Thursday, June 18, 2026
Home Blog Page 50

Stock Market: सेंसेक्स 1000 अंक लुढ़का, निवेशकों के 7 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली। Stock Market, May 18, 2026 : पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से आज घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक गिर गया जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में 300 अंक से अधिक गिरावट आई। इस बीच रुपया भी डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर चला गया।

सुबह 9.50 बजे सेंसेक्स 1,010.64 अंक यानी 1.34% गिरावट के साथ 74,227.35 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी 303.25 अंक यानी 1.28% गिरावट के साथ 23,340.25 अंक पर आ गया। इस गिरावट से बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 7 लाख करोड़ रुपये घटकर 454 लाख करोड़ रुपये रह गया।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयरों में गिरावट आई। पावरग्रिड में सबसे ज्यादा 3.81 फीसदी गिरावट आई है। इसके साथ ही टाटा स्टील, मारुति, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व और महिंद्रा एंड महिंद्रा में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। दूसरी ओर इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और टीसीएस के शेयरों में तेज आई है।

घरेलू शेयर बाजार आज शुरुआती कारोबार में लगातार दबाव में रहा। वैश्विक संकेतों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला, जिससे बाजार में बिकवाली का माहौल देखने को मिला।

इससे सेंसेक्स 9.17 बजे 871 अंक लुढ़ककर 74366 पर आ गया है। जबकि, निफ्टी गिरावट का दोहरा शतक लगाकर 261 अंक नीचे 23381 पर आ गया है। बीएसई पर निवेशकों के चंद मिनटों में करीब 5 लाख करोड़ स्वाहा हो गए।

सुबह 9:17 बजे तक निफ्टी 50 में 258.55 अंकों की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,382.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी दौरान सेंसेक्स 855.87 अंक टूटकर 74,382.12 पर आ गया। शुरुआती सत्र में यह तेज गिरावट बाजार की कमजोर धारणा को दर्शाती है।

सिर्फ बड़े इंडेक्स ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1.04 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 1.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

निफ्टी के बड़े शेयरों में बिकवाली
निफ्टी 50 के कई प्रमुख शेयरों में भी दबाव देखा गया। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, टाटा स्टील और टाइटन कंपनी जैसे बड़े स्टॉक्स दिन के टॉप लूजर्स में शामिल रहे। इन दिग्गज कंपनियों में गिरावट का असर पूरे इंडेक्स पर साफ नजर आया।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड का मई वायदा 1.78 प्रतिशत बढ़कर 111.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतें कंपनियों की लागत बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक दबाव का संकेत दे रही हैं।

ग्लोबल मार्केट के संकेत

  • गिफ्ट निफ्टी के संकेत
    गिफ्ट निफ्टी लगभग 23,567 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद स्तर से करीब 76 अंकों की कमी दिखा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय बाजार की शुरुआत नकारात्मक हो सकती है।
  • एशियाई बाजारों का हाल
    सोमवार सुबह एशियाई बाजार गिरावट के साथ खुले। जापान का निक्केई 1.01% नीचे था। जबकि, टॉपिक्स 0.88% नीचे रहा। वहीं, दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 1.31% की गिरावट आई। हांगकांग के फ्यूचर्स भी कमजोर हैं।
  • अमेरिकी बाजार का हाल
    शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में भारी बिकवाली हुई। डॉऊ जोन्स 537 अंक (1.07%) की गिरावट के साथ 49,526 पर बंद हुआ। जबकि, एसएंडपी 500 1.24% टूटा और नैस्डैक 1.54% लुढ़क गया। शुक्रवार को एनवीडिया (-4.4%), एएमडी (-5.7%), इंटेल (-6.2%), टेस्ला (-4.75%) और फोर्ड (-7.5%) गिरे, जबकि माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल मामूली बढ़त पर रहे।

ऊर्जा मंत्री नागर ने बपावर क्षेत्र के विकास कार्यों का लिया जायजा

अधिकारियों को सड़कों की मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता पालन के निर्देश

बपावर/कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर रविवार को सांगोद एवं बपावर क्षेत्र के तूफानी दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, विशेषकर ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सड़कों के निर्माण कार्य की प्रगति का धरातल पर निरीक्षण किया।

मंत्री नागर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ और तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि आमजन को जल्द से जल्द इनका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​अपने दौरे की शुरुआत में ऊर्जा मंत्री ने खेतों के रास्तों पर चल रहे सड़क निर्माण कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए सुदृढ़ रास्तों का होना बेहद जरूरी है।

इसके बाद उन्होंने किशनपुरा से गाडरवाड़ा तक बनने वाली मिसिंग लिंक रोड के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और संबंधित अभियंताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने उजाड़ नदी पर मोई खुर्द से डेरु माताजी – जोलपा की ओर बनने वाली पुलिया के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया।

उन्होंने कहा कि इस पुलिया के बनने से बारिश के दिनों में ग्रामीणों को होने वाली भारी परेशानी से मुक्ति मिलेगी और दर्जनों गांवों का आपसी संपर्क सुगम हो जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने चतरपुरा से डोबड़ा मिसिंग लिंक सड़क, संपर्क सड़क डोबडा से डोबड़ी और डोबड़ी से सांगोद के निर्माण कार्यों का भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया और काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए।

अपने दौरे के अगले चरण में ऊर्जा मंत्री ने संपर्क सड़क मोई कला से जोलपा रोड के निर्माण कार्य की प्रगति देखी। उन्होंने मौके पर मौजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को हिदायत दी कि सड़कों की मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता में उच्च मानकों का पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का सुदृढ़ीकरण ही सरकार की मुख्य प्राथमिकता है और हर गांव-ढाणी को मुख्य सड़कों से जोड़ना हमारा संकल्प है।

दौरे के अंतिम पड़ाव में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ग्राम मोई कलां पहुंचे। जहां उन्होंने ‘ग्राम रथ अभियान’ के तहत आयोजित भव्य ग्रामीण चौपाल में भाग लिया। चौपाल में बड़ी संख्या में उमड़े ग्रामीणों ने मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।

इस दौरान मंत्री नागर ने सीधे जनता से संवाद करते हुए उनकी बिजली, पानी, सड़क और अन्य स्थानीय समस्याओं को सुना। कई समस्याओं का उन्होंने मौके पर ही मौजूद प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों को बुलाकर त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए।

चौपाल को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘सुशासन’ के संकल्प के साथ काम कर रही है, जहां अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही मुख्य ध्येय है।

इस अवसर पर प्रधान जयवीर सिंह अमृतकुआँ समेत विभिन्न विभागों के आला अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

ऊर्जा मंत्री नागर ने सांगोद में औचक भ्रमण कर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांची

अधिकारियों को दी बिना दबाव काम करने की नसीहत

सांगोद/कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने रविवार तड़के सांगोद नगर में औचक भ्रमण कर विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का जमीनी निरीक्षण किया। शनिवार रात सांगोद स्थित अपने निजी आवास पर विश्राम करने के बाद, मंत्री नागर सुबह जल्दी ही बिना किसी पूर्व सूचना के नगर की सड़कों पर निकल पड़े।

इस दौरान उन्होंने शहर के अलग-अलग वार्डों और मुख्य मार्गों का दौरा कर वहां चल रहे विकास कार्यों की प्रगति और उनकी गुणवत्ता का बारीकी से जायजा लिया।

​ऊर्जा मंत्री अपने इस भ्रमण के दौरान कोलियों का बड़, कोटा रोड, जलदाय विभाग की टंकी के पास, सीएमएचओ ऑफिस के पीछे, जलदाय विभाग परिसर, गायत्री चौराहा, जोलपा रोड तथा गौरव पथ सहित नगर के विभिन्न प्रमुख इलाकों में पहुंचे।

इन क्षेत्रों में वर्तमान में चल रहे नाली निर्माण, सड़क मरम्मत, सीवरेज लाइन और बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड (भूमिगत) करने के कार्यों का उन्होंने भौतिक सत्यापन किया। सुबह-सुबह अचानक ऊर्जा मंत्री को अपने बीच पाकर स्थानीय नागरिक भी अपनी समस्याएं साझा करने पहुंचे।

​निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने निर्माण कार्यों में लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने नाली निर्माण में प्रयुक्त की जा रही सामग्री की गुणवत्ता को खुद परखा और मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण सामग्री की तुरंत लैब जांच कराई जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा और स्वच्छता के मद्देनजर नालियों को व्यवस्थित तरीके से ढकने (ढकान) के भी कड़े निर्देश दिए, ताकि आमजन और मवेशियों को कोई दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

निरीक्षण के बाद ऊर्जा मंत्री ने नगर पालिका के अधिकारियों और अभियंताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में नसीहत देते हुए कहा कि वे बिना किसी राजनीतिक या बाहरी दबाव के, पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से काम करें।

मंत्री नागर ने कहा कि सरकार का मुख्य ध्येय जनता का कल्याण है, इसलिए अधिकारी पूरी तरह जनता के हितों को सर्वोपरि रखकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने चल रहे सीवरेज और बिजली अंडरग्राउंडिंग के कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए ताकि स्थानीय निवासियों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और भारी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

राजधानी एक्सप्रेस में आग की घटना जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित

कोटा। गाड़ी संख्या 12431 तिरुवनंतपुरम-हजरत निज़ामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस के कोच में रविवार को सुबह हुई आग लगने की घटना की जांच के लिए पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक द्वारा उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है।

पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक द्वारा 6 वरिष्ठ HAG अधिकारियों की समिति को 20 मई तक जांच पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सुरक्षा अधिकारी मनोज गुरुमुखी (PCSO/WCR) की संयोजकता में गठित इस 6 सदस्यीय समिति में मुकेश (PCEE/WCR), एम. विजय कुमार (PCME/WCR), एन.एस. प्रसाद (PCME/ICF), महेन्द्र सिंह (ED/PS&EMU/RDSO) एवं राजीव कुमार (PCSC/WCR) सम्मिलित हैं।

उल्लेखनीय है कि इस घटना में रेलकर्मियों की तत्काल सतर्कता एवं समन्वित आपातकालीन प्रबंधन से सभी यात्री सुरक्षित रहे। ज्ञातव्य है कि 17 मई को सुबह कोटा मंडल के नागदा-कोटा प्रमुख खंड पर लूनी रिछा-विक्रमगढ़ आलोट के मध्य गाड़ी संख्या 12431 तिरुवनंतपुरम-हजरत निज़ामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस के बी-1 कोच में आग लगने की सूचना मिली।

रेलकर्मियों की तत्काल सतर्कता, पश्चिम मध्य रेल महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह के निर्देशन में सुदृढ़ आपातकालीन प्रबंधन एवं अधिकारियों के समन्वय से सभी यात्रियों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया और सभी यात्री सुरक्षित रहे।

प्रातः 05:08 बजे गाड़ी की स्वचालित अग्नि संसूचन एवं दमन प्रणाली सक्रिय होते ही गाड़ी स्वतः रुक गई। गाड़ी प्रबंधक उपेन्द्र कुमार ने तत्काल स्थिति का आकलन कर सभी यात्रियों को शांतिपूर्वक एवं सुरक्षित रूप से कोच से बाहर निकाला और नियंत्रण कक्ष को तत्काल सूचित किया।

कोटा डोरिया को मिलेगी नई पहचान, पूर्वोत्तर के एरी सिल्क से होगा संगम

  • प्रीमियम फैब्रिक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला प्रतिनिधिमंडल

कोटा। राजस्थान के पारंपरिक कोटा डोरिया और पूर्वोत्तर भारत के प्रसिद्ध एरी सिल्क को मिलाकर नया प्रीमियम फैब्रिक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है।

रविवार को कोटा स्थित लोकसभा कैंप कार्यालय में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के सचिव संजय जाजू और फैशन डिजाइनरों व बुनकरों के प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।

बिरला ने कहा कि कोटा डोरिया केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि हाड़ौती की पहचान और यहां के बुनकरों की मेहनत का प्रतीक है। इसे पूर्वोत्तर के एरी सिल्क के साथ जोड़कर नया फैब्रिक तैयार करने से देश की दो समृद्ध हस्तकरघा परंपराओं को नई पहचान मिलेगी और कारीगरों के लिए नए अवसर भी बनेंगे।

उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘5F Vision’ – Farm to Fibre, Fibre to Fabric, Fabric to Fashion, Fashion to Foreign – को आगे बढ़ाने वाली है।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस पहल से राजस्थान और पूर्वोत्तर क्षेत्र के बुनकरों एवं कारीगरों को नए अवसर मिलेंगे और भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। कोटा के फैशन डिजाइनरों ने भी प्रस्तावित टेक्सटाइल फ्यूजन को लेकर अपने सुझाव साझा किए।

इससे पहले संजय जाजू ने कैथून स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का दौरा किया। उनके साथ जिला कलक्टर पीयूष समारिया और नॉर्थ ईस्टर्न हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NEHHDC) के प्रतिनिधि मारा कोचो भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कोटा डोरिया की पारंपरिक बुनाई प्रक्रिया को देखा और एरी सिल्क के साथ उसके संयोजन की संभावनाओं पर चर्चा की।

जाजू ने कहा कि प्रस्तावित योजना के तहत ऐसा विशेष फैब्रिक विकसित किया जाएगा, जिसमें एरी सिल्क की मुलायम बनावट और कोटा डोरिया की हल्की व पारदर्शी बुनावट का मेल होगा। इसे देश और विदेश के प्रीमियम बाजारों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।

जल्द होगा एमओयू
जाजू ने कहा कि इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए NEHHDC और राजस्थान सरकार के जिला उद्योग केंद्र (DIC) के बीच जल्द ही एमओयू किए जाने की तैयारी है। इसके तहत संयुक्त डिजाइन विकास, कारीगरों के प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एरी सिल्क अपनी मजबूती, गर्माहट और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन के लिए जाना जाता है, जबकि कोटा डोरिया अपनी खास चौकड़ीदार बुनावट और हल्केपन के कारण विश्वभर में पहचान रखता है। दोनों पारंपरिक वस्त्र शैलियों का यह मेल भारतीय हस्तकरघा उद्योग को नई दिशा देगा।

Silver Import: सरकार ने चांदी आयात प्रतिबंधित श्रेणी में डाला, जानिए क्यों

नई दिल्ली। Silver Import: सरकार ने चांदी के आयात से जुड़े नियम तत्काल प्रभाव से कड़े कर दिए हैं। यह कदम कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाने के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया है। इस फैसले से घरेलू बाजार और व्यापार संतुलन पर असर पड़ने की उम्मीद है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी। चांदी की आयात नीति को ‘मुक्त’ से ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में संशोधित किया गया है। इसमें सोने और प्लैटिनम से चढ़ी चांदी भी शामिल है। प्रतिबंधित श्रेणी के तहत आने वाले सामानों के आयात के लिए अब सरकार से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

सरकार ने 13 मई को कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में बड़ी वृद्धि की थी। आयात शुल्क छह फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया था। यह लगातार दूसरा बड़ा कदम है जो कीमती धातुओं के आयात को प्रभावित करेगा। इन कदमों से देश में चांदी के व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा।

आयात नीति में बदलाव
सरकार ने चांदी के आयात को लेकर अपनी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले चांदी का आयात मुक्त श्रेणी में आता था, जिसका अर्थ था कि इसे आसानी से आयात किया जा सकता था। अब इसे प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है। इस बदलाव का मतलब है कि आयातकों को अब चांदी मंगाने के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी। यह प्रक्रिया आयात को और अधिक नियंत्रित और जटिल बना देगी।

सीमा शुल्क में वृद्धि
चांदी पर प्रतिबंध लगाने से पहले, सरकार ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया था। 13 मई को यह शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया था। यह वृद्धि सोने और अन्य कीमती धातुओं पर भी लागू हुई थी। इन दोनों कदमों से देश में कीमती धातुओं का आयात महंगा हो जाएगा। यह सरकार का एक और महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय है।

क्या ईरान देगा ट्रंप की हत्या करने वाले को 50 मिलियन यूरो का इनाम, जानिए

तेहरान। US-Iran Conflict:अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ईरान की संसद में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की हत्या के बदले करोड़ों रुपये का इनाम देने से जुड़ा प्रस्ताव लाया जा सकता है।

दावा है कि इस प्रस्ताव में ट्रंप के साथ-साथ इस्राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अधिकारियों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है।

लेकिन सवाल ये है कि आखिर ईरान में ऐसी मांग क्यों उठ रही है? और क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा रणनीतिक संदेश छिपा है? क्या सचमुच ट्रंप की हत्या के लिए 50 मिलियन यूरो यानी करीब 558 करोड़ रुपये के इनाम की तैयारी हो रही है?

अगर ऐसा होता है तो क्या अमेरिका इसे सीधे युद्ध की धमकी मानेगा? क्या Netanyahu और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अन्डर्ग्रैउन्ड होने का समय आ गया है?

इनसब के इतर सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका-ईरान का मौजूदा संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है? खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां, परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनातनी और होरमुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता दबाव की वजह से क्या दुनिया एक नए बड़े युद्ध की तरफ बढ़ रही है?

ईरान की संसद में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की हत्या के बदले 50 मिलियन यूरो यानी करीब 558 करोड़ रुपये का इनाम देने से जुड़ा प्रस्ताव लाए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख Ebrahim Azizi की ओर से तैयार किए गए एक मसौदे का हिस्सा है। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी आधिकारिक तौर पर पारित नहीं किया गया है, लेकिन इसकी चर्चा ने अमेरिका-ईरान संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है।

इस पूरी घटना को अंजाम देने के लिए ईरान ने एक खास प्लान तैयार किया है। ईरान की ये योजना सुनकर शायद आप भी चकमा खा जाएंगे। दरअसल, ईरान वायर और ईरान इंटरनेशनल जैसी मीडिया संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, “काउंटर-एक्शन” नाम की एक योजना तैयार की गई है, जिसमें ट्रंप, इस्राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के कमांडर को निशाना बनाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरानी सुरक्षा और सैन्य एजेंसियों ने इस मसौदे को तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस मिशन को अंजाम देता है, तो उसे भारी आर्थिक इनाम दिया जाएगा।

इब्राहिम अजीजी ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के खिलाफ साजिशें रची हैं और इसी वजह से जवाबी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि “यह हमारा अधिकार है कि हम अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करें।” अजीजी के बयान को ईरान के कट्टरपंथी धड़े का सबसे आक्रामक बयान माना जा रहा है।

इससे पहले भी ईरान समर्थक प्लेटफॉर्म “मसाफ” ने दावा किया था कि “किल ट्रंप” नाम के एक अंतरराष्ट्रीय अभियान के लिए 50 मिलियन डॉलर सुरक्षित रखे गए हैं। वहीं “हंडाला” नाम के एक हैकिंग ग्रुप ने भी सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि उसने ट्रंप और नेतन्याहू को खत्म करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। ग्रुप ने दावा किया कि यह रकम किसी भी ऐसे व्यक्ति या समूह को दी जाएगी जो वास्तविक कार्रवाई करेगा। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

मार्च 2026 में ईरान के कई मोबाइल यूजर्स को बड़े पैमाने पर ऐसे टेक्स्ट मैसेज भी भेजे गए थे, जिनमें ट्रंप की हत्या पर इनाम की बात कही गई थी। इन मैसेजों के स्क्रीनशॉट ईरान इंटरनेशनल ने साझा किए थे। इससे यह संकेत मिला कि यह केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि एक बड़े प्रचार अभियान का हिस्सा भी हो सकता है।

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पिछले कई महीनों से चरम पर है। फरवरी 2026 में शुरू हुआ सैन्य टकराव धीरे-धीरे खाड़ी क्षेत्र में बड़े संकट में बदल गया। अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। इसके बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होरमुज जलडमरूमध्य में भी तनाव बढ़ गया।

हाल के हफ्तों में हालात और बिगड़ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने अमेरिकी जहाजों या हितों पर हमला किया, तो उसे “पहले से कहीं ज्यादा बड़े हमलों” का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी नौसेना ने होरमुज जलडमरूमध्य में हस्तक्षेप किया तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत भी जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लंबे समय तक रोक दे, जबकि ईरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं है। हाल ही में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका 20 साल तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थगित करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है, लेकिन इसके लिए कड़ी निगरानी और गारंटी जरूरी होगी। 

इसके बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास बना हुआ है। ट्रंप ने हाल में ईरान के प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया और कहा कि ईरान अभी भी परमाणु हथियारों की दिशा में बढ़ रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध, सैन्य दबाव और खाड़ी क्षेत्र में नौसैनिक घेराबंदी उसकी संप्रभुता पर हमला हैं।

खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। होरमुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। ईरान ने हाल में यहां जहाजों से टोल वसूलने और समुद्री नियंत्रण बढ़ाने की बात कही है, जिसका अमेरिका और पश्चिमी देशों ने विरोध किया है। तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता भी इसी संकट से जुड़ी मानी जा रही है।

अमेरिका ने भी जवाबी दबाव बढ़ाते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में ईरान के ड्रोन नेटवर्क और वित्तीय चैनलों की जानकारी देने वालों के लिए 15 मिलियन डॉलर के इनाम की घोषणा की।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की हत्या पर इनाम का प्रस्ताव भले ही अभी प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश हो, लेकिन इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका इस तरह की किसी भी धमकी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। यदि ईरानी संसद में यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश होता है, तो दोनों देशों के रिश्तों में नई कड़वाहट आ सकती है।

फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत किसी समझौते तक पहुंच पाएगी या फिर यह तनाव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल जाएगा। मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया में संकट अभी खत्म होने वाला नहीं है।

राहतभरी खबर: होर्मुज से 20 हजार टन LPG लेकर भारत पहुंचा जहाज

नई दिल्ली। LPG Ship Symi Reach Kandla Port: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करके रसोई गैस से भरा एक बड़ा जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘सिमी’ करीब 20 हजार टन रसोई गैस लेकर गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पहुंचा है।

लेकिन इस खबर की सबसे बड़ी बात सिर्फ जहाज का पहुंचना नहीं, बल्कि उसका वह खतरनाक सफर है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। बताया जा रहा है कि ईरानी नौसेना की कड़ी निगरानी, अमेरिकी नाकेबंदी और युद्ध के खतरे के बीच जहाज को सुरक्षित निकालना किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन से कम नहीं था। यहां तक कि दुश्मन के रडार से बचने के लिए जहाज का ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी AIS तक बंद करना पड़ा।

भारत के लिए यह राहत इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि युद्ध के कारण देश के ईंधन भंडार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह खेप देश की रसोई और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आखिर कैसे पूरा हुआ यह हाई रिस्क ऑपरेशन… आइए आपको बताते हैं इस वीडियो में।

पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी मालवाहक जहाज ‘सिमी’ रविवार सुबह सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पहुंच गया।

यह जहाज करीब 20 हजार टन रसोई गैस लेकर भारत पहुंचा है। खास बात यह है कि जहाज ने दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री रास्तों में गिने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पार कर यह सफर पूरा किया है। पश्चिम एशिया में पिछले करीब 75 दिनों से जारी युद्ध के कारण यह समुद्री मार्ग पूरी तरह तनाव के घेरे में है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन यानी IOC ने कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से यह एलपीजी खरीदी थी। जहाज पर सवार 21 विदेशी चालक दल के सदस्य भी पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं। ओमान की खाड़ी में ईरानी नौसेना की कड़ी निगरानी और अमेरिकी नाकेबंदी के बीच इस जहाज को सुरक्षित बाहर निकालना किसी बड़े मिशन से कम नहीं था।

सूत्रों के मुताबिक जहाज ने युद्ध क्षेत्र से गुजरते समय बेहद सावधानी बरती। दुश्मन के रडार और निगरानी तंत्र से बचने के लिए जहाज का ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ यानी AIS अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।

AIS बंद होने के बाद जहाज ने बेहद सतर्कता के साथ ईरान के लारक द्वीप के पूर्वी हिस्से से रास्ता तय किया। यही वजह रही कि जहाज किसी भी तरह की निगरानी या हमले की चपेट में आए बिना सुरक्षित रूप से भारतीय सीमा तक पहुंच सका।

इस पूरे अभियान को सफल बनाने में भारत सरकार के कई मंत्रालयों ने अहम भूमिका निभाई। बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच लगातार समन्वय बना रहा।

सूत्रों का कहना है कि जहाज की हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही थी ताकि उसे किसी भी गोलाबारी या सैन्य कार्रवाई से दूर रखा जा सके। मार्च की शुरुआत से अब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचने वाला यह 13वां जहाज है।

बताया जा रहा है कि इस जहाज के पीछे वियतनाम के ध्वज वाला एक और टैंकर ‘एनवी सनशाइन’ भी इसी समुद्री मार्ग से भारत की ओर बढ़ रहा है। यह टैंकर न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भारत को रसोई गैस की सप्लाई में कुछ राहत मिल सकती है।

दरअसल पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारत के ऊर्जा भंडार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। देश के रणनीतिक कच्चा तेल भंडार में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक भारत का तेल भंडार 10.7 करोड़ बैरल से घटकर अब करीब 9.1 करोड़ बैरल रह गया है। यही वजह है कि केंद्र सरकार लगातार ऊर्जा बचत पर जोर दे रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से पेट्रोल और डीजल का सोच-समझकर इस्तेमाल करने और ईंधन बचाने की अपील की थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बन सकती है। फिलहाल ‘सिमी’ जहाज का सुरक्षित भारत पहुंचना सरकार और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

Soybean: प्रोसेसिंग प्लांट्स की ज़बरदस्त खरीदारी से सोयाबीन 8000 रुपये बिकी

नई दिल्ली। Soybean Price: 9-15 मई के बीते सप्ताह में सोयाबीन के सबसे ज़्यादा उत्पादन करने वाले राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में प्लांट डिलीवरी की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई।

बड़े बाज़ारों में उपज की कम आवक और क्रशर और प्रोसेसर की ज़बरदस्त खरीदारी की वजह से, सोयाबीन प्लांट डिलीवरी की कीमतों में काफ़ी उछाल आया। मध्य प्रदेश में, कीमतें ₹300-₹600 बढ़कर ₹7,100-₹7,200 प्रति क्विंटल तक पहुँच गईं।

जबकि महाराष्ट्र में, वे 700 तक उछलकर ₹7,000-₹7,500 प्रति क्विंटल के हाई पर पहुँच गईं। राजस्थान के एक खास प्लांट में, कीमतों में 800 रुपये की भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गईं।

सोया रिफाइंड तेल
लेकिन, इसके उलट, रिफाइंड सोया तेल की कीमत में सिर्फ़ ₹5-15 प्रति 10 kg की मामूली बढ़ोतरी देखी गई; इसके उलट, कुछ प्रोसेसिंग यूनिट्स में कीमतों में ₹10 प्रति 10 kg की नरमी भी देखी गई। मुंबई, कांडला और हल्दिया में, रिफाइंड सोया तेल की कीमत 10% घटकर ₹1,450 प्रति 10 kg पर आ गई, जबकि कोटा में यह ₹1,490 प्रति 10 kg के अपने पिछले लेवल पर स्थिर रही। रिफाइंड सोया तेल की घरेलू मांग अभी कमज़ोर बनी हुई है।

ग्लोबल मार्केट में सोयाबीन तेल की कीमतें भी नरम रहीं, मई डिलीवरी के लिए इंपोर्ट कीमतों में $26 प्रति टन की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अर्जेंटीना और ब्राज़ील में नई फसलों की अच्छी आवक के कारण अभी सोयाबीन की भारी पेराई चल रही है। अर्जेंटीना में, शिकागो एक्सचेंज पर सोयाबीन तेल की कीमतें मौजूदा फ्यूचर रेट से काफी नीचे आ गई हैं। भारत अपना ज़्यादातर सोया तेल इंपोर्ट अर्जेंटीना और ब्राज़ील से करता है।

11 मई को, बड़े उत्पादक राज्यों के बाज़ारों में सोयाबीन की आवक 155,000 बैग थी, जो बाद में 12 और 13 मई को घटकर 130,000 बैग रह गई। सोयाबीन के हर बैग का वज़न 100 किलोग्राम है।

सोया डीओसी
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान, महाराष्ट्र में सोया डीओसी की कीमतों में ₹4,000 से ₹8,000 प्रति टन तक की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई।

Mustard: प्रोसेसिंग यूनिट्स की मज़बूत खरीदारी से सरसों 7450 रुपये बिकी

नई दिल्ली। Mustard Price: उत्पादक राज्यों के मुख्य बाज़ारों में नॉर्मल सप्लाई लेवल के बीच, 9-15 मई के हफ़्ते में सरसों की कीमतों में आम तौर पर 100-200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी वजह क्रशिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स की तरफ़ से मज़बूत खरीदारी थी। खास तौर पर, राजस्थान के कोटा में कीमतें 400 रुपये बढ़कर 6,500-7,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गईं।

इस हफ़्ते के दौरान, दिल्ली में 42% कंडीशन वाली सरसों की कीमत 7,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रही; हालांकि, जयपुर में यह 50 बढ़कर 7,450 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई।

गुजरात के बाज़ारों में औसत क्वालिटी वाली सरसों की कीमतों में 125-250 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 200 रुपये प्रति क्विंटल और मध्य प्रदेश में 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी देखी गई। उत्तर प्रदेश में, हापुड़ में कीमतें 50 रुपये प्रति क्विंटल और आगरा में 100 प्रति क्विंटल बढ़ीं, जबकि कोलकाता में कीमतों में 100 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

राजस्थान में, जयपुर और कोटा के साथ-साथ राज्य के दूसरे बड़े बाज़ारों में सरसों की कीमतों में 100-200 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। क्योंकि इन सभी बाज़ारों में सरसों की कीमतें अभी मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) से ऊपर चल रही हैं, इसलिए सरकारी एजेंसियों को फसल खरीदने का कोई मौका नहीं मिला है।

सरसों का तेल
सरसों के बीजों की बढ़ी कीमतों की वजह से ‘एक्सपेलर’ और ‘कच्ची घानी’ सरसों तेल दोनों के रेट 2-4 प्रति किलोग्राम बढ़ गए। दिल्ली में एक्सपेलर तेल का दाम 20 रुपये बढ़कर 1,475 रुपये प्रति 10 रुपये kg हो गया, जबकि चरखी दादरी में यह 25 रुपये बढ़कर 1,465 रुपये प्रति 10 kg हो गया। वहीं, भरतपुर में कच्ची घानी सरसों तेल का दाम 30 रुपये बढ़कर 1,490 रुपये प्रति 10 kg हो गया। अराइवल

समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान, राष्ट्रीय स्तर पर सरसों की आवक 9 मई को 800,000 बैग, 11 मई को 950,000 बैग, 12 और 13 मई को 900,000 बैग, और 14 और 15 मई को 850,000 बैग (प्रत्येक बैग का वजन 50 किलोग्राम) रही।