Tuesday, July 28, 2026
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क्या हाइब्रिड एटीएम से निकलेंगे 10, 20 और 50 के नोट, जानिए कैसे

नई दिल्ली। केंद्र सरकार छोटे मूल्य के करेंसी नोटों (जैसे 10, 20 और 50 रुपये) को अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के कई तरीके तलाश रही है। यह कदम उस लगातार बनी रहने वाली कमी को दूर करने के लिए है, जिसने नोटबंदी के लगभग एक दशक बाद भी रोजमर्रा के नकद लेन-देन को प्रभावित किया हुआ है।

प्रस्तावों में एक नई तरह की मशीन शामिल है जो मांग पर 10, 20 और 50 रुपये के नोट जारी करेगी। एक ‘हाइब्रिड एटीएम’ का भी प्रस्ताव है जो बड़े नोटों को छोटे नोटों और सिक्कों में बदल सकेगा। साथ ही, केंद्रीय बैंक (RBI) पर छोटे मूल्य के नोट अधिक छापने का दबाव बनाने की योजना है।

पहले अधिकारी ने बताया कि कम मूल्य के नोट जारी करने वाली मशीन का एक प्रोटोटाइप मुंबई में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत परीक्षण के दौर से गुजर रहा है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद, इस प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की उम्मीद है। इन मशीनों को यातायात केंद्रों, बाजारों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों जैसे अधिक भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाएगा।

हाइब्रिड एटीएम कैसे काम करेगा
दूसरे अधिकारी ने समझाया कि एक हाइब्रिड एटीएम पारंपरिक एटीएम और सिक्का वेंडिंग मशीन की कार्यक्षमता को जोड़ेगा। ये मशीनें उपयोगकर्ताओं को एक ही लेन-देन में बड़े नोटों को छोटे नोटों और सिक्कों में बदलने की सुविधा देंगी। आरबीआई ने पहले ही मुंबई की एक बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में हाइब्रिड एटीएम मॉडल का परीक्षण किया है।

आंकड़े क्या कहते हैं
आरबीआई के आंकड़े दिखाते हैं कि 500 रुपये के नोट चलन में मौजूद मुद्रा की मात्रा (वॉल्यूम) के 41.2% और कुल मूल्य के 86% के लिए जिम्मेदार हैं। इसकी तुलना में, छोटे मूल्य के नोट (2, 5, 10, 20 और 50 रुपये) कुल मुद्रा की मात्रा का लगभग 38% हिस्सा बनाते हैं, लेकिन उनका कुल मूल्य में हिस्सा केवल 3.1% है। बाकी हिस्सा 100 और 200 रुपये के नोटों का है।

दुनिया के टॉप लूजर्स रईसों की लिस्ट में मुकेश अंबानी टॉपर और गौतम अडानी दूसरे पर

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नई दिल्ली। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स की ताजी सूची में भारत के सबसे रईस मुकेश अंबानी और दूसरे सबसे अमीर गौतम अडानी को बड़ा झटका लगा है। दुनिया के अरबपतियों की इस साल की टॉप लूजर्स की लिस्ट मुकेश अंबानी पहले और गौतम अडानी दूसरे स्थान पर हैं।

ब्लूमबर्ग की लिस्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी ने इस साल अब तक 15.1 अरब डॉलर गंवाए हैं। जबकि, अडानी 14.5 अरब डॉलर गंवा दिए हैं। इसके साथ ही अडानी के सिर से एशिया के दूसरे सबसे रईस का ताज भी छिन गया है।

अब इस पोजीशन पर चीन के कारोबारी झोंग शानशान आ गए हैं। अडानी 70 अरब डॉलर के साथ 25वें और अंबानी 92.6 अरब डॉलर के साथ दुनिया 19वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

2026 के टॉप लूजर्स
इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर दुनिया सातवें सबसे अमीर शख्स बर्नार्ड अर्नाल्ट हैं। इस साल अर्नाल्ट की दौलत 13.6 अरब डॉलर कम हुई है। अब इनके पास 194 अरब डॉलर की संपत्ति है।

चौथे नंबर पर लैरी एलिसन हैं। साल 2026 के इन 26 दिनों में इनकी संपत्ति 12.1 अरब डॉलर घटी है। अब इनके पास 235 अरब डॉलर की संपत्ति है। पांचवें स्थान पर बिलगेट्स हैं। इस साल इनकी संपत्ति 9.37 अरब डॉलर घटकर 108 अरब डॉलर रह गई है।

मुकेश अंबानी की दौलत में कमी की वजह उनकी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट। इस साल अबतक RIL के शेयर करीब 12 पर्सेंट टूट चुके हैं। इसका असर अंबानी की दौलत पर पड़ा, जिसका एक बड़ा हिस्सा इन शेयरों से आता है।

अडानी के नेटवर्थ में गिरावट की वजह
इसी तरह अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयर इस साल गिरे हैं। अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर शुक्रवार को 13% तक टूट गए। अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के कथित धोखाधड़ी और 26.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रिश्वत मामले में गौतम अडानी और सागर अडानी को समन जारी करने के लिए अदालत से मंजूरी मांगने की खबरों के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में गिरा

सरकारी बैंकों में आज देशव्यापी हड़ताल, लोगों के रोजमर्रा के काम पर होगा असर

नई दिल्ली। देश भर के सरकारी बैंकों में मंगलवार को कामकाज ठप होने वाला है। बैंक यूनियनों का बड़ा संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 27 जनवरी को पूरे देश में हड़ताल का ऐलान कर दिया है। वजह है पांच दिन के कामकाज की मांग को तुरंत लागू करवाना। ये यूनियन नौ अलग-अलग संगठनों का गठबंधन है, जिसमें अफसरों और कर्मचारियों के लाखों लोग शामिल हैं।

पिछले हफ्ते 23 जनवरी को चीफ लेबर कमिश्नर के साथ सुलह की मीटिंग हुई थी, लेकिन वहां कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। इसी वजह से यूनियनों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया। ग्राहकों को कैश निकालने, जमा करने, चेक क्लियर करने और दूसरे कामों में दिक्कत आएगी।

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयी एसोसिएशन (AIBEA) के जनरल सेक्रेटरी सी एच वेंकटचलम ने बताया कि मीटिंग में काफी बात हुई, लेकिन हमारी मांग पर कोई पक्का वादा नहीं मिला। इसलिए मजबूरन ये कदम उठाना पड़ रहा है।

यूनियनों की मुख्य मांग है कि सभी शनिवार को छुट्टी घोषित की जाए। अभी बैंक पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को खुले रहते हैं। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के जनरल सेक्रेटरी रूपम रॉय ने कहा कि मार्च 2024 में इंडियन बैंक एसोसिएशन के साथ वेतन बढ़ोतरी के समझौते में इस पर सहमति हो गई थी। लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई अधिसूचना नहीं आई। उन्होंने ये भी जोड़ा कि अगर पांच दिन काम होगा तो सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट ज्यादा काम करने को तैयार हैं, ताकि कुल घंटे कम न हों।

नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉयी (NCBE) के जनरल सेक्रेटरी एल चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि ये हड़ताल ग्राहकों के खिलाफ नहीं है। बल्कि ये एक बेहतर, इंसानियत वाली और कुशल बैंकिंग सिस्टम के लिए है।

उन्होंने कहा कि आराम करने वाला बैंककर्मी देश की बेहतर सेवा करता है। बैलेंस्ड वर्कफोर्स से फाइनेंशियल स्थिरता मजबूत होती है। पांच दिन का बैंकिंग कोई लग्जरी नहीं, बल्कि आर्थिक और इंसानी जरूरत है।

ये हड़ताल खासतौर पर पब्लिक सेक्टर बैंकों को प्रभावित करेगी, जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा। इन बैंकों की ब्रांचों पर सामान्य कामकाज रुक सकता है। हालांकि, बड़े प्राइवेट बैंकों जैसे HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनके कर्मचारी इन यूनियनों में शामिल नहीं हैं।

UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप पर कोई असर नहीं
डिजिटल सेवाएं जैसे UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप चलते रहेंगे। लेकिन ATM में कैश की उपलब्धता पर लोकल स्तर पर समस्या हो सकती है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स में देरी आएगी। कई सरकारी बैंकों ने स्टॉक एक्सचेंज को इस बारे में सूचना दे दी है। SBI ने शुक्रवार को एक फाइलिंग में कहा कि हमने ब्रांचों और ऑफिसों में सामान्य कामकाज के लिए इंतजाम किए हैं, लेकिन हड़ताल से काम प्रभावित हो सकता है।

भारत की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर भड़का अमेरिका, जानिए इसके पीछे की वजह

वॉशिंगटन। India-EU Trade Deal: अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत का साथ देने के लिए यूरोप पर गुस्सा निकाला है। उन्होंने कहा कि भारत पर रूसी तेल को लेकर अमेरिका ने टैरिफ लगाए लेकिन इस कदम में यूरोपीय देशों ने उनका साथ नहीं दिया।

बेसेंट का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत में हैं। वह गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। उनके दौरे में भारत और यूरोपीय यूनियन का बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होना है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का नाम मिला है।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर हुए सवाल के जवाब में कहा कि अमेरिका ने यूरोपियनों के मुकाबले ज्यादा कुर्बानियां दी हैं। हमने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25% टैरिफ लगाया। ऐसा किया गया ताकि रूस को यूक्रेन के लिए मिल रहे फंड को कम किया जा सके लेकिन यूरोप ने हमारा साथ नहीं दिया।

बेसेंट ने आगे कहा, ‘हमने भारत पर टैरिफ लगाए लेकिन देखिए यूरोप ने क्या किया। यूरोपियन तो भारत के साथ एक ट्रेड डील साइन कर रहे हैं। रूसी तेल खरीदकर भारत रिफाइंड प्रोडक्ट बनाता है, जिसे यूरोपियन खरीदते हैं। हम कह सकते हैं कि रूस की मदद करते यूरोप के देश यूक्रेन और अपने खिलाफ ही युद्ध को फाइनेंस कर रहे हैं।’

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि अमेरिका के कहने के बावजूद यूरोपीय देशों ने भारत पर टैरिफ लगाने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि हमारे यूरोपीय सहयोगियों ने रूस से एनर्जी खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाने से कदम पीछे खींचे। एक बड़ी ट्रेड डील करने के लिए उन्होंने ऐसा किया।

मदर ऑफ ऑल डील्स क्या है
भारत और यूरोपीय यूनियन का बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 27 जनवरी को नई दिल्ली में होना है। करीब 20 साल की बातचीत के बाद यह समझौता 200 करोड़ से अधिक लोगों के लिए एक एकीकृत बाजार बनाएगा। ऐसे इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह दुनिया की एक बड़ी आबादी को प्रभावित करेगी।

भारत और यूरोपीय यूनियन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई लेकिन 2013 में वार्ता को रोक दिया गया। इसके 9 साल बाद 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई। इस उतार-चढ़ाव के बाद अब 2026 में दोनों पक्ष इस एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने जा रहे हैं। भारत और यूरोप इससे खुश हैं तो अमेरिका नाराज दिख रहा है।

भारत के हमले के डर से पाकिस्तानी सेना का प्लेन मिसाइल लेने चीन पहुंचा

बीजिंग। पाकिस्तान की एयरफोर्स के Il-78 हवाई रिफ्यूलिंग विमानों के चीन की यात्रा करने की बात सामने आई है। ये विमान चीन के सिचुआन प्रांत के एक एयरबेस पर उतरे। पाक एयरफोर्स इन विमानों में से दो को चीन में एयरफील्ड से उड़ान भरने से पहले एप्रन पर खड़े देखे गया।

माना जा रहा है कि ये एयरक्राफ्ट मिसाइल और दूसरे हथियार लेने चीन गए थे। पाकिस्तान की हथियारों के लिए इस हड़बड़ी के पीछे सेना प्रमुख असीम मुनीर को माना जा रहा है। मुनीर को डर है कि भारत की ओर से एक बार फिर सैन्य हमला (ऑपरेशन सिंदूर 2.0) हो सकता है।

मिलिट्री वॉच मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस बात की पुष्टि हुई है कि 19-20 जनवरी को पाकिस्तानएयरफोर्स के कई Il-78 हवाई रिफ्यूलिंग विमान चीन के सिचुआन प्रांत के एयरबेस पर उतरे थे। इनको कथित तौर पर पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के लिए सप्लाई लेने भेजा गया था।पाकिस्तान के लिए चीन हथियारों का बड़ा सप्लायर है।

पाकिस्तानी विमानों की चीन यात्रा और उनका कम समय रुकना खास लॉजिस्टिक्स लाने की ओर इशारा करता है। पाकिस्तान का Il-78 सोवियत Il-76 स्ट्रेटेजिक एयरलिफ्टर का एक करीबी वेरिएंट है।

ये विमान पाकिस्तान एयरफोर्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह सर्विस पूरी तरह से कम रेंज वाले हल्के सिंगल इंजन फाइटर जेट पर निर्भर है क्योंकि हवाई रिफ्यूलिंग उन्हें लंबी दूरी के ऑपरेशन करने की अनुमति देती है।

सिचुआन प्रांत में चीनी एयरफोर्स के कई महत्वपूर्ण इंस्टॉलेशन हैं। यहां J-10C फाइटर जेट के प्रोडक्शन फैसिलिटी भी हैं, जिन्हें पाकिस्तान अपने कॉम्बैट फ्लीट के एलीट हिस्से के लिए खरीदता रहा है।

चीनी ऑब्जर्वर ने अनुमान लगाया है कि पाकिस्तैानी कार्गो में J-10C फाइटर जेट के लिए PL-15 लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें या फिर YJ-21 हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हो सकती हैं।

पाकिस्तान को सता रहा भारत का डर
चीनकी यह मिसाइलें और J-10C फ्लीट कथित तौर पर भारत के ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पाकिस्तानी सेना का हिस्सा थे। अब इनकी एक और खेप पाकिस्तान में इस विमान के जरिए पहुंचने की बात कसामने आ रही है। यह सीधेतौर पर असीम मुनीर के भारत के हमले के डर से तैयारी तेज करने का संकेत देता है। चीन से J-35 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट खरीदने पर भी पाकिस्तान विचार कर रहा है।

यूजीसी के नए रूल में ऐसा क्या है जिसका हो रहा है जमकर विरोध, जानिए

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 जारी किए हैं। इनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में वंचित समूहों की शिकायतों के निवारण और सहायता के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार करना है।

यह याचिका रोहित वेमुला और पायल ताडवी की माताओं द्वारा दायर की गई थी। हालांकि, इसे लेकर अगड़ी जातियों में काफी आक्रोश फैल गया है। इस यूनिवर्सिटी कैंपस और कॉलजों का माहौज जहरीला करने वाला बताया जा रहा है।

समान अवसर केंद्र में कौन-कौन होगा शामिल
संस्थान के प्रमुख द्वारा गठित समान अवसर केंद्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी) और महिलाओं के प्रतिनिधि होंगे। यूजीसी के नए नियमों के तहत, यह केंद्र समानता से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन, वंचित समूहों को शैक्षणिक और वित्तीय मार्गदर्शन प्रदान करने और अधिकारियों और नागरिक समाज के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होगा। अब पिछड़ी जातियों के छात्र, कर्मचारी और टीचर भी अपने साथ होने होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायत समान अवसर केंद्र में कर सकेंगे।

सोशल मीडिया पर जमकर हो रही जुबानी जंग
इसी बीच, यूजीसी के नए नियमों ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है, जिसमें यूजीसी के नियमों में ‘जाति-आधारित भेदभाव’ शब्द की परिभाषा को लेकर आक्रोश जताया जा रहा है। यूजीसी के नियमों में कहा गया है- जाति-आधारित भेदभाव का अर्थ है अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति या जनजाति के आधार पर किया जाने वाला भेदभाव।

माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर इस वक्त सबसे पॉपुलर ट्रेंड्स में से एक #ShameonUGC बना हुआ है, क्योंकि नेटिजन्स यूजीसी के नए नियमों की आलोचना कर रहे हैं और उन्हें सामान्य वर्ग के कानूनों के विरुद्ध बता रहे हैं।

क्या बिना आरक्षण वाले परिवारों में पैदा होना गुनाह है
एक्स पर एक यजूर ने कहा-यूजीसी के नए ‘समानता’ नियम 2026 बेशर्मी से सामान्य वर्ग के छात्रों को परिसरों में हिंसा का दोषी ठहराते हैं। केवल इसलिए कि वे गैर-आरक्षित परिवारों में पैदा हुए हैं! समानता समितियां हमारे विरुद्ध हैं, झूठे दावों से कोई सुरक्षा नहीं है, और कॉलेज परिसर जातिगत युद्धक्षेत्र बनते जा रहे हैं।

क्या है यूजीसी का नया नियम, जिसका हो रहा विरोध
यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान को एक समान अवसर केंद्र स्थापित करना होगा और उसे नागरिक समाज समूहों, जिला प्रशासन, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, स्थानीय मीडिया और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। यह केंद्र कानूनी सहायता की सुविधा प्रदान करने के लिए जिला और राज्य विधि सेवा प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। इसी बात का अगड़ा समाज विरोध कर रहा है। वहीं, पिछड़ा समाज में इस बात को लेकर खुशी है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

भारत वैश्विक स्थिरता का आधार स्तंभ, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष बोली

नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस की मुख्य अतिथि और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत को वैश्विक स्थिरता का स्तंभ बताते हुए कहा है कि “भारत की सफलता ही दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है।”

उनका यह बयान भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने जा रहे बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से ठीक पहले आया है, जिसे “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” कहा जा रहा है।

तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आईं वॉन डेर लेयेन ने आज भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी इस भव्य आयोजन में शामिल हुए।

वॉन डेर लेयेन ने इसे अपने जीवन का “सबसे बड़ा सम्मान” बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर लिखा, “गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होना जीवन भर का सम्मान है। एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है और इसका लाभ हम सभी को मिलता है।”

‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ की दहलीज पर भारत-EU
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते के समापन की घोषणा कर सकते हैं। यदि यह समझौता होता है, तो यह करीब 2 अरब लोगों का साझा बाजार बनाएगा, जो वैश्विक GDP का लगभग 25 प्रतिशत होगा। इससे पहले दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) में वॉन डेर लेयेन ने कहा था कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब हैं, जो यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते आर्थिक क्षेत्रों में पहली बढ़त (First-Mover Advantage) दिलाएगा।

कारों पर टैरिफ घटाने की तैयारी
इस समझौते के तहत भारत, यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों पर 110 प्रतिशत तक लगने वाले भारी शुल्क को घटाकर 40 प्रतिशत करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली सीमित संख्या में कारों पर टैक्स तुरंत कम किया जाएगा और भविष्य में इसे 10 प्रतिशत तक लाने की संभावना है। इससे वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी यूरोपीय ऑटो कंपनियों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे और भी खुल जाएंगे।

पीएम मोदी ने जब कर्तव्य पथ पर प्रोटोकॉल को दरकिनार कर दिया, जानिए क्यों

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रोटोकॉल से हटकर लोगों से मिलने की अपनी परंपरा निभाई है। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी प्रोटोकॉल से अलग हटकर कर्तव्य पथ पर काफी दूर तक पैदल चले।

यहां इस दौरान उन्होंने दर्शक दीर्घाओं में बैठे उत्साही लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। वहीं, इस तरह प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर यहां बैठे लोग भी काफी उत्साही दिखाई दिए। हाथों में तिरंगा लिए लोगों ने ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।

पीएम मोदी को देखने के लिए कई बच्चे कुर्सियों पर चढ़कर मुस्कुराते हुए प्रधानमंत्री की एक झलक पाने को आतुर दिखे। प्रधानमंत्री ने भी इस दौरान हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।

इस पर यहां मौजूद लोगों ने तालियों और जयघोष से उनका स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री अपनी कार में सवार हुए और कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते हुए लोगों को हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस दौरान दर्शक दीर्घा में मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए।

प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ के दूसरे हिस्से में भी जाकर लोगों से मुलाकात की, जहां उत्साहित नागरिकों ने इस ऐतिहासिक पल को अपने कैमरों में भी कैद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर पारंपरिक लाल रंग की पगड़ी पहनी थी, जिस पर सुनहरे रंग की आकृति वाली छाप बनी थी। गणतंत्र दिवस पर विशिष्ट पगड़ी पहनना प्रधानमंत्री की एक पहचान बन चुकी है।

राजस्थानी पगड़ी में नजर आए पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस पर लाल और सुनहरे-पीले रंग की राजस्थानी शैली की पगड़ी पहनकर सभी का ध्यान आकर्षित किया। यह पगड़ी, जो रेशम और जरी के काम से सजी थी, अवसर की भव्यता को दर्शा रही थी। यह राजस्थानी परंपरा का एक सुंदर नॉड था।

प्रधानमंत्री ने गहरे नीले और सफेद रंग के कुर्ता-पायजामा के साथ एक हल्के नीले रंग की नेहरू जैकेट पहनी थी, जो उनके पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप का एक अनूठा मिश्रण था। यह पगड़ी कर्तव्य पथ पर उत्सव के माहौल को और भी बढ़ा रही थी, जहां लोग परेड और विभिन्न राज्यों की झांकियों का आनंद ले रहे थे।

जनता से सीधे संवाद करते रहे हैं पीएम
प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2015 से लगातार गणतंत्र दिवस के बाद प्रोटोकॉल तोड़कर आम जनता से सीधे संवाद करते आ रहे हैं। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से हुई। यहां उन्होंने माल्यार्पण करके अपने प्राण न्योछावर करने वाले राष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि दी।

इस बार की परेड में क्या रहा खास
कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली। परंपरा के अनुसार कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। यह देश में बना तोपखाना हथियार सिस्टम है।

21 तोपों की सलामी, टैंक, मिसाइल सिस्टम का प्रदर्शन
वहीं पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि अब बीते कुछ समय से 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी 21 तोपों की सलामी दे रही है। परेड में सेना की जबरदस्त मारक क्षमता का परिचय भी मिला। यहां टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक प्रदर्शित किए गए। बीएमपी-2 सारथ और मिसाइल सिस्टम, ध्रुव, रुद्र, अपाचे और प्रचंड हेलीकॉप्टर, आकाश, एमआरएसएएम और ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम भी गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बने हैं।

5 दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर बैंकों में आज देशव्यापी हड़ताल

कोटा जिले की 300 शाखाओं के दो हजार अधिकारी एवं कर्मचारी होंगे शामिल

कोटा। Nationwide bank strike: बैंकिंग सेक्टर में कार्यरत सभी बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर 27 जनवरी यानी मंगलवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आव्हान किया है।

संयोजक पदम कुमार पाटोदी ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से उठाई गई मांग पर गत 7 दिसंबर 2023 को हुए समझौते और उसके बात 8 मार्च 2024 को जॉइंट नोट जारी होने की सहमति आईबीए ने सरकार को भेजने बाद भी लगभग 2 वर्ष गुजरने जाने पर भी सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय नहीं लिया।

इसलिए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस द्वारा यह कदम उठाना पड़ रहा है। जबकि पांच दिवसीय बैंक कार्य के बदले यूनियन ने प्रतिदिन 40 मिनट ज्यादा काम करने की सहमति भी दी है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस द्वारा बैंकों में 5 दिवसीय बैंक कार्य की मांग से पूर्व आरबीआई, एलआईसी, डीएफएस, सीवीसी, सेबी, बीएसई, एनएसई, एनपीसीआई,आईआरडीएआई, मिनिस्ट्री, राज्य सरकार, नाबार्ड में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह है।

इस हड़ताल में कोटा जिले की लगभग 300 शाखाओं के दो हजार अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेंगे। जिसमें सारा नगदी लेन-देन, एक खाते से दूसरी खाता में अंतरण, क्लियरिंग, RTGS, ऋण एवं अन्य कार्य पूरी तरह से बंद रहेगा।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस कोटा के संयोजक पदम कुमार पाटोदी तथा विभिन्न बैंक कर्मचारी नेताओं एआईबीईए के ललित गुप्ता, हेमराज सिंह गौड़, अमित पंचोली, डीएस साहू, आरबी मालव, अनिल ऐरन, करनैल सिंह, शहाबुद्दीन, आइबोक के सुहावर्धन सक्सेना, लोकेश सोनी, अरविंद मीणा, दानिश इमरान हाशमी, ब्रिज मोहन सेन, अभिषेक सक्सेना, एनसीबीई के रमेश सिंह, मोहम्मद शाहिद, इनबॉक के नितेश मीणा, गौरव परिहार, एनओबीडब्लू के नरेंद्र सिंहल, ग्रामीण बैंक कर्मचारी नेता, ब्रजेश काला एवं पंकज जैन ने एक विज्ञप्ति जारी कर सभी बैंक कर्मी एवं अधिकारियों से हड़ताल को सफल बनाने का आव्हान किया है।

हड़ताल के दिन प्रातः 10 बजे से बैंक ऑफ बड़ौदा कोटडी पेट्रोल पंप के सामने स्थित शाखा के सामने प्रदर्शन होगा .उसके बाद वहां से एक रैली रवाना होकर छावनी चौराहा पहुंच कर वापस बैंक ऑफ बड़ौदा झालावाड़ रोड शाखा पर समाप्त होगी।

सोने के दाम पहली बार 5000 डॉलर प्रति ओंस के पार, चांदी भी नए स्तर पर

नई दिल्ली। Gold Price Today: सोने की कीमत पहली बार 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से भी ऊपर पहुंच गई है। यह तेज रैली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के पुनर्गठन और निवेशकों का सरकारी बॉन्ड व मुद्राओं से पलायन जैसे कारकों से बढ़ावा पा रही है।

भू-राजनीतिक जोखिम और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने सोने की मांग को और मजबूत किया है। डॉलर इंडेक्स मई के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट पर रहा, जिससे ज्यादातर खरीदारों के लिए कीमती धातु सस्ती हुई। चांदी भी पिछले सत्र में 100 डॉलर प्रति औंस पार करने के बाद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

पिछले दो वर्षों में दोगुने से अधिक के अपने नाटकीय उछाल के साथ, सोना बाजारों में भय के ऐतिहासिक पैमाने के रूप में अपनी भूमिका को रेखांकित कर रहा है। 1979 के बाद से अपने सर्वश्रेष्ठ सालाना प्रदर्शन के बाद, इसने इस साल अब तक 15% से अधिक की बढ़त दर्ज की है।

यह काफी हद तक तथाकथित ‘मुद्रा अवमूल्यन’ (डिबेसमेंट) व्यापार के कारण है, जिसमें निवेशक मुद्राओं और ट्रेजरी बॉन्ड से पीछे हट रहे हैं। जापानी बॉन्ड बाजार में पिछले हफ्ते भारी बिकवाली निवेशकों द्वारा भारी राजकोषीय खर्च को अस्वीकार करने का नवीनतम उदाहरण है।

हाल के हफ्तों में, ट्रंप प्रशासन की कार्रवाइयों जैसे, फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर हमले, ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियां, वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप ने भी बाजारों को डरा दिया है। इस अनिश्चितता से निपटने के इच्छुक निवेशकों के लिए, सोने की सुरक्षित पनाहगार अपील शायद ही कभी इतनी आकर्षक रही हो।

भू-राजनीति से परे, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते सार्वजनिक कर्ज सोने की तेजी का एक और प्रमुख स्तंभ बन गए हैं। कुछ लॉन्ग टर्म निवेशक, जो मानते हैं कि मुद्रास्फीति राज्य की शोधनक्षमता का एकमात्र रास्ता बन जाएगी, क्रय शक्ति को बनाए रखने के तरीके के रूप में सोने में पूंजी लगा रहे हैं।

यह मुद्रा अवमूल्यन व्यापार 2025 के अंत में अपने चरम पर पहुंच गया था, जब सिटाडेल सिक्योरिटीज के सीईओ केन ग्रिफिन और ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो जैसे प्रमुख निवेशकों ने सोने के उछाल को एक चेतावनी संकेत के रूप में इंगित किया था।

निवेशक अब ट्रंप की फेड चेयरमैन के लिए पसंद का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि उन्होंने उम्मीदवारों के साक्षात्कार पूरे कर लिए हैं और इस पद के लिए उनके दिमाग में कोई व्यक्ति है।

लगातार तीन बार दरों में कटौती के बाद, एक और कबूतर जैसी (डोविश) रुख रखने वाले चेयरमैन इस साल और दरों में कटौती की संभावना को बढ़ाएंगे, जो ब्याज न देने वाली सोने की बुलियन के लिए सकारात्मक है।

आज का भाव
ब्लूमबर्ग के मुताबिक सिंगापुर में सुबह 8:12 बजे तक, सोना 1% बढ़कर 5,035.25 डॉलर प्रति औंस हो गया। चांदी 2.2% चढ़कर 105.50 डॉलर पर पहुंच गई। प्लेटिनम रिकॉर्ड हाई को छूने के बाद मामूली नीचे आया, जबकि पैलेडियम में बढ़त रही। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स पिछले हफ्ते 1.6% गिरावट के बाद 0.2% नीचे था।