Tuesday, July 14, 2026
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लिवाली निकलने से धान सुगन्धा, धनिया और चना उछला

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में गुरुवार को लहसुन की आवक 3000 हजार कट्टे की रही। माल की कुल आवक 50000 हजार बोरी की रही। लिवाली निकलने से धान सुगन्धा 100 रुपये, धनिया 50 रुपये, चना 100 रुपये प्रति क्विंटल तेज बोला गया। 

कमजोर उठाव से सरसों में 50 रुपये प्रति क्विंटल गिरावट रही। गेहूं मिल 1500 से 1570 लोकवान 1600 से 1650 पीडी 1600 से 1650 टुकडी 1600 से 1655 रुपये प्रति क्विंटल। धान सुगंधा 2100 से 2500 पूसा-1 2500 से 2700 पूसा 4 (1121) 2500 से 3125 धान (1509) 2000 से 2801 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 2400 से 3025 सरसो 3200 से 3550 तिल्ली 7000 से 8400 रुपये प्रति क्विंटल। मैथी 2000 से 3100 धनिया बादामी 4400 से 4650 ईगल 4700 से 4950 रंगदार 5000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 3300 से 4400 उडद 2400 से 3900 चना 3400 से 4100 चना काबुली 7000 से 10500 रुपये प्रति क्विंटल।

चना पेपसी 3600 से 4000 चना मौसमी 360 से 4000 मसूर 3000 से 3600 ग्वार 2500 से 3650 रुपये प्रति क्विंटल। मक्का नई 1000 से 1250 जौ 1100 से 1200, ज्वार 1300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल। लहसुन 800 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल। 

ग्लोबल संकेतों से और महंगा हुआ सोना, चांदी भी चमकी

नई दिल्ली/कोटा । गुरुवार के कारोबार में भी सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। गुरुवार के दिन के कारोबार में सोना 175 रुपए उछलकर 30,250 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। इस तेजी की प्रमुख वजह सकारात्मक वैश्विक संकेत जिसकी वजह से लगातार पांचवें दिन सोने की कीमत में तेजी देखने को मिली है।

साथ ही स्थानीय आभूषण निर्माताओं की ओर से तेज खरीदारी ने भी सोने की कीमतों को समर्थन दिया है। सोने की ही तरह चांदी में भी उछाल देखने को मिला है। चांदी आज 250 रुपए उछलकर 39,500 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। इसकी प्रमुख वजह औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से तेज उठान रही है।

व्यापारियों का कहना है कि मजबूत वैश्विक रुझान के चलते सोने के प्रति सेंटिमेंट सकारात्मक बना हुआ है। साल के आखिरी महीने की बात करें तो सोने उच्चतम स्तर पर है। अगर वैश्विक स्तर की बात करें तो सिंगापुर में सोना 0.33 फीसद के उछाल के साथ 1,291.10 औंस प्रति डॉलर और चांदी 0.54 फीसद के उछाल के साथ 16.75 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है।

वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 175 रुपए के उछाल के साथ 30,250 एवं 30,100 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। बीते चार सत्रों में इसमें 390 रुपए की तेजी देखने को मिल चुकी है। हालांकि गिन्नी के भाव 24,700 रुपए प्रति आठ ग्राम पीस पर बरकरार रहे हैं।

कोटा सर्राफा
चांदी 39200 रुपये प्रति किलोग्राम। 
सोना केटबरी 30200 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35220 रुपये प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30350 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35400 रुपये प्रति तोला।

यूनिवर्सल स्टॉक एक्सचेंज को मंजूरी, एक साथ होगी स्टॉक्स-कमोडिटीज की ट्रेडिंग

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नई दिल्ली। अब जल्द ही स्टॉक एक्सचेंज यानी एक ही प्लेटफॉर्म पर स्टॉक्स और कमोडिटीज की ट्रेडिंग एक साथ हो सकेगी। सेबी ने गुरुवार को हुई बोर्ड मीटिंग में यूनिवर्सल स्टॉक एक्सचेंज को मंजूरी दे दी है।इसके लिए अब अक्टूबर, 2018 की डेडलाइन तय कर दी गई है।

इससे साफ हो गया है कि अक्टूबर, 2018 तक यूनिवर्सल स्टॉक एक्सचेंज अस्तित्व में आ जाएंगे। सेबी की बोर्ड मीटिंग में इसके अलावा भी कई अहम फैसले लिए गए। सेबी ने कहा कि अक्टूबर, 2018 में यूनिवर्सल स्टॉक एक्सचेंज अस्तित्व में आने के साथ स्टॉक्स और कमोडिटीज की एक साथ ट्रेडिंग हो सकेगी और क्रॉस लिस्टिंग भी आसान हो जाएगी।

 सेबी के अहम फैसले
-बोर्ड मीटिंग के बाद सेबी चीफ अजय त्यागी ने रीट्स के नॉर्म्स को सरल और तार्किक बनाने की कोशिश हो रही है। -सेबी ने स्पॉन्सर्स को हितों के टकराव से बचाने के लिए म्युचुअल फंड्स (एमएफ) के नॉर्म्स में बदलाव किया है। -इसके अलावा एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों द्वारा जारी सिक्युरिटी रिसीट्स की ट्रेडिंग को भी मंजूरी दे दी गई। 

-त्यागी ने कहा कि बोर्ड ने क्रेडिट रेटिंग कंपनियों के नए नॉर्म्स को मंजूरी दे दी है।-क्रेडिट रेटिंग कंपनियों को 5 करोड़ की तुलना में 25 करोड़ रुपए मिनिमम नेटवर्थ की जरूरत होगी। -सेबी ने कहा कि बोर्ड ने लिस्टेड कंपनियों को क्यूआईपी के माध्यम से मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने की अनुमति दे दी है। -त्यागी ने कहा कि डिफॉल्ट डिसक्लोजर नॉर्म्स पर ज्यादा चर्चा करने की जरूरत है। 
 
 विदेशी निवेशकों के लिए लचीले किए नॉर्म्स
सेबी ने भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश के इच्छुक फॉरेन फोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) के लिए एंट्री नॉर्म्स को लचीला बनाने का फैसला किया। इसके अलावा सेबी ने किसी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (एआरसी) द्वारा स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर जारी सिक्युरिटी रिसीट्स की लिस्टिंग को अनुमति देने का फैसला किया।

सेबी चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि इससे जहां सिक्युरिटाइजेशन इंडस्ट्री में पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और वहीं नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के मुद्दे से निबटने में मदद मिलेगी।

सेबी ने रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र देशों के लिहाज से एफपीआई नियमों में बदलाव किया, इससे कनाडा जैसे अन्य देशों के इन्वेस्टर्स को सीधे भारत में निवेश का मौका मिलेगा।

इसके साथ ही एफपीआई को रिस्क प्रोफाइल और केवाईसी जरूरतों के हिसाब से तीन कैटेगरी में बांटने का फैसला किया गया, वहीं अन्य रजिस्ट्रेशन प्रोसिजर्स को भी सरल बना दिया गया।

डिफॉल्‍टर्स को नहीं मिलेगी कंपनी की कमान, लोकसभा में बिल पेश

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नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड में संशोधन के लिए एक बिल लोकसभा में पेश किया है। यह बिल कोड की खामियों को दूर करने के साथ विलफुल डिफॉल्‍टर्स को कंपनी की कमान देने पर रोक लगाता है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड (अमेंडमेंट) बिल, 2017 लोकसभा में पेश किया। 

 खराब कर्ज के लिए कौन लगा सकती है बोली 
 बिल में प्रस्‍तावित बदलाव से खराब कर्ज के लिए खरीदार सेलेक्‍ट करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए मौजूदा समय में कोड में इस बात का स्‍पष्‍ट उल्‍लेख नहीं है कि किस तरह के खरीदार ऐसी कंपनियों के खराब कर्ज के लिए बोली लगा सकते हैं जो बैंकरप्‍सी प्रोसीडिंग के तहत आती हैं। 
 
 रिजॉल्‍यूशन प्रॉसेस में कौन नहीं हो सकता है शामिल 
 बिल में इस बात को स्‍पष्‍ट किया गया है कि रिजॉल्‍यूशन प्रोफेशनल द्वारा दिए गए निमंत्रण के जवाब में कौन सा व्‍यक्ति रिजॉल्‍यूशन प्‍लान जमा करा सकता है। इसके तहत विलफुल डिफॉल्‍टर्स, अयोग्‍य डायरेक्‍टर्स, प्रमोटर्स या डिफॉल्टिंग कंपनी का मैनेजमेंट या कोई व्‍यक्ति जो विदेश में ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा हो, रिजॉल्‍यूशन प्‍लान जमा नहीं करा सकता है। यानी ये लोग खराब कर्ज वाली कंपनी की कमान अपने हाथ में लेने के लिए आवेदन नहीं कर सकते। 
 
 पिछले साल दिसंबर में लागू हुआ था बैंकरप्‍सी कोड 
 बैकरप्‍सी कोड पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था। इसके तहत कर्ज दबाए बैठी कंपनियों से समयसीमा में कर्ज की वसूली की जा सकती है। इस कोड को कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्‍ट्री ने लागू किया है।
 
300 से ज्‍यादा केस शुरू हुए
इस वक्‍त तक 300 से ज्‍यादा केस इस कोड के तहत दर्ज हो चुके हैं। इनको नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) इस कोड के तहत मंजूरी दे चुका है। इसकी मंजूरी के बाद ही इस कोड के तहत मामला चलाया जाता है।

हर महीने नहीं बढ़ेंगे रसोई गैस के दाम, सरकार ने आदेश वापस लिया

नई दिल्ली। सरकार ने हर महीने एलपीजी सिलिंडर का रेट बढ़ाने का फैसला वापस ले लिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है कि हर महीने रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाना सरकार की गरीबों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना ‘उज्ज्वला’ के उलट बैठता है।

इससे पहले सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की सभी पेट्रोलियम कंपनियों को जून, 2016 से एलपीजी सिलिंडर कीमतों में हर महीने चार रुपये की बढ़ोतरी का निर्देश दिया था। सरकार के इसके पीछे का मकसद एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को अंतत: समाप्त करना था।

एक सूत्र ने बताया कि इस आदेश को अक्तूबर में वापस ले लिया गया है। इसी के चलते इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) ने अक्तूबर से एलपीजी के दाम नहीं बढ़ाए हैं।

इससे पहले तक पेट्रोलियम कंपनियों को 1 जुलाई, 2016 से हर महीने 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलिंडर के दाम दो रुपये (वैट शामिल नहीं) बढ़ाने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद पेट्रोलियम कंपनियों ने 10 मौकों पर एलपीजी के दाम बढ़ाए थे। प्रत्येक परिवार को एक साल में 12 सब्सिडी वाले सिलिंडर मिलते हैं।

इससे अधिक की जरूरत होने पर बाजार मूल्य पर सिलिंडर मिलता है। 30 मई, 2017 को एलपीजी कीमतों में मासिक वृद्धि को बढ़ाकर दोगुना यानी चार रुपये कर दिया गया। पेट्रोलियम कंपनियों को 1 जून, 2017 से हर महीने एलपीजी कीमतों में चार रुपये वृद्धि का अधिकार दिया गया।

इस मूल्यवृद्धि का मकसद घरेलू सिलिंडर पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी को शून्य पर लाना था। यह काम मार्च, 2018 तक किया जाना था। सूत्र ने बताया कि यह आदेश सरकार की उज्ज्वला योजना के उलट संकेत दे रहा था। एक तरफ सरकार गरीबों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दे रही है वहीं दूसरी ओर हर महीने सिलिंडर के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।

सूत्र ने कहा कि इसमें सुधार के लिए यह आदेश वापस ले लिया गया है। अक्तूबर के बाद भी एलपीजी के दाम बढ़े हैं, इसकी मुख्य वजह कराधान का मुद्दा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के क्रियान्वयन के बाद कराधान का मुद्दा बना है।

इस योजना में ग्राहकों को सीधे उनके खातों में सब्सिडी की राशि डाल दी जाती है और उन्हें एलपीजी सिलिंडर बाजार मूल्य पर खरीदना होता है। डीबीटी से पहले डीलरों के पास एलपीजी सब्सिडी वाले मूल्य पर उपलब्ध होता था। वैट इसी सब्सिडी वाले मूल्य पर लगाया जाता था।

अब एलपीजी सिर्फ बाजार मूल्य पर उपलब्ध है और उस पर जीएसटी लगता है। सूत्र ने कहा कि सब्सिडी वाले मूल्य से अधिक होने के अलावा बाजार मूल्य में हर महीने बदलाव आता है। करों को शामिल करने के लिए इसके खुदरा मूल्य में बदलाव करना पड़ता है। पिछले 17 माह में 19 किस्तों में एलपीजी कीमतों में 76.5 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

बिटकॉइन पर नकेल कसने की तैयारी में सरकार

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मुंबई। सरकार ने बिटकॉइन सहित सभी क्रिप्टोकरेंसी (आभासी मुद्रा) पर लगाम कसने के लिए उन्हें नियामकीय दायरे में लाने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक सरकार क्रिप्टोकरेंसी की परिभाषा तय कर सकती है और अगले साल के बजट में इस बारे में नियामकीय व्यवस्था की घोषणा कर सकती है।

सूत्रों ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार की तरफ से गठित विशेषज्ञों की समिति ने इस मुद्दे पर मसौदा रिपोर्ट तैयार की है। इसमें बिटकॉइन की परिभाषा, इसे मुद्रा का दर्जा देने या नहीं देने और पूंजीगत संपत्ति या अस्थिर मौद्रिक संपत्ति घोषित करने के बारे में बात की गई है।

रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के हर संभावित वर्गीकरण, इन पर कर लगाने और बाकी सभी संबंधित मुद्दों पर विस्तार से बताया गया है। इसी महीने सरकार ने इस विषय का अध्ययन करने के लिए एक नई समिति का गठन किया था और उसे क्रिप्टोकरेंसी से निपटने के लिए उपाय सुझाने को कहा था। सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी पर यह दूसरी समिति बनाई थी। 
 
नई समिति का जिम्मा आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग को दिया गया है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। इस तरह के चलन के बढ़ते इस्तेमाल के मद्देनजर क्रिप्टोकरेंसी के मामले में स्पष्टता जरूरी है। 
 
सूत्रों ने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने क्रिप्टोकरेंसी को सुरक्षित और धन प्रेषण के अज्ञात तरीके के रूप में परिभाषित किया है। समिति का कहना है कि किसी भी देश की सरकार की ओर से जारी वैध मुद्रा की तरह ही इन आभासी मुद्राओं को माना जा सकता है।  कुछ इकाइयों को इनके जरिये भुगतान स्वीकार्य है।

रिपोर्ट के अनुसार एक हजार से अधिक क्रिप्टोकरेंसी की मौजूदगी का पता चला है। रिपोर्ट के इस पर भी चर्चा की गई है कि बिटकॉइन को किस रूप में वर्गीकृत किया जाए। अगर मुद्रा की श्रेणी में रखते हैं तो फिर माना जाएगा कि बिटकॉइन मुद्रा है। हालांकि फेमा के तहत या रिजर्व बैंक की वैध मान्यता के रूप में इसे मुद्रा का फिलहाल दर्जा नहीं है। 
 
बिटकॉइन को मुद्रा की श्रेणी में रखा जाता है या नहीं, इस पर तब तक बहस चलती रहेगी जबकि रिजर्व बैंक अपना रुख साफ न कर दे। अगर रिजर्व बैंक इसे मुद्रा घोषित कर देता है तो इसमें होने वाला कोई भी कारोबार फेमा कानूनों के तहत आएगा। 

समिति ने कहा कि करदाताओं ने अगर निवेश के उद्देश्य से इसे खरीदा तो बिटकॉइन को ‘पूंजी परिसंपत्ति’ माना जा सकता है। उस स्थिति में बिटकॉइन के लेनदेन पर होने वाले लाभ को पूंजीगत लाभ माना जाएगा और उस पर कर लगेगा। समिति ने स्पष्ट किया कि बिटकॉइन की बिक्री से पूंजी लाभ की गणना कैसे होगी।

दूसरी पूंजीगत परिसंपत्तियों की तरह अगर बिटकॉइन को खरीदारी की तिथि से 36 महीने से अधिक समय के लिए रखा जाता है तो यह दीर्घ अवधि का पूंजीगत लाभ माना जाएगा, वरना इसे लघु अवधि का पूंजीगत लाभ माना जाएगा। समिति ने कहा कि बिटकॉइन से प्राप्त मुनाफा कारोबारी आय के रूप में कर योग्य है।

तब ‘माइनिंग’ प्रक्रिया के दौरान अर्जित बिटकॉइन भी कारोबार मुनाफे के तौर पर कर योग्य होंगी। हालांकि अगर बिटकॉइन को पूंजीगत परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया जाता है तो बिटकॉइन ‘माइनिंग’ से प्राप्त आभासी मुद्रा पर कर नहीं लगेगा।

 समिति ने इस पर भी प्रकाश डाला है कि आय कर अधिनियम के तहत आभासी मुद्रा ‘अचल संपत्ति’ मानी जा सकती है या नहीं।  रिपोर्ट में कहा गया, ‘परिसंपत्ति की श्रेणी उसकी प्रवृत्ति और उसके साथ जुड़ी शर्तों के साथ बदल सकती है।’ रिपोर्ट में कहा गया कि बिटकॉइन को उस देश के साथ जोड़ा जा सकता है, जहां इसका ऑपरेटिंग सर्वर मौजूद है। 

वैश्विक बाजारों में जबरदस्त छलांग लगाने के बाद आभासी मुद्राओं खासकर बिटकॉइन के नियमन की मांग जोर पकडऩे लगी। दिलचस्प बात यह है कि गिरावट की स्थिति में सुरक्षा संबंधी कोई नियम-शर्तें नहीं होने के बावजूद इसमें भारी निवेश कर रहे हैं।

बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसीज में निवेश कैसे करें, देखिये वीडियो

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दिनेश माहेश्वरी
कोटा। बिटकॉइन ने बंपर रिटर्न देकर सुर्खियां बटोरीं तो लोग इसमें ताबतोड़ खरीदारी करने लगे। लोगों ने इस बारे में पूछताछ करनी शुरू कर दी। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि बिटकॉइन या अन्य किसी क्रिप्टोकरंसी में कितने पैसे लगाएं या इनमें पैसे लगाना ठीक है भी कि नहीं?

कई लोगों को लगता है कि डिजिटल करंसी का मार्केट बेहद उतार-चढ़ाव वाला है। चूंकि मार्केट में कई तरह की क्रिप्टोकरंसीज हैं, इसलिए यह तय कर पाना थोड़ा मुश्किल है कि किस क्रिप्टोकरंसी में कितने पैसे लगाए जाएं। इसलिए आज यह उलझन जरूर दूर कर लें…

छोटी शुरुआत करें
पहली बात जो ध्यान देने योग्य है, वह यह कि किसी भी क्रिप्टोकरंसी में छोटी रकम लगाकर ही शुरुआत करें। एक बार आपने छोटी रकम से शुरुआत कर दी तो आपको धीरे-धीरे इसके ट्रांजैक्शन प्रोसेस, इसकी ट्रेडिंग के साथ-साथ इसे स्टोर करने के तरीके मालूम हो जाएंगे। आप जब इन प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझ लें तो आप धीरे-धीरे निवेश की रकम बढ़ा सकते हैं।

ऑनलाइन बैंकिंग जैसा नहीं है डिजिटल करंसी का ट्रांजैक्शन
आपको पता होना चाहिए कि कोई भी डिजिटल करंसी खरीदने, ट्रांसफर करने और इसे स्टोर करने की प्रक्रिया ऑनलाइन बैंकिंग या निवेश की परंपारगत तरीकों से बिल्कुल अलग होती है।

क्रिप्टोकरंसीज की दुनिया में अगर आपने जैसे ही गलती की, आपके पैसे डूब जाएंगे। अगर आपने गलत ऐड्रेस पर बिटकॉइन भेज दिया तो पूरा का पूरा पैसा डूब जाएगा। गलत पते से वापसी का यहां कोई मौका नहीं मिलता।

पासवर्ड भूल गए तो?
क्रिप्टो वर्ल्ड में “I forgot my password” का ऑप्शन भी नहीं के बराबर होता है। इसलिए बड़ी रकम लगाने से पहले यह बहुत जरूरी है कि आप क्रिप्टोकरंसीज से जुड़ी मूल बातों को जरूर समझें।

ज्यादा-से-ज्यादा इतना लगाएं
इसका मतलब यह है कि अगर आपने खूब सारे पैसे लगा दिए और किसी सुबह नींद खुलने के बाद पता चले कि आपके क्रिप्टो पोर्टफोलियो की कीमत नहीं बची तो भी आप बहुत नुकसान में नहीं होंगे। छोटी रकम गंवानाआपको चुभ तो सकता है, लेकिन इससे आप बर्बाद नहीं जाएंगे, न ही फिर से पैसे लगाने से हिचकेंगे।

वैसे भी, क्रिप्टोकरंसीज को लेकर बेहद उत्साहित लोगों को भी इसकी प्रक्रिया सीखने के लिए शुरू-शुरू में बहुत कम पैसे लगाने चाहिए। इसका एक फॉर्म्युला यह हो सकता है कि आप अभी विभिन्न जगहों पर कुल जितनी रकम निवेश कर रहे हैं, उसका 1% प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा क्रिप्टोकरंसी में नहीं लगाएं। एक बार आप चीजों को समझ लें तो जितनी मर्जी पैसे लगा सकते हैं। परन्तु निवेश के पहले हमारे सीए अनंत लड्ढा का या वीडियो देखिए –

तीन तलाक पर संसद में बिल पेश,  इतना सख्त कि जमानत भी नहीं मिलेगी

नई दिल्ली। एक बार में तीन तलाक को क्रिमिनल ऑफेंस के दायरे में लाने के लिए सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में बिल पेश कर दिया। बिल का सबसे पहले विरोध करने वालों में असदुद्दीन ओवैसी शामिल थे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से इस पर एकजुटता दिखाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यह बिल महिला से भेदभाव खत्म करने, उन्हें सुरक्षा और सम्मान देने के लिए है। इस बिल को ‘द मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज’ नाम दिया गया है।

बिल को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में इंटर-मिनिस्टिरियल ग्रुप ने तैयार किया है। इसके तहत ‘तलाक-ए-बिद्दत’ को गैरकानूनी बताया गया है। फिर चाहे वह बोलकर दिया गया हो, ईमेल से दिया गया हो या एसएमएस-वॉट्सऐप से दिया गया हो।

लोकसभा में इस तरह शुरू हुई बहस
– ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के लीडर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ यह बिल संविधान के तहत मिले बुनियादी हक के खिलाफ है। अगर यह बिल पास होता है तो यह मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नाइंसाफी पैदा करने वाला होगा। बीजद के सांसद भर्तृहरि महताब ने भी बिल का विरोध किया

तलाक-ए-बिद्दत देने पर शौहर को 3 साल की जेल होगी
– बिल के मुताबिक, जुबानी, लिखित या किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एकसाथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देना गैरकानूनी और गैर जमानती होगा। तीन तलाक देने वाले पति को तीन साल की सजा के अलावा जुर्माना भी होगा।

– साथ ही इसमें महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी और गुजारा भत्ते का दावा भी कर सकेगी। इतना सख्त कि जमानत भी नहीं मिलेगी

– मसौदे के मुताबिक, एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत किसी भी तौर पर गैरकानूनी ही होगा। जिसमें बोलकर या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (यानी वॉट्सएेप, ईमेल, एसएमएस) के जरिये भी एक बार में तीन तलाक देना शामिल है।

– अॉफिशियल्स के मुताबिक, हर्जाना और बच्चों की कस्टडी महिला को देने का प्राॅविजन इसलिए रखा गया है, ताकि महिला को घर छोड़ने के साथ ही कानूनी तौर पर सिक्युरिटी हासिल हो सके। इस मामले में आरोपी को जमानत भी नहीं मिल सकेगी।’

– देश में पिछले एक साल से तीन तलाक के मुद्दे पर छिड़ी बहस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने इस बिल का मसौदा तैयार किया। सुप्रीम कोर्ट पहले ही तीन तलाक को बुनियादी हक के खिलाफ और गैरकानूनी बता चुका है।

कांग्रेस को किस बात पर है एतराज?
– कांग्रेस ने तीन तलाक बिल पर कहा है कि सरकार यदि मनमानी करती है और बिल सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शंस के दायरे में नहीं होगा तो वह इसका विरोध करेगी।

– कांग्रेस के स्पोक्सपर्सन अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अभी जो खबरें आ रही हैं, वे ठीक नहीं हैं। खबरों में कहा जा रहा है कि बिल में कड़े प्राॅविजन्स किए गए हैं, जो अदालत के
निर्देशों के मुताबिक नहीं हैं।

– वहीं, बिल को पास कराने के लिए भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरी अपोजिशन पार्टीज को लेटर लिखा है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का क्या कहना है?

– ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार के तीन तलाक बिल को महिलाओं के हक के खिलाफ बताया है। साथ ही दावा किया कि इससे कई परिवार बर्बाद हो जाएंगे।

-बोर्ड ने कहा कि यह मुस्लिम पुरुषों से तलाक का हक छीनने की बहुत बड़ी साजिश है। बिल को गैर कानूनी बताते हुए बोर्ड ने सरकार से इसे वापस लेने की अपील की है।

– महिला बोर्ड की चेयरपर्सन शाइस्ता अंबर का कहना है कि निकाह एक कॉन्ट्रैक्ट होता है। जो भी इसे तोड़े, उसे सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, अगर बिल कुरान और संविधान के मुताबिक नहीं है तो कोई भी मुस्लिम महिला इसे मंजूर नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने कहा था 6 महीने में कानून बने

– 23 अगस्त को 1400 साल पुरानी तीन तलाक की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इललीगल (गैरकानूनी) है। बेंच में शामिल दो जजों ने कहा था कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए।

किस तलाक को खारिज किया गया, कौन-सा तलाक बरकरार है?
– सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत को खारिज कर दिया था, लेकिन सुन्नी मुस्लिमों के पास दो ऑप्शन बरकरार हैं। पहला है तलाक-ए-अहसन और दूसरा है तलाक-ए-हसन।

– तलाक-ए-अहसन के तहत एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को महीने में एक बार तलाक कहता है। अगर 90 दिन में सुलह की कोशिश नाकाम रहती है तो तीन महीने में तीन बार

-तलाक कहकर पति अपनी पत्नी से अलग हो जाता है। इस दौरान पत्नी इद्दत (सेपरेशन का वक्त) गुजारती है। इद्दत का वक्त पहले महीने में तलाक कहने से शुरू हो जाता है।

– तलाक-ए-हसन के तहत पति अपनी पत्नी को मेन्स्ट्रूएशन साइकिल (माहवारी) के दौरान तलाक कहता है। तीन साइकिल में तलाक कहने पर डिवोर्स पूरा हो जाता है।

– सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक साथ तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन में दखल नहीं दिया है।
औरतों के हक के लिए लड़ती रहूंगी- सायरा बानो

– ट्रिपल तलाक को बैन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालने वाली पिटिशनर सायरा बानो ने कहा कि वो आगे भी महिला अधिकारों के लिए लड़ती रहेंगी।

– न्यूज एजेंसी से सायरा ने कहा, “मुझे लगता है ट्रिपल तलाक के बाद पॉलिगैमी (बहुविवाह या एक से ज्यादा शादियां करना) और निकाह हलाला को भी बैन किया जाना चाहिए। महिलाओं को टॉर्चर करने वाली इन परंपराओं पर रोक लगनी चाहिए।  सायरा ने कहा, “मैं एक बार फिर बहुविवाह और निकाह हलाला को रोकने के लिए कोर्ट में अपील दायर करूंगी।”

पाकिस्तान ने की बेअदबी की इंतिहा, जाधव मुद्दे पर सुषमा का बयान

नई दिल्ली। जासूसी के आरोपों में पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव से उनकी मां और पत्नी की मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के शर्मनाक व्यवहार की संसद के दोनों सदनों में पक्ष-विपक्ष ने एक सुर में निंदा की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज इस मुद्दे पर पहले राज्यसभा में और फिर लोकसभा में बयान दिया।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बेअदबी की इंतिहा की है। जिस वक्त वह पाकिस्तान के अमानवीय व्यवहार का जिक्र कर रही थीं उस दौरान दोनों सदनों में ‘पाकिस्तान शेम, शेम’ और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगे। विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने मुलाकात के दौरान शर्तों का उल्लंघन किया।

उन्होंने कहा कि जाधव की मां और पत्नी के मंगलसूत्र, चूड़ी, बिंदी तक निकलवा दिए गए और उन्हें विधवा के रूप में पेश किया गया। सुषमा ने कहा कि यह बेअदबी की इंतिहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के इस शर्मनाक करतूत का पूरा देश निंदा करता है। वहीं कांग्रेस ने जाधव के परिजनों के अपमान को पूरे हिंदुस्तान का अपमान बताया है।

‘मुलाकात को प्रॉपेगैंडा का हथियार बना रहा है पाक’
सुषमा ने कहा कि राजनयिक प्रयासों के बाद मुलाकात तय हुई। उन्होंने कहा कि 22 महीने बाद एक मां की बेटे से और एक पत्नी की पति से भावुक मुलाकात को पाकिस्तान ने प्रॉपेगैंडा के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया।

‘पाकिस्तान ने शर्तों का उल्लंघन किया’
सुषमा ने कहा कि भारत ने कहा था कि जाधव की मां और पत्नी के पास पाकिस्तान मीडिया को न आने दे लेकिन पाकिस्तानी प्रेस को उनके पास आने दिया गया। उन्होंने कहा कि दोनों महिलाओं से बदसलूकी की गई। यह शर्तों का उल्लंघन है।

‘बेअदबी की इंतिहा है ये’
सुषमा स्वराज ने कहा कि दोनों के कपड़े तक बदलवा दिए गए। उन्होंने कहा कि जाधव की मां साड़ी पहनती हैं लेकिन उन्हें सलवार कमीज पहनने को मजबूर किया गया। पत्नी और मां की बिंदी-चूड़ी और मंगलसूत्र उतरवा दिए गए। उन्होंने कहा, ‘मैंने जाधव की मां से बात की….

उन्होंने बताया कि जाधव ने बैठते ही पूछा कि बाबा कैसे हैं, क्योंकि बिंदी न होने से उसे किसी अनहोनी की आशंका थी।’ सुषमा ने कहा कि दोनों सुहागिनों को जाधव के सामने विधवा के रूप में पेश किया गया। बेअदबी की ऐसी इंतिहा पाकिस्तान नहीं कर सकता।

…तो उसी वक्त जताए होते विरोध
सुषमा ने कहा कि जाधव की मां मराठी में बात करना चाहती थी लेकिन इसकी इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि भारत के उप उच्चायुक्त को बिना बताए परिजनों को पिछले दरवाजे से मुलाकात के लिए ले जाया गया। इस वजह से वह यह नहीं देख सके कि जाधव की मां और पत्नी के बिंदी, मंगलसूत्र और चूड़ियों को उतरवा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि उप उच्चायुक्त यह नहीं देख सके, नहीं तो वही ऐतराज जताए होते। बता दें कि पाकिस्तान ने भारत की आपत्तियों को यह कहकर खारिज किया है कि अगर कुछ गलत हुआ तो भारत को उसी वक्त ऐतराज जताना चाहिए था।

‘जूते को लेकर शरारत कर रहा है पाक’
सुषमा ने कहा कि जाधव की पत्नी के जूते उतरवा दिए गए और वापस भी नहीं किए गए। उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि पाकिस्तानी अधिकारी कुछ शरारत करने वाले हैं…हमारी आशंका सच साबित हो रही है…जूते में कैमरा, चिप, रिकॉर्डर की बात कही जा रही है…

उन्हीं जूतों में पत्नी दुबई और इस्लामाबाद एयरपोर्ट गई थी…लेकिन चिप नहीं दिखा…अब शरारत करके दुष्प्रचार कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान का ऐसा झूठ है जिसका तुरंत पर्दाफाश हो रहा है। आखिर जिन जूतों को पहनकर वह एयरपोर्ट पर सिक्यॉरिटी चेक से गुजरीं और कुछ नहीं मिला तो उन्हीं जूतों में चिप कहां से आ गए।

‘न मानवीयता थी न उदारता’
सुषमा ने कहा कि मुलाकात के वक्त जाधव तनाव में दिख रहे थे और दबाव में थे। उन्होंने कहा कि कैद करने वालों ने जो सिखा-पढ़ाकर भेजा था वह वही बोल रहे थे। उनके हावभाव से पता चल रहा था कि वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं।

पाकिस्तान मानवीय आधार पर मुलाकात बता रहा है लेकिन न मानवीयता थी न उदारता। उलटे परिजनों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया। सुषमा ने कहा कि समूचा सदन और पूरा देश पाकिस्तान के शर्मनाक सलूक की निंदा करते हैं।

 पूरे हिंदुस्तान का अपमान: गुलाम नबी आजाद
राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पाकिस्तान, पाकिस्तान की सेना और नेतृत्व को भारत अच्छी तरह से जानता है। उन्हें मर्यादा पर विश्वास नहीं है।

जाधव की मां और पत्नी के साथ अमानवीयता और बदसलूकी पर उन्होंने कहा कि यह जाधव के परिवार के साथ नहीं बल्कि भारत के 130 करोड़ लोगों की माता-बहनों के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच भले ही राजनीतिक मतभेद हो, लेकिन हम भारत की किसी महिला का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते।

कैसे जाधव की मां ने की पाक की कुटिल चाल फेल, जानिए

नई दिल्ली। नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की मां अवंति जाधव ने मुलाकात के दौरान बेहद साहस का परिचय दिया और पाकिस्तान के कुटिल इरादे पर पानी फेर दिया। जब जाधव पाकिस्तान की तरफ से दाखिल की गई चार्जशीट का उल्लेख कर रहे थे, तभी उन्होंने अपने बेटे को बीच में टोकते हुए कहा, ‘तुम क्यों ऐसा कह रहे हो?

तुम तो ईरान में बिजनस कर रहे थे जहां से तुम्हें अगवा किया गया। तुम्हें सच बताना चाहिए।’ अवंति ने यह बात तब कही जब वह अपनी बहू चेतना के साथ जाधव से मिलने पाकिस्तान गई थीं।

जाधव ने बहुत विचित्र तरीके से उनका अभिवादन किया था। वह उन आरोपों को कबूलते हुए लग रहे थे, जो पाकिस्तान ने उनपर लगाए हैं और जिसका भारत विरोध कर रहा है। पाकिस्तान ने उनपर भारतीय जासूस होने और आतंकी हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

परिवार को 22 महीने बाद देखने के बाद उनकी जो प्रतिक्रिया होनी चाहिए थी, वह वैसी नहीं थी। यह व्यवहार उनकी मां को हजम नहीं हो रहा था। 70 वर्षीय अवंति पाकिस्तानी अधिकारियों के डरा देने वाली निगरानी के बीच अपने बेटे को यह कहने में सफल रहीं कि वह पाकिस्तानी सेना और आईएसआई द्वारा दी गई स्क्रिप्ट न पढ़ें।

अवंति के साहस ने संभवतः उन पाकिस्तानी अधिकारियों के काम पर पानी फेर दिया है जो परिवार के समक्ष जाधव के ‘कबूलनामे’ की रिकॉर्डिंग को भारत और उनके खिलाफ मजबूती से पेश करने की योजना बना रहे थे।

बता दें कि पाकिस्तान ने शुरुआत में सिर्फ चेतना को वीजा दिया था, लेकिन भारत के दबाव के कारण उनकी मां को भी वाजा दिया गया। हालांकि, भारत को इस बात का डर है कि पाकिस्तान जाधव और उनके परिवार के बातचीत के ऑडियों में छेड़छाड़ कर सकता है, लेकिन भारत इस बात से राहत महसूस कर रहा है कि अवंति के साहस के कारण पाकिस्तान की योजना पर पानी फिर गया है।

अवंति की मौजूदगी के कारण उस डरावने माहौल में चेतना को संयम बनाए रखने में मदद मिली। भारत को अंदेशा था कि मुलाकात के दौरान जरूर कुछ होगा और यह अंदेश उस वक्त पुष्ट हो गया जब दोनों महिलाओं के साथ जाने के लिए तैयार राजनयिक को पाकिस्तान ने वीजा नहीं दिया।