर्मल किराया 
अगली 10 फीसदी बर्थ पर : 10 फीसदी वृद्धि 
अगली 10 फीसदी बर्थ पर : 10 फीसदी वृद्धि 
अगली 10 फीसदी बर्थ पर : 10 फीसदी वृद्धि 
अगली 10 फीसदी बर्थ पर : 10 फीसदी वृद्धि 

किराये की कोई अपर लिमिट नहीं होगी। हालांकि जर्नी डेट से दो दिन पहले 50 फीसदी टिकट ही बिकी हों तो हर 12 घंटे में टिकट का किराया इसी स्‍लैब के हिसाब से कम होता चला जाएगा। यह सिलसिला तब तक चलेगा, जब तक चार्ट नहीं लग जाता। चार्ट लगने के बाद भी ट्रेन खुलने से पहले तक सीटें खाली रहने पर 10 फीसदी डिस्‍काउंट और दिया जा सकता है। 

अब कारों में नहीं लगा सकेंगे बंपर गार्ड, सरकार ने लगाई रोक

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कारों में लगाए जाने वाले बंपर गार्ड (बुलबार्स) पर रोक लगाई। इसके लिए मिनिस्ट्री ऑफ रोड, ट्रांसपॉर्ट एंड हाइवेज ने एक ऑर्डर जारी कर कहा है कि राज्य सरकारें ऐसे गैरकानूनी बंपर गार्ड लगाए जाने पर सख्त कार्रवाई करें। मिनिस्ट्री ने साफ किया है कि कारों में बुलबार्स लगाना मोटर व्हीकल ऐक्ट, 1988 के सेक्शन 52 का खुले तौर पर वॉयलेशन है।

बंपर गार्ड पर क्यों लगाई रोक?
– सरकार ने यह रोक इसलिए लगाई है क्योंकि बंपर गार्ड सड़क पर चलने वाले राहगीरों के लिए खतरनाक साबित होते हैं। साथ ही टक्कर होने पर गाड़ी में सवार लोगों के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं।

– आमतौर पर माना जाता है कि छोटी-मोटी टक्कर के वक्त बंपर गार्ड गाड़ी को नुकसान से बचा लेते हैं। गाड़ियों के शोरूम पर यह आसानी से उपलब्ध रहते हैं। कई डीलर तो इसे जरूरी एसेसरी बताकर तक बेचते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
– एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बंपर गार्ड ज्यादा फायदेमंद नहीं होते हैं। चूंकि इसे कार के 2 से 3 प्वाइंट्स पर कसा जाता है, ऐसे में टक्कर लगते ही क्रैश एनर्जी पूरी कार पर न जाकर सिर्फ इन्हीं प्वाइंट्स पर केंद्रित रह जाती है। इससे गाड़ियों को नुकसान पहुंचता है।

– दूसरी ओर, कारों में एयरबैग के सेंसर भी आगे लगाए जाते हैं। बंपर गार्ड लगाने से सेंसर ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। कई बार एयरबैग नहीं खुल पाते हैं। कंपनियां भी कारों को डिजाइन करते समय ध्यान रखती हैं कि टक्कर लगने पर राहगीरों को नुकसान कम पहुंचे, लेकिन बंपर गार्ड से उन्हें ज्यादा चोट पहुंच सकती है।

कहीं आपको भी मनोचिकित्सक की जरूरत तो नहीं, देखिए वीडियो

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दिनेश माहेश्वरी, कोटा। किसी भी व्यक्ति को मनोचिकित्सक के पास जाने की सलाह देना, सुनने वाले को बड़ा ही अपमानजनक लगता है। फिर भी मेरी आपको सलाह है कि आपके व्यवहार में बदलाव आ रहा है, आप अजीबोगरीब हरकतें कर रहे हैं, तो आप मनोचिकित्सक को जरूर दिखाएं। मेरी आपके परिजनों और मित्रों को भी यही सलाह है कि वह आपको मनोचिकित्सक के पास ले जाएं।

मेरी यह खबर पढ़कर आपको लग रहा होगा शायद मैं पागल हूँ, जो आपको सलाह दे रहा हूँ। जी नहीं, जनाब यह मैं नहीं बल्कि आपका व्यवहार बता रहा है। फिर भी अगर आप नहीं मानते हो तो हमारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ  मनोचिकित्सक डॉ. एमएल अग्रवाल का यह साक्षात्कार जो उन्होंने हमारे चैनल LEN DEN NEWS को खास तौर से दिया है, आप उनका यह वीडियो जरूर देखिए। यह देखकर आपको लगेगा, कि कहीं आपको भी मनोचिकित्सक की जरूरत तो नहीं है। 

व्यक्ति का चिड़चिड़ापन, बात – बात में गुस्सा, बार -बार हाथ धोना या बार- बार ताला खोलना- लगाना। आत्महत्या का विचार आना,अपने आप को बहुत बड़ा समझना या हीन भावना से ग्रस्त होना यह सब मनोरोग के लक्षण हैं। डॉक्टर कहते हैं कि यह रोग काउंसलिंग से ठीक हो सकते हैं। अगर बीमारी पुरानी हो तो दवा की जरूरत पड़ सकती है।

डॉक्टर काम पर नहीं लौटे तो कोर्ट की अवमानना, हाईकोर्ट का फैसला

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में चार दिन से हड़ताल पर चल रहे सरकारी डॉक्टरों को फौरन काम पर लौटने अन्यथा उनके खिलाफ अदालती आदेश की अवमानना की कार्यवाही की चेतावनी दी है। कोर्ट ने सरकार को भी काम पर लौटने वाले डॉक्टरों को गिरफ्तार नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
 
चीफ जस्टिस प्रदीप नान्द्रजोग व जस्टिस डी.सी.सोमानी की बैंच ने यह अंतरिम आदेश अभिनव शर्मा की अवमानना याचिका पर दिए। याचिका में डॉक्टरों के खिलाफ अदालती आदेश की अवहेलना कर हड़ताल करने पर और सरकार से हुए समझौते की क्रियान्वति पर भी रोक लगाने की गुहार की है।
 
यााचिकों ने कहा कि सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों का ट्रांसफर करना सरकार का अधिकार है और इसी अधिकार व नीति के तहत डॉक्टरों के ट्रांसफर किए गए हैं।

ऐसे में एक चिकित्सक डॉ. अजय चौधरी का रवैया गलत है और व्यक्तिगत हित के कारण आमजन की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। मामले में अगली सुनवाई 3 जनवरी को होगी। राजस्थान में सेवारत डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के बाद सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ गई है।

मंत्री को मनोचिकित्सालय में इलाज की सलाह
चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ सोमवार को दिन भर चिकित्सकों की हड़ताल पर कभी सचिवालय तो कभी स्वास्थ्य भवन में बयान देते रहे, वहीं सेवारत चिकित्सक और रेजीडेंट मरीजों का इलाज छोड़कर सोशल मीडिया पर चिकित्सा मंत्री और सरकार को कोसते रहे।

सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने सोशल मीडिया पर चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ को उनकी दिमागी हालत का मनोचिकित्सालय में चेकअप कराने की सलाह दी।

कोटा की चंबल नदी में भी विकसित किया जाए जलमार्ग

केंद्रीय सड़क निधि अधिनियम पर चर्चा में बिरला ने चंबल को नोटिफिकेशन में शामिल करने की पैरवी की

कोटा। सांसद ओम बिरला ने मंगलवार को लोकसभा में केंद्रीय सड़क निधि अधिनियम, 2017 पर चर्चा करते हुए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित करने का सुझाव देते हुए चंबल नदी को भी नोटिफिकेशन में शामिल करते हुए यहां सी-प्लेन चलाने का आग्रह किया है।

सांसद ने बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि केंद्रीय सड़क निधि अधिनियम वर्ष 2000 में पारित किया गया था, तब देश में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार थी।

आजादी के इतने साल के बाद भी देश के कई गांवों में सड़कें नहीं थी। केंद्र सरकार नया अधिनियम ला रही है, इस बिल से एक नए युग की शुरुआत होगी। सांसद ने कहा कि हमने बिल में धारा 9ए के माध्यम से एक्सप्रेस-वे को राष्ट्रीय जलमार्ग में एवं धारा 9बी के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग को राष्ट्रीय जल मार्ग बनाने का काम किया है।

2016 में राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम में 11 जलमार्ग बनाए गए, जबकि आजादी से वर्ष 2015 तक 5 जलमार्ग थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों लोकसभा में पानी में हवाई जहाज चलाने की बात कि थी और उसे पूरा करते हुए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पानी में हवाई जहाज से उतरे। बिरला ने कहा कि हमने 2 हजार करोड़ रुपए में जलमार्ग को विकसित करने के लिए तय किए हैं।

जल मार्ग विकसित करने के लाभ
सांसद ने कहा कि जलमार्ग विकसित होने से आर्थिक परिवर्तन आएगा, वहीं भूमि की कम आवश्यकता होगी। न्यूनतम ईंधन पर अधिक दूरी तय होगी। नदी जल संपदाओं के पास बसे गांवों में रोजगार के साधन बढ़ेंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी एवं रोड मेंटीनेंस पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपयों की बचत होने के साथ ही आवागमन बेहतर सुगम होगा। आने वाले समय में गंगा नदी पर 50 हजार करोड़ की लागत से वाराणसी हल्दिया साइट मल्टीमॉडल के रूप में विकसित होगा, जहां रोड, रेल जलमार्ग सहित तीनों कनेक्टिविटी होगी।

सांसद ने सरकार से आग्रह किया कि कोटा में चंबल नदी बारहमासी बहती है। चंबल को इस नोटिफिकेशन में शामिल करें, ताकि वहां जहाज उतारा जा सके।

Jio सहित 5 कंपनियों पर रेवेन्‍यु छिपाने का आरोप, कैग की रिपोर्ट

नई दिल्‍ली।  रिलायंस Jio, टाटा टेलीसर्विसेस, टेलीनॉर, वीडियोकाॅन टेलीकॉम और वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनी Qaudrant पर CAG के ऑडिट में अपनी आय कम दिखाने का आरोप लगाया है। इसके चल‍ते सरकार को 2,578 करोड़ रुपए का रेवेन्‍यु लॉस हुआ है।

CAG के अनुसार इन कंपनियों ने लाइसेंस फीस के रूप में 1,015.17 करोड़ रुपए, स्‍पैक्‍ट्रम यूजेज चार्जेज के रूप में 511.53 करोड़ रुपए और डिले पेमेंट पर 1,052.13 करोड़ रुपए ब्‍याज के रूप में नहीं चुकाया है।
 
सरकार को किस कंपनी ने दिया कम रेवेन्‍यु
टाटा टेलीसर्विसेस ने 1,893.6 करोड़ रुपए, टेलीनॉर 603.75 करोड़ रुपए, वीडियोकाॅन 48.08 करोड़ रुपए, Quadrant ने 26.62 करोड़ रुपए और रिलायंस Jio ने 6.78 करोड़ रुपए सरकार को विभिन्‍न टैक्‍स के रूप में कम चुकाया है।
 
CAG के ऑडिट में मिली खामियां
CAG ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में कहा है कि टेलीकॉम सेक्‍टर की प्राइवेट कंपनियों के आॅडिट में पता चला है कि वर्ष 2014-15 के दौरान इन कंपनियों ने एडजेस्‍टेड ग्रॉस रेवेेन्‍यु (एजीआर) 14,813.97 करोड़ रुपए कम दिखाया है।

इसके चलते सरकार को 1,526.7 करोड़ रुपए का रेवेन्‍यु कम मिला है। संसद में रखी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2016 तक सरकार को 1,052.13 करोड़ रुपए बयाज के रूप में कम चुकाया गया है।

 कहां कहां हुई चूक
CAG ने अपने आबजर्वेशन में कहा है कि इन कंपनियों कस्‍टमर को दिए डिस्‍काउंट ऑफर, फ्री टॉक टॉइम, निवेश पर ब्‍याज की आय सहित अपनी कुछ संपत्तियों को बेचने से हुए मुनाफ को अपने ग्रॉस रेवेन्‍यु में नहीं दिखाया है।

CAG के अनुसार यह रेवेन्‍यु भी ग्रॉस रेवेन्‍यु का हिस्‍सा है। CAG के अनुसार कंपनियों ने फ्री टॉक टाइम का आफर दिया, लेकिन ‘एयरटॉइम’ फ्री कमोडिटी नहीं है। इसकी अपनी वैल्‍यू है। कंपनियों ने इस बात की अनदेखी की है जिसके चलते ऐसा हुआ है।

डिफॉल्टर कंपनियों पर सख्ती का रास्ता साफ, अमेंडमेंट बिल संसद में पास

नई दिल्ली। कॉर्पोरेट गवर्नैंस स्टैंडर्ड्स को मजबूत बनाने के वास्ते कंपनी कानून में संशोधन के बिल को मंगलवार को संसद ने पास कर दिया।

इस बिल से डिफॉल्टिंग कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करने और देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार में मदद मिलेगी। राज्यसभा ने कंपनी (संशोधन) बिल, 2017 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसे लोकसभा ने इस साल जुलाई में मॉनसून सत्र के दौरान मंजूर कर लिया था।
 
 ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में होगा सुधार
बिल पर चर्चा के दौरान सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जवाब देते हुए राज्य मंत्री कंपनी मामले पी. पी. चौधरी ने कहा कि संशोधन से बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नैंस सुनिश्चित होगा और देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार होगा।
 
 40 से ज्यादा हुए संशोधन
बिल के माध्यम से कंपनीज एक्ट, 2013 में 40 से ज्यादा संशोधन किए गए हैं, जिसे यूपीए शासन के दौरान पारित किया गया था। बिल को मार्च, 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था और फिर इसे फाइनेंस पर बनी स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया था।

पैनल की सिफारिशों पर विचार करने के बाद कैबिनेट ने इस साल मार्च में रिवाइज्ड बिल को मंजूरी दे दी थी। कंपनीज एक्ट, 2013 को मौजूदा सरकार द्वारा पहले ही संशोधन किया जा चुका है।
 
इस कानून से प्रोसिजर्स होंगे सरल
चौधरी ने कहा कि इस कानून से प्रोसिजर्स को सरल बनाने, कंप्लायंस को आसान बनाने और डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

मिनिस्टर ने सदस्यों द्वारा जताई गई इस आशंका को खारिज कर दिया कि सरकार कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के प्रोविजंस का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रयाप्त काम नहीं कर रही है।
 
कई कंपनियों को जारी हुए नोटिस
मंत्री ने कहा कि सरकार कंपनीज एक्ट के अंतर्गत सीएसआर प्रोविजंस का अनुपालन नहीं करने के लिए पहले ही कई कंपनियों को नोटिस जारी कर चुकी है।

सरकार द्वारा कंपनियों के खिलाफ एक्शन लेने में तेजी पर मंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी कंपनियों के खिलाफ कई कदम उठा रही है, जिसने सीएसआर की दिशा में लंबे समय से कोई काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2 लाख शेल कंपनियों पर कार्रवाई की है और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस की भी इस पर नजर बनी हुई है।