Monday, July 13, 2026
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विराट बने देश के मोस्ट वैल्यूएबल सेलिब्रिटी, 922 करोड़ ब्रांड वैल्यू

नई दिल्ली । एक्टर शाहरुख खान को पछाड़कर इंडियन क्रिकेट कप्तान विराट कोहली देश के सबसे कीमती (valuable) सेलिब्रिटी ब्रांड बन गए हैं। उनकी ब्रांड वैल्यू 922 करोड़ रुपए हो गई है। ये शाहरुख की ब्रांड वैल्यू (679 करोड़ रुपए) से 243 करोड़ रुपए ज्यादा है।

सेलिब्रिटी की ब्रांड वैल्यू से जुड़ी रिपोर्ट ‘राइज ऑफ मिलेनियल्स: इंडियाज मोस्ट वैल्यूएबल सेलिब्रिटी ब्रांड’ से ये नतीजे निकले हैं। ग्लोबल फाइनेंस एडवाइजर और सेलिब्रिटी वैल्यूएशन फर्म डफ एंड फेल्प्स ने ये रिपोर्ट तैयार की है।

दीपिका पादुकोण तीसरे नंबर पर
– डफ एंड फेल्प्स पिछले तीन साल से इस तरह की रिपोर्ट तैयार कर रहा है। पिछली दोनों रिपोर्ट में शाहरुख खान ही पहले नंबर पर रहे थे।

– पहली रिपोर्ट में कोहली चौथे नंबर पर थे, दूसरी रिपोर्ट में दूसरे नंबर पर और इस बार टॉप पर गए।

– 2016 की रिपोर्ट में शाहरुख की ब्रांड वैल्यू 838 करोड़ रुपए और कोहली की ब्रांड वैल्यू 592 करोड़ रुपए थी।

– इस बार की रिपोर्ट में दीपिका पादुकोण (595 करोड़ रुपए) तीसरे नंबर पर, अक्षय कुमार (300 करोड़ रुपए) चौथे पर और रणवीर सिंह (269 करोड़ रुपए) पांचवें नंबर पर हैं।
392 करोड़ पहुंची कोहली की नेटवर्थ

– 11 दिसंबर को ही विराट कोहली ने एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा से शादी की है।

– उस वक्त एक रिपोर्ट के मुताबिक, विराट कोहली की नेटवर्थ (कुल प्रॉपर्टी) करीब 392 करोड़ रुपए आंकी गई थी।

– ये भी कहा गया था कि दोनों की कुल ब्रांड वैल्यू एक साल में 1000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी, लेकिन अब अकेले विराट की ही ब्रांड वैल्यू 922 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

– डफ एंड फेल्प्स के डायरेक्टर अविरल जैन कहते हैं, “इस लिस्ट से नया ट्रेंड सामने आया है, जहां खेल जगत की शख्सियत, फिल्म स्टार से भी आगे निकल रही हैं। विराट तो पहले नंबर पर ही हैं। महेंद्र सिंह धोनी, पीवी सिंधु भी टॉप-15 में हैं।”

नहीं चलेगी अब टीसी की मनमानी, पीआरएस से जुड़ेंगे गैजेट

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नई दिल्ली/ मुंबई। भारतीय रेलवे में सफर करते दौरान आम यह दृश्य आम होता है, जब यात्री अपना टिकट लिए टी.सी. का अनुसरण करता रहता है, और टी.सी. महोदय फलां सीट पर जाकर बैठने की सलाह देते हैं।

यह प्रक्रिया खाली सीट के लिए ‘व्यवस्था’ कायम करने की होती है, लेकिन ये बात भी जगजाहिर है कि यात्रा के दौरान खाली सीट की बोली कैसे लगती है। बहरहाल, इन्हीं घटनाओं से निजात दिलाने के लिए अब रेलवे मंत्रालय द्वारा टिकट निरीक्षकों को हैंड हेल्ड सिस्टम दिए जाएंगे। किसी आम मोबाइल टैब की तरह दिखने वाले ये गैजेट सीधे तौर पर पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) से जुड़े होंगे।

कैसे होगा फायदा
वर्तमान सिस्टम में यात्रा के दौरान टी.सी. सारी प्रक्रिया मैन्यूअल तरीके से करते हैं। एक बार ट्रेन चल पड़ी, फिर टी.सी. ही मालिक होता है। ऐसे में यदि आरएसी टिकट कन्फर्म हुई या वेटिंग टिकट आरएसी हुई, तो बहुत कम चांस होता है आपको अपडेट मिले। हैंड हेल्ड सिस्टम आने के बाद इस तरह की दिक्कतें नहीं होंगी।

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि मौजूदा सिस्टम में ट्रेन चलने के चार घंटे पहले पहला चार्ट बनता है, दो घंटे पहले दूसरा चार्ट। ये दोनों चार्ट बनने के बाद कोई अपडेट नहीं होता है। यदि किसी स्टेशन पर कोई यात्री किसी कारण से नहीं पहुंच पाता है, तो उसका भी अपडेट सिस्टम में नहीं होता है।

ऐसे में टी.सी. उक्त सीट का कुछ भी कर सकता है। हैंड हेल्ड सिस्टम में टी.सी. को यात्री की उपस्थिति अपडेट करनी ही है, यदि नहीं करता है, तो वो पकड़ा जाएगा। ऐसे में सीट के असली हकदार यात्री के साथ भी न्याय होगा।

सूत्रों के अनुसार रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) द्वारा हैंड हेल्ड सिस्टम को पीआरएस से जोड़ने के लिए सिस्टम बनाया जा रहा है। इसके परीक्षण चल रहे हैं। परीक्षण सफल होने के बाद सभी रेलवे जोन के मुख्यालयों में सिस्टम भेज दिए जाएंगे।

सिस्टम डिलिवर होने के बाद टिकट निरीक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इनकी शुरुआत राजधानी, शताब्दी और तेजस जैसी मुख्य ट्रेनों से की जाएंगी। बाद में यह सिस्टम सभी ट्रेनों में लागू किया जाएगा।

रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र के एक अधिकारी ने बताया,’सिस्टम के परीक्षण चल रहे हैं। यात्रा के दौरान कनेक्टिविटी को लेकर चिंता है। कई बार नेटवर्क नहीं मिलने से समस्याएं आती हैं।

किसी बड़े स्टेशन पर ट्रेन पहुंचते ही नेटवर्क में आने के कारण सिस्टम अपडेट हो जाएगा। टी.सी. जब एंट्री करेगा, तो यात्री को भी यात्रा के दौरान (वेटिंग लिस्ट या आरएसी) होने पर वास्तविक अपडेट मिलने लगेगा।’

2G केस में राजा, कनिमोझी समेत सभी आरोपी बरी, सीबीआई कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े 2G घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। जज ने एक लाइन में अपना फैसला सुनाया। जज ओ. पी. सैनी ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में नाकाम रहा।

इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और DMK चीफ एम. करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोझी को भी बरी कर दिया है। फैसला सुनाए जाते समय राजा और कनिमोझी पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद थे।

फैसला सुनते ही राजा और कनिमोझी ने हाथ जोड़कर जज का शुक्रिया अदा किया। इस दौरान राजा और कनिमोझी के समर्थकों ने नारेबाजी भी की।

कोर्ट में समर्थकों की भारी भीड़ थी। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अब बड़ा सवाल यह है कि CAG की रिपोर्ट में जिस घोटाले की बात की गई, उसके लिए जिम्मेदार कौन है?

जज ओ. पी. सैनी ने कहा, ‘पैसों का लेनदेन साबित नहीं हो सका इसलिए मैं सभी आरोपियों को बरी कर रहा हूं।’ दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि यह घोटाला नहीं हुआ है। कोर्ट ने यह जरूर कहा कि आरोपों के हिसाब से एजेंसियां सबूत पेश करने में नाकाम रहीं।

यह फैसला राजनीतिक लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है। इसी मामले ने UPA-2 के समय देश की सियासत में भूचाल ला दिया था। सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाए गए थे। CAG की रिपोर्ट में 1 लाख 76 हजार करोड़ का घोटाला बताया गया था।

सीबीआई की चार्जशीट में 30 हजार करोड़ के नुकसान की बात रखी गई थी। अब इस मामले में आए फैसले पर कांग्रेस फायदा उठाना चाहेगी। कांग्रेस पहले से ही ‘जीरो लॉस थिअरी’ की बात करती रही है।

इससे पहले सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर और मुख्य आरोपी ए. राजा को ‘बड़ा झूठा’ बताया था जबकि राजा ने सभी एजेंसियों को ‘अंधे इंसान’ कहते हुए कहा था कि वे छूकर हाथी की व्याख्या कर रहे हैं।

राजा के तमाम सनसनीखेज आरोपों पर CBI ने उन्हें बड़ा झूठा बताते हुए सबसे बड़ा आरोपी बताया था जिसने अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस बांट दिए।

प्रवर्तन निदेशालय ने अपने मामले में अप्रैल 2014 में 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था जिनमें राजा, कनिमोझी, शाहिद बलवा, विनोद गोयनका, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, करीम मोरानी और शरद कुमार शामिल थे।

बढ़त के साथ शेयर बाजार ने की शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी चढ़े

नई दिल्ली। एशियाई बाजारों में मिले-जुले कारोबार के बाद गुरुवार को सेंसेक्स 48 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 33,826 पर खुला। निफ्टी ने भी दिन की शुरुआत 25 अंकों की बढ़त के साथ 10,469 पर की ।

शुरुआती कारोबार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का माहौल दिख रहा है। फार्मा, रियल्टी, मेटल मीडिया आदि के शेयरों में खरीदारी दिख रही है। हालांकि ऑइल ऐंड गैस, बैंकिंग एफएमसीजी के शेयरों पर दवाब दिख रहा है।

एक ओर हीरो मोटोकॉर्प, सनफार्मा, एचडीएफसी, अडानी पोर्ट्स, टाटा स्टील, ओएनजीसी आदि के शेयर्स चढ़े हैं, वहीं कोटक महिंद्रा, बजाज ऑटो,ऐक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, भारती एयरटेल जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी जा रही है। सुबह 9:51 बजे सेंसेक्स 10 अंको की मामूली बढ़त के साथ 33,784 पर कारोबार कर रहा है, वहीं निफ्टी 10, 454 के आसपास कारोबार कर रहा है।

इससे पहले बुधवार को मुनाफा वसूली के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बीएसई सूचकांक 59.36 अंकों की गिरावट के साथ 33,777 पर, वहीं, 19 अंक लुढ़ककर निफ्टी 10,444 पर बंद हुआ था।

रिटर्न फाइल करने वाले 50% भारतीय देते हैं जीरो इनकम टैक्स

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नई दिल्ली। मोदी सरकार के पहले दो साल में छूट और मामूली वृद्धि की वजह से डायरेक्ट टैक्सपेयर्स बेस में धीमी रफ्तार से वृद्धि हुई, लेकिन नोटबंदी के बाद इस ट्रेंड में बदलाव की उम्मीद है। बुधवार को टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से जारी आंकड़ों से कई दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। इसमें बताया गया है कि रिटर्न फाइल करने वाले आधे भारतीय जीरो इनकम टैक्स देते हैं।

वित्त वर्ष 2014-15 में 4.1 करोड़ भारतीयों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया, लेकिन इसमें से 2 करोड़ लोग ऐसे थे जिन्होंने दावा किया कि उनकी आमदनी पर जीरो टैक्स बनता है। दूसरे 2 करोड़ लोगों ने औसतन सालाना 42,456 रुपये इनकम टैक्स चुकाया। केवल 1 करोड़ टैक्सपेयर्स ने 1 लाख से अधिक टैक्स दिया।

नोटबंदी के बाद बड़ा इजाफा
आंकड़ों के मुताबिक टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन 2012-13 से 4 साल तक इसकी रफ्तार कम रही और केवल 54 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े। 2013-14 में केवल 5.4 करोड़ टैक्स पेयर्स थे, जो मोदी के सत्ता संभालने के बाद 2015-16 तक इनकी संख्या बढ़कर केवल 5.93 करोड़ हुई यानी केवल 53 लाख का इजाफा, लेकिन नोटबंदी के बाद कम से कम 91 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं।

दिल्ली और महाराष्ट्र से आधा टैक्स
कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में दिल्ली और महाराष्ट्र का योगदान 50 फीसदी है, यानी सर्वाधिक टैक्स चुकाने वाले नागरिक इन्हीं 2 राज्यों से हैं। सर्वाधिक 37% टैक्स महाराष्ट्र से आता है। दूसरे नंबर पर दिल्ली है जहां से 12.8 फीसदी टैक्स की प्राप्ति होती है।

टॉप 10 में इन दो राज्यों के बाद कर्नाटक (10.1%) , तमिलनाडु (7.1%), गुजरात (4.6%), आंध्र प्रदेश (4.3%), पश्चिम बंगाल (4.1%), यूपी (3.5%), हरियाणा (2.4%) और राजस्थान (2.4%)है। हैरानी की बात है कि भारत के सबसे अमीर राज्यों में शामिल पंजाब टैक्स के मामले में टॉप 10 में भी नहीं है।

3 साल में दोगुना हुआ तेलंगाना का योगदान
टैक्स कलेक्शन में तेलंगाना का योगदान तेजी से बढ़ रहा है। 2014-15 से 2016-17 के बीच तेलंगाना में इनकम टैक्स कलेक्शन दोगुना हो चुका है। इसके साथ ही मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और मणिपुर इनकम टैक्स में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज करने वाले राज्य हैं।

केवल एक भारतीय देता है 100 करोड़ से ज्यादा इनकम टैक्स
2015-16 के बीच देश में केवल एक टैक्सपेयर ने 100 करोड़ से अधिक टैक्स दिया है और यह कुल राशि 238 करोड़ रुपये है। हालांकि इस टैक्सपेयर का नाम नहीं बताया गया है। 3 लोगों ने 50 से 100 करोड़ रुपये के बीच टैक्स दिया है। वहीं, 1 करोड़ से 50 करोड़ के बीच टैक्स देने वालों की संख्या 9,686 है।

करोड़पतियों की संख्या में इजाफा
टैक्स निर्धारण वर्ष 2015-16 में ऐसे टैक्सपेयर्स की संख्या में 23.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिन्होंने अपनी टैक्स रिटर्न में 1 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी की घोषणा की।

हालांकि, करोड़पतियों की संख्या में इजाफा हुआ है, लेकिन इससे पिछले साल की तुलना में उनकी कुल आमदनी में 50,889 करोड़ रुपये की कमी आई है। 59,830 लोगों ने अपनी आय को 1 करोड़ रुपये से अधिक बताया है।

कोटा स्मार्ट सिटी के दो प्रोजेक्ट को अवार्ड

कोटा । कोटा स्मार्ट सिटी की दो पहल नागरिकों की डिजिटल हैल्थ प्रोफाइल और स्मार्ट सिटी लाइब्रेरी को देश की सबसे अच्छी पहल का अवार्ड बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने दिया।

कोटा की तरफ से ये पुरस्कार स्मार्ट सिटी के एक्सईएन संजय बाहेती हेल्थकेयर के डायरेक्टर श्रेयांश मेहता ने लिया। देश में कोटा अहमदाबाद ही ऐसे शहर है जिन्हें स्मार्ट सिटी के एक साथ दो-दो अवार्ड मिले। इसी कार्यक्रम में राजस्थान को बेस्ट स्मार्ट स्टेट का भी अवार्ड मिला।

बिजनेस वर्ल्ड स्मार्ट सिटी कॉनक्लेव एंड अवार्ड्स के लिए कोटा ने स्मार्ट सॉल्यूशन कैटेगरी में हेल्थकेयर और इनोवेटिव स्मार्ट सॉल्यूशन कैटेगरी में ई-लाइब्रेरी के लिए आवेदन किया था। इसके देश भर से आए आवेदनों में से 5 सदस्यों वाली ज्यूरी ने इन दो मुहिमों को सर्वश्रेष्ठ चुना गया।

दिल्ली में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, कर्नाटक के ट्रांसपोर्ट मंत्री रामावतार तेलंगाना के स्वायत्त शासन मंत्री केडी रामाराव द्वारा कोटा स्मार्ट सिटी को यह अवार्ड दिए गए।

राजस्थान में ई-वे बिल लागू , प्रदेश से बाहर माल भेजने या मंगाने पर जरूरी

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जयपुर। राजस्थान के बाहर से माल मंगाने या भेजने को लेकर बिल-बिल्टी जैसे दस्तावेजों के साथ ई-वे बिल फॉर्म भी लगाना जरूरी होगा। राज्य सरकार ने बुधवार को पूरे प्रदेश में ई-वे बिल लागू कर दिया है। सरकार ने दो दिन पहले इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी।

इस बिल को राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 20 दिसम्बर से लागू किया है तथा जीएसटी कर प्रणाली में यह व्यवस्था आगे संपूर्ण देश में लागू की जाएगी।

राज्य सरकार ने अधिसूचना में अधिसूचित 33 कर योग्य वस्तुओं के 50 हजार रुपए से अधिक कीमत के होने पर ऐसे माल को राज्य के बाहर से मंगाए जाने पर अथवा राज्य से बाहर भेजने की स्थिति में (माल के आयात-निर्यात) बिल, बिल्टी जैसे आवश्यक दस्तावेजों के साथ-साथ ई-वे बिल फॉर्म भी संलग्न करना अनिवार्य होगा।

ई-वे बिल फॉर्म विक्रेता व ट्रांसपोर्टर में से कोई भी जारी कर सकता है। वैट अधिनियम के तहत केवल खरीदार ही वैट-47 फॉर्म जारी कर सकता था।

क्रेता-विक्रेता के अपंजीकृत होने की स्थिति में भी ई-वे बिल फॉर्म जारी करने की सुविधा दी गई है। अधिसूचित 33 कर योग्य वस्तुओं के 50 हजार रुपए से अधिक कीमत के माल के प्रदेश से आयात-निर्यात पर ई-वे फॉर्म भरना होगा।

 पार्ट-अ व्यवसायी और ब टांसपोर्टर भरेगा
ई-वे बिल फॉर्म में पार्ट-अ व पार्ट-ब दो भागो में भरे जाने के प्रावधान है। पार्ट-अ व्यवसायी द्वारा भरा जाएगा जिसमें फर्म का पंजीयन नम्बर, माल विगत का एच.एस.एन. कोड़, बिल क्रमांक, माल कीमत, कर दर जैसी सूचनाएं भरी जाएगी। पार्ट-ब में ट्रांसपोर्टर को वाहन संख्या की जानकारी देने की अनिवार्यता रखी गई है।

ई-वे बिल व्यवस्था में ट्रांसपोटर्स को भी पंजीकरण कराते हुए अपनी कम्पनी की ट्रांसपोर्ट आई.डी. बनानी होगी। व्यवहारी द्वारा पार्ट-अ की आवश्यक सूचनाएं भरने के पश्चात् ऑनलाईन ही अपने ट्रांसपोर्टर की आई.डी पर फॉर्म को स्थानान्तरित कर देगा।

ट्रांसपोर्टर को ई-वे बिल की मूल प्रति दस्तावेज के साथ संलग्न करना अनिवार्य नहीं है। केवल ई-वे बिल क्रमांक ही बिल-बिल्टी पर अंकित करना ही पर्याप्त होगा।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी, ऐसे कर सकते हैं यह काम
-ई-वे बिल फॉर्म जारी करने के लिए प्रत्येक व्यवहारी को ऑन-लाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। वेबसाईट पर एनरोलमेन्ट करवाने की सुविधा प्रदान की है, एनरोलमेन्ट के पश्चात् ही वह व्यवहारी/ट्रांसपोर्टर ई-वे बिल जारी कर सकेगा।

-जीएसटी में पंजीकृत व्यवहारी को अपने जीएसटी नंबर की सहायता से इस पोर्टल पर पंजीकृत होना होगा, वहीं ट्रांसपोर्टर एवं अपंजीकृत व्यवहारी अपने पैन नम्बर तथा आधार नम्बर की सहायता से पंजीकरण करवाना होगा।

– पोर्टल पर पंजीकरण की यह प्रक्रिया प्रारम्भ में केवल एक बार ही करने की आवश्यकता है। इस प्रक्रिया से प्राप्त आई.डी. का प्रयोग उपयोगकर्ता आगे के समस्त संव्यवहारों में कर सकेगा।

– जिला मुख्यालय व स्वतंत्र मुख्यालय स्तर कार्यालय में व्यवहारियों की मदद के लिए व्यवहारी सुविधा केन्द्र भी स्थापित किए है।

– अधिसूचित वस्तुओं के एच.एस.एन. कोड़ विभाग की वेबसाईट पर उपलब्ध है।

क्रूड की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा: RBI

नई दिल्ली। क्रूड और खाने-पीने की चीजें महंगी होने, राजस्व को लेकर अनिश्चितता और केंद्र सरकार द्वारा HRA बढ़ाए जाने से महंगाई बढ़ने का डर बन गया है। पिछले दिनों मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग में आरबीआई ने इसे लेकर अलर्ट किया था। बता दें कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग 5 और 6 दिसंबर को हुई थी, जिसमें ब्याज दरों में बदलाव न करने का निर्णय लिया गया था। 

 दूसरी छमाही में महंगाई दर ऊंची रहने की आशंका  
मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग में कहा गया कि क्रूड की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, खाने-पीने की चीजें महंगी हुई हैं। वहीं, राजस्व को लेकर अनिश्चितता है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने हाउस रेंट अलाउंस बढ़ा दिया है। इन वजहों से मिड टर्म के लिए महंगाई दर अनुमान से ज्यादा बढ़ने का डर बन गया है। 

बता दें कि पहले भी यह अनुमान लगाया जा चुका है कि दूसरी छमाही में महंगाई दर 4.2 फीसदी से 4.6 फीसदी के बीच रह सकती है। वहीं, नवंबर में खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 3.5 फीसदी से बढ़कर 4.88 फीसदी पर पहुंच गई है। यह अगस्त 2016 के बाद सबसे अधिक है।
 
क्रूड फैक्टर प्रमुख चिंता: पटेल  
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के अनुसार तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ी है। वहीं, राजस्व को लेकर भी अनिश्चितता है। ऐसे में आरबीआई महंगाई को लेकर सतर्क है।

उन्होंने कहा कि अक्टूबर में जब एमपीसी की मीटिंग हुई थी, तबसे दिसंबर मीटिंग तक देश की मैक्रो इकोनॉमिक सिचुएशन में किसी तरह का बदलाव नहीं आया है। बता दें कि सेंट्रल बैंक ने लगातार दूसरी मीटिंग में ब्याज दरों में बदलाव न करने का निर्णय लिया। रेपा रेट को 6 फीसदी पर बरकरार रखा गया था। 

देश में करोड़पतियों की संख्या हुई 60 हजार

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नई दिल्ली। एसेसमेंट ईयर 2015-16 के दौरान 1 करोड़ रुपए से ज्यादा इनकम घोषित करने वाले इंडिविजुअल्स की संख्या 23.5 फीसदी बढ़कर 59,830 तक पहुंच गई, लेकिन करोड़पतियों के पास मौजूद इनकम पिछले साल की तुलना में 50,889 करोड़ रुपए कम हो गई।
 
 1 करोड़ से ज्यादा इनकम वालों की संख्या बढ़ी
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एसेसमेंट ईयर 2015-16 (अप्रैल 2014 से मार्च 2015) के लिए आंकड़े जारी किए, जिसके मुताबिक 1 करोड़ रुपए से ज्यादा इनकम वाले 59,830 इंडिविजुअल्स की कुल इनकम घटकर 1.54 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि एसेसमेंट ईयर (एवाई) 2014-15 में करोड़पति इंडिविजुअल्स या 1 करोड़ से ज्यादा इनकम वालों की संख्या 48,417 थी, जिनकी कुल इनकम 2.05 लाख करोड़ रुपए थी।
 
 एसेसमेंट ईयर 2015-16 में 4 करोड़ ने फाइल किया रिटर्न
वहीं देश के 1.2 अरब नागरिकों में से 4.07 करोड़ लोगों ने एसेसमेंट ईयर 2015-16 के लिए टैक्स रिटर्न फाइल किया था, जिनमें से 82 लाख ने शून्य टैक्स प्रदर्शित किया था या उनकी इनकम 2.5 लाख रुपए से कम थी।

फिलहाल 2.5 लाख रुपए तक इनकम पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता है। एसेसमेंट ईयर 2014-15 में 3.65 करोड़ लोगों ने टैक्स रिटर्न फाइल किया था, जिनमें से 1.37 करोड़ ने शून्य टैक्स दिखाया था या उनकी इनकम 2.5 लाख रुपए से कम थी।
 
 टैक्स फाइलर्स की इनकम 21 लाख करोड़
एसेसमेंट ईयर 2015-16 के दौरान कुल इंडिविजुअल टैक्स फाइलर्स की कुल इनकम बढ़कर 21.27 लाख करोड़ रुपए हो गई थी, जबकि पिछले एसेसमेंट ईयर के दौरान यह आंकड़ा 18.41 लाख करोड़ रुपए रही थी।

एसेसमेंट ईयर 2015-16 के दौरान अधिकतम 1.33 करोड़ फाइलर्स 2.5-3.5 लाख इनकम ग्रुप में आए थे। लगभग 55,331 इंडिविजुअल्स की इनकम 1 करोड़ से 5 करोड़ रुपए के बीच थी, जबकि 5 करोड़ और 10 करोड़ रुपए के बीच इनकम वाले इंडिविजुअल्स की संख्या 3,020 थी। कुल 1,156 इंडिविजुअल्स की इनकम 10 करोड़ और 25 करोड़ रुपए के बीच थी।

बिटकॉइन से अमिताभ ने कमाया भारी मुनाफा

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नई दिल्ली । वर्चुअल करंसी बिटकॉइन ने हाल के दिनों में रिकॉर्ड हाई लेवल को छूते हुए 20,000 डॉलर का स्तर भी पार कर लिया। वहीं निवेशकों ने इसमें निवेश कर भारी मुनाफा भी कमाया है।

इनमें फिल्मी जगत के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन भी शामिल है। इन्होंने वर्ष 2015 में दो लाख 50 हजार डॉलर मेरिडियन में निवेश किये थे। अब इसकी कीमत बढ़कर 17.5 मिलियन डॉलर हो गई है।

अमिताभ बच्चन ने वर्ष 2015 में मेरिडियन टेक पीटीई में 1.6 करोड़ रुपये का निवेश किया था। यह सिंगापुर की एक कंपनी है। मेरिडियन की प्राइम एसेट ziddu.com को एक अन्य विदेशी कंपनी लॉन्गफिन कॉर्प ने खरीद लिया है।

यह अधिग्रहण लॉन्गफिन कॉर्प के अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नैस्डैक पर लिस्टिंग के दो दिनों के बाद किया गया है। सोमवार को लॉन्गफिन का शेयर प्राइस 70 डॉलर था।

इस तरह से बच्चन परिवार की होल्डिंग की वैल्यू 1.75 करोड़ डॉलर हो गई है। यह वर्तमान एक्सचेंज रेट के अनुसार करीब 114 करोड़ रुपये हो गई है।