Saturday, July 11, 2026
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पुणे–हजरत निज़ामुद्दीन–पुणे ग्रीष्मकालीन विशेष एक्सप्रेस का संचालन 17 अप्रैल से

कोटा। यात्रियों की ग्रीष्मकालीन अवकाश में बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन द्वारा पुणे–हजरत निज़ामुद्दीन–पुणे के मध्य ग्रीष्मकालीन विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया जा रहा है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि गाड़ी संख्या 01491 (पुणे–हजरत निज़ामुद्दीन) 17 अप्रैल से 10 जुलाई तक प्रत्येक शुक्रवार को 12 फेरों में पुणे से सायं 17.30 बजे प्रस्थान कर अगले दिन शनिवार सुबह शामगढ़ 08.53 बजे, भवानी मंडी 09.13 बजे, रामगंज मंडी 09.41 बजे, कोटा जंक्शन 10.40 बजे, सवाई माधोपुर 12.03 बजे, गंगापुर सिटी जंक्शन 12.45 बजे, भरतपुर 14.33 बजे होते हुए उसी दिन सायं 18.30 बजे हजरत निज़ामुद्दीन पहुँचेगी।

इसी प्रकार गाड़ी संख्या 01492 (हजरत निज़ामुद्दीन–पुणे) 18 अप्रैल से 11 जुलाई तक प्रत्येक शनिवार को 12 फेरों में हजरत निज़ामुद्दीन से 21.25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन रविवार को भरतपुर 01.33 बजे ,गंगापुर सिटी जंक्शन रात्रि 02.48 बजे, सवाई माधोपुर 04.03 बजे, कोटा जंक्शन 05.40 बजे, रामगंज मंडी 06.38 बजे, भवानी मंडी 07.03 बजे, शामगढ़ 07.28 बजे होते हुए उसी दिन रात्रि 23.55 बजे पुणे पहुँचेगी।

यह गाड़ी रास्ते में दोनों दिशाओं में पुणे जंक्शन, लोनावला, कल्याण जंक्शन, भिवंडी रोड, वसई रोड, वापी, सूरत, वडोदरा जंक्शन, रतलाम जंक्शन, शामगढ़, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, कोटा जंक्शन, सवाई माधोपुर जंक्शन, गंगापुर सिटी जंक्शन, भरतपुर जंक्शन, मथुरा जंक्शन तथा हजरत निज़ामुद्दीन जंक्शन स्टेशनों पर ठहराव लेकर गंतव्य को जाएगी।

आगरा कैंट–असारवा स्पेशल सप्ताह में 5 दिन चलेगी
गाड़ी संख्या 01919/01920 आगरा कैंट–असारवा स्पेशल को अब गाड़ी संख्या 20178/20177 आगरा कैंट–असारवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस के रूप में नियमित कर दिया गया है। यह गाड़ी 8 अप्रैल 2026 से आगरा कैंट से तथा 9 अप्रैल 2026 से असारवा से सप्ताह में 5 दिन नियमित रूप से चलेगी।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक बताया कि गाड़ी संख्या 20178 आगरा कैंट–असारवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस आगरा कैंट से प्रतिदिन सोमवार एवं मंगलवार को छोड़कर 18:45 बजे प्रस्थान करेगी। कोटा मंडल के स्टेशनों पर यह गाड़ी गंगापुर सिटी पर 21:05 बजे, सवाई माधोपुर पर 21:48 बजे, केशोराई पाटन पर 23:15 बजे, अगले दिन बूंदी पर 00:08 बजे, मंडलगढ़ पर 01:38 बजे तथा चंदेरिया पर 03:05 बजे ठहराव लेते हुए असारवा जंक्शन पर उसी दिन 11:00 बजे पहुँचेगी।

वापसी में गाड़ी संख्या 20177 असारवा–आगरा कैंट सुपरफास्ट एक्सप्रेस असारवा जंक्शन से प्रतिदिन मंगलवार एवं बुधवार को छोड़कर 15:00 बजे प्रस्थान करेगी। कोटा मंडल में चंदेरिया पर 22:40 बजे, मंडलगढ़ पर 23:28 बजे, अगले दिन बूंदी पर 00:23 बजे, केशोराई पाटन पर 01:10 बजे, सवाई माधोपुर पर 02:30 बजे तथा गंगापुर सिटी पर 03:20 बजे ठहराव लेते हुए आगरा कैंट 07:15 बजे पहुँचेगी।

सेंसेक्स 2946 अंक चढ़कर 77563 पर बंद, निवेशकों को 15 लाख करोड़ का फायदा

नई दिल्ली। Stock Market Closed: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का एलान दुनिया के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के लिए भी राहत लेकर आया। बुधवार को घरेलू बेंचमार्क सूचकांक लंबी छलांग लगाकर बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स में 2,946.32 अंक यानी 3.95 फीसदी तेजी के साथ 77,562.90 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 873.70 अंक यानी 3.78% उछलकर 23,997.35 पर पहुंच गया। इस तेजी से बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 15 लाख करोड़ रुपये की तेजी के साथ 444 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। 

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त लेकर 77,290 पर खुला। जबकि मंगलवार को यह 74,616 अंक पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान यह 77,635 अंक तक चढ़ गया था। अंत में यह 2946.32 अंक या 3.95 प्रतिशत की जोरदार तेजी के साथ 77,562.90 पर बंद हुआ।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (निफ़्टी-50) भी बड़े उछाल के साथ 23,855 अंक पर खुला। एक दिन पहले यह 23,121 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान यह 24,025 अंक के हाई तक गया। अंत में 873.70 अंक या 3.78 फीसदी की जोरदार तेजी लेकर 23,997.35 पर बंद हुआ।

टॉप गेनर्स एंड लूजर्स
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 तेजी के साथ खुले। इंडिगो के शेयरों में सबसे ज्यादा 9 फीसदी तेजी आई है। एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, अल्ट्रा सीमेंट, बजाज फिनसर्व, टाइटन प्रमुख रूप से लाभ में रहे। दूसरी तरफ, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, पावर ग्रिड के शेयर गिरावट में बंद हुए।

ब्रोडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 4.03 प्रतिशत और 4.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टर के हिसाब से निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, निफ्टी आईटी सबसे कम बढ़त के साथ पिछड़ता नजर आया।

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा से दुनिया भर के शेयर बाजारों ने राहत की सांस ली। इसका असर भारतीय शेयर बाजार में भी दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट और रुपये में मजबूती का निवेशकों के रुख पर पॉजिटिव असर पड़ा। इसके अलावा इंडेक्स हैवी एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में तेजी से भी बाजार को सपोर्ट मिला।

50MP OIS कैमरे वाला सैमसंग का यह वाटरप्रूफ फोन 4000 रुपये सस्ता हुआ

नई दिल्ली। Samsung Galaxy A35 5G: AI फीचर्स से लैस Samsung Galaxy A35 5G फोन में 50MP का OIS कैमरा दिया गया है, जिससे फोटो और वीडियो काफी स्टेबल और क्लियर आते हैं। यानी शूट करते समय हाथ थोड़ा हिल भी जाए, तब भी फोटो धुंधली नहीं होती।

इसके अलावा इसमें Google का पॉपुलर Circle to Search फीचर भी मिलता है, जिससे आप स्क्रीन पर किसी भी चीज को घेरकर तुरंत सर्च कर सकते हैं। जानिये कैसे आप इस डील का फायदा उठा सकते हैं:

जबरदस्त ऑफर
अभी इस फोन पर ई-कॉमर्स साइट Amazon पर जबरदस्त ऑफर चल रहा है। लॉन्च के समय इसका 128GB वेरिएंट 30,999 रुपए था, लेकिन फिलहाल यह करीब 26,990 रुपए में मिल रहा है। यानी सीधे 4,009 रुपए तक की बचत हो रही है। अच्छी बात यह है कि यह डिस्काउंट बिना किसी खास शर्त के मिल रहा है। अगर आप Amazon Pay से पेमेंट करते हैं, तो आपको करीब 809 रुपए का कैशबैक भी मिल सकता है, जिससे कीमत और कम हो जाएगी।

अगर आपके पास पुराना फोन है और उसे एक्सचेंज करना चाहते हैं तो पुराने फोन पर आपको 15,000 तक की अतिरिक्त छूट भी मिल सकती है। लेकिन ध्यान रहे कि एक्सचेंज छूट पूरी तरह आपके पुराने पर निर्भर है। यह डील उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो कम कीमत में एक भरोसेमंद 5G फोन लेना चाहते हैं।

स्पेसिफिकेशन

  • डिस्प्ले: Samsung Galaxy A35 5G में 6.6 इंच का FHD+ Super AMOLED डिस्प्ले दिया गया है।
  • प्रोसेसर : यह फोन Exynos 1380 प्रोसेसर पर चलता है, जिससे रोजमर्रा के काम और मल्टीटास्किंग स्मूद तरीके से हो जाते हैं।
  • कैमरा सेटअप: इसमें ट्रिपल रियर कैमरा मिलता है, जिसमें 50MP का मेन कैमरा OIS सपोर्ट के साथ आता है। इसके अलावा 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 5MP का मैक्रो कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 13MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है, जो अच्छी क्वालिटी की फोटो देता है।
  • बैटरी: इसमें 5000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। साथ ही यह 25W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है, जिससे फोन जल्दी चार्ज हो जाता है।
  • प्रोसेसर : सिक्योरिटी और बिल्ड क्वालिटी की बात करें तो इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है। साथ ही IP67 रेटिंग मिलती है, जिससे यह फोन धूल और हल्के पानी से सुरक्षित रहता है। इसके अलावा फोन के फ्रंट और बैक दोनों साइड पर Gorilla Glass Victus+ प्रोटेक्शन दिया गया है, जो इसे गिरने और खरोंच से बचाता है।

वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी 6.9% ग्रोथ और महंगाई 4.6% रहने का अनुमान: रिजर्व बैंक

नई दिल्ली। RBI MPC 2026: रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने बुधवार को अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर के मुताबिक, 2025-26 में यह दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, यानी नए वित्त वर्ष में ग्रोथ थोड़ी नरम रह सकती है।

तिमाही आधार पर ग्रोथ का अनुमान
केंद्रीय बैंक के अनुसार FY27 में ग्रोथ का ट्रेंड धीरे-धीरे मजबूत होगा

  • Q1 में 6.8 प्रतिशत
  • Q2 में 6.7 प्रतिशत
  • Q3 में 7 प्रतिशत
  • Q4 में 7.2 प्रतिशत

महंगाई का अनुमान 4.6%
RBI ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। गवर्नर ने कहा कि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है और लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, लेकिन आगे जोखिम बढ़े हैं।

तिमाही आधार पर महंगाई का अनुमान

  • Q1 में 4 प्रतिशत
  • Q2 में 4.4 प्रतिशत
  • Q3 में 5.2 प्रतिशत
  • Q4 में 4.7 प्रतिशत

महंगाई पर बढ़ते जोखिम

  • RBI गवर्नर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ऊर्जा लागत का दबाव और मौसम से जुड़े जोखिम खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
  • मौद्रिक नीति के तहत RBI ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है। यानी आगे जरूरत के हिसाब से ब्याज दरों में बदलाव की गुंजाइश बनी रहेगी।
  • गौरतलब है कि फरवरी 2025 से अब तक RBI कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है। इस बार भी बाजार की उम्मीदों के अनुरूप दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत
RBI का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और आगे भी आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।

MPC: रीपो रेट में आरबीआई ने नहीं किया बदलाव, ब्याज दर 5.25% पर बरकरार

नई दिल्ली। आरबीआई ने एक बार फिर नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा गया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए आज यह घोषणा की। इस फाइनेंशियल ईयर में एमपीसी की यह पहली बैठक थी।

साथ ही ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह आरबीआई की एमपीसी की पहली मीटिंग थी। मौद्रिक नीति समिति ने ‘तटस्थ’ रुख कायम रखने का फैसला किया। आरबीआई ने फरवरी में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। इससे पहले 2025 में इसमें कुल मिलाकर 125 आधार अंक की कटौती की गई थी।

अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि आरबीआई रेपो रेट को यथावत रख सकता है। लेकिन माना जा रहा था कि पश्चिम एशिया में सीजफायर से आरबीआई गवर्नर रेट कट की चौंकाने वाली घोषणा कर सकते हैं। मगर आरबीआई की एमपीसी ने इसे यथावत रखने का फैसला किया।

जीडीपी ग्रोथ अनुमान
आरबीआई गवर्नर ने चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, लेकिन कई अन्य देशों की तुलना में भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। अर्थव्यवस्था की दिशा बताने वाले प्रमुख आंकड़ों से पता चलता है कि आर्थिक गतिविधियों की स्थिति बेहतर है।

फाइनेंशियल ईयर 2027 में रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है। दूसरी तिमाही में यह 6.8 फीसदी और तीसरी तिमाही में 6.7 फीसदी रह सकती है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में इसके 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है।

काबू में महंगाई
मल्होत्रा ने कहा कि हेडलाइन काबू में है और सेंट्रल बैंक के 4 फीसदी के टारगेट से नीचे है। इस फाइनेंशियल ईयर में महंगाई के 4.6 फीसदी रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में यह 4 फीसदी, दूसरी तिमाही में 4.4 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.2 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.7 फीसदी रह सकती है। ऊर्जा कीमतों में हालिया उछाल मुद्रास्फीति के लिए एक जोखिम के रूप में उभरा है। निकट भविष्य में खाद्य कीमतों का परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है।

हर राज्य का कृषि रोडमैप बनाने के लिए रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस व्यवस्था शुरू: चौहान

जयपुर। अब पूरे देश को विभिन्न एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बाँटकर हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनाया जाएगा। सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़कर खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा वितरण की पूरी प्रणाली को पारदर्शी और लक्षित किया जाएगा।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के अंतर्गत 2024–25 में 429.89 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन और उत्पादकता में हुई बढ़ोतरी को और आगे बढ़ाते हुए तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से 33 मिलियन हेक्टेयर और उत्पादन 39.2 मिलियन टन से 69.7 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।

जबकि दलहन मिशन के तहत बीज उत्पादन, दाल मिलों की स्थापना, नई बीज किस्मों को सीड चेन में लाने तथा इच्छुक किसानों से 100 प्रतिशत खरीद के माध्यम से देश को दालों में भी मजबूत आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जाएगा। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को जयपुर में आयोजित रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह देश की पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस है, जिसमें ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, FPOs, नेफेड, NCCF और बीज से लेकर बाजार तक काम करने वाली सभी संस्थाएँ एक मंच पर आई हैं जबकि पहले खरीफ और रबी के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर एक कॉन्फ्रेंस होती थी जिसमें समय की कमी के चलते विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती थी।

उन्होंने कहा कि अब देश को पाँच एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बाँटकर पाँच रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएँगी, जिनमें हर राज्य की जलवायु, मिट्टी, पानी और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा और उसी के अनुसार यह तय होगा कि किस इलाके में कौन–सी फसल, कौन–सी किस्म और कौन–सी कृषि पद्धति सर्वोत्तम होगी।

फार्मर आईडी
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सभी राज्यों में फार्मर आईडी बनाने का काम तेज गति से चल रहा है और विश्वास जताया कि लगभग तीन महीने में सभी किसानों की एकीकृत पहचान तैयार हो जाएगी, जिससे किसान को हर योजना का लाभ सीधे और सटीक रूप से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में फार्मर आईडी के आधार पर खाद वितरण का जो मॉडल लागू है, उसी तर्ज पर पूरे देश में व्यवस्था की जाएगी, जिसमें किसान को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, उसकी जमीन और फसल के अनुसार आवश्यक मात्रा में खाद मिलेगा, नकली या ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सकेगी और टेनेंट/बटाईदार किसानों को भी मालिक की स्वीकृति के आधार पर फार्मर आईडी से खाद व अन्य सुविधाएँ मिलेंगी; यही आईडी आगे फसल बीमा, फसल–क्षति मुआवजा और अन्य लाभों का भी आधार बनेगी।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन
उन्होने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के अंतर्गत 2024–25 में तिलहन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर 429.89 लाख टन तक पहुँच गया है, जो 2023–24 में 396.69 लाख टन था। उन्होंने कहा कि उत्पादकता 2023–24 के 1314 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024–25 में 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है, जो किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह संदेश देती है कि सही नीति, बीज, तकनीक और प्रोत्साहन से देश तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 2025–26 में 1076 वैल्यू चेन क्लस्टरों के माध्यम से 13.35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को तिलहन के अंतर्गत लाया गया है, 60 बीज केंद्र स्थापित किए गए हैं, 50 बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है और 400 तेल मिलें स्थापित हो चुकी हैं, जबकि कुल 800 तेल मिलें स्थापित करने का लक्ष्य है, ताकि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और बाजार तक पूरी श्रृंखला मजबूत हो।

तिलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों को तकनीक, बीज, सिंचाई, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में पूरा सहयोग मिल सके। उन्होंने बताया कि लक्ष्य यह है कि तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर किया जाए, उत्पादकता 1353 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जाए और कुल उत्पादन 39.2 मिलियन मैट्रिक टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन मैट्रिक टन तक ले जाया जाए, ताकि खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता में निर्णायक कमी लाई जा सके और किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों से अधिक आय मिले।

दलहन मिशन:100% खरीद
उन्होने बताया कि दलहन मिशन के तहत सभी राज्यों को बीज उत्पादन में अधिकतम वृद्धि करने के लिए कहा गया है, ताकि दालों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज किसान के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि अरहर, उड़द, मसूर आदि दालों में बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रति क्विंटल सहायता दी जाएगी- तुर में 4500 रुपये प्रति क्विंटल, तुर–उड़द में 2000 रुपये प्रति क्विंटल और चना में 1800 रुपये प्रति क्विंटल की मदद दी जा रही है, ताकि किसान अच्छे बीज तैयार करने के लिए प्रेरित हों।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने बताया कि किसानों को सब्सिडी पर बीज वितरण के लिए भी राज्यवार लक्ष्य तय किए गए हैं- मध्य प्रदेश के लिए 3,10,870 क्विंटल, राजस्थान के लिए 2,45,000 क्विंटल, महाराष्ट्र के लिए 87,500 क्विंटल और गुजरात के लिए 40,000 क्विंटल दलहन बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित है। उन्होंने कहा कि नई दलहन किस्मों को शीघ्रता से सीड चेन में लाने पर विशेष जोर दिया गया है; राजस्थान में 79, गुजरात में 58, मध्य प्रदेश में 63 और महाराष्ट्र में 58 नई दाल किस्मों की पहचान और उपयोग पर काम हो रहा है।

एमसीएक्स पर चांदी 13000 रुपये उछली, सोना भी तेज, जानिए आज एक भाव

नई दिल्ली। Gold Price Today: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद एमसीएक्स पर चांदी की कीमत 6% या 13,000 रुपये से अधिक बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमत 2.4% या 3600 रुपये से अधिक बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।

इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं।

चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजी
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई।

Stock Market: शेयर मार्केट में तेजी; 2700 अंक उछला सेंसेक्स, निफ्टी 77390 के पार

नई दिल्ली। Stock Market Update, April 8, 2026: एशियाई बाजारों में जोरदार तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार बुधवार को जबरदस्त उछाल के साथ खुले। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा से दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी आई और इसका असर भारतीय शेयर बाजार में भी दिखा।

कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से भी निवेशकों के रुख पर पॉजिटिव असर पड़ा। इसके अलावा इंडेक्स हैवी एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी से भी बाजार को सपोर्ट मिल रहा है।

सुबह 9:25 बजे तूफानी तेजी के बीच सेंसेक्स 2700 अंकों से अधिक की उछाल के साथ 77392 पर पहुंच गया। जबकि, एनएसई का निफ्टी 800 अंकों से अधिक की तूफानी तेजी के साथ 23938 पर पहुंच गया। निफ्टी मिडकैप और स्मॉल कैप इंडेक्स 3 प्रतिशत से ऊपर हैं। सेक्टोरल इंडेक्स में बैंक निफ्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज दोनों 4 पर्सेंट से ऊपर हैं।

ऑटो इंडेक्स 5 प्रतिशत से ऊपर ट्रेड कर रहा है। पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक भी चार फीसद से अधिक चढ़े हैं। रियल्टी में 5.70 प्रतिशत की उछाल है। ऑयल एंड गैस, मीडिया और मेटल भी 2 से 3 प्रतिशत ऊपर हैं।

बीएसई का सेंसेक्स पर सभी स्टॉक्स ग्रीन हैं। निफ्टी में इंडिगो 10 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर है। एलएंडटी में 7 प्रतिशत से अधिक की तेजी है। अडानी पोर्टस, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस भी 6 प्रतिशत की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे हैं।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त लेकर 77,290 पर खुला। जबकि मंगलवार को यह 74,616 अंक पर बंद हुआ था। सुबह 9:22 बजे यह 2625.88 अंक या 3.52 प्रतिशत की तगड़ी तेजी के साथ 77,242.46 पर कारोबार कर रहा था।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (निफ़्टी-50) भी बड़े उछाल के साथ 23,855 अंक पर खुला और खुलते ही 24 हजार के करीब पहुंच गया। सुबह 9:24 बजे यह 762.70 अंक या 3.30 फीसदी की बढ़त लेकर 23,872 पर कारोबार कर रहा था।

ग्लोबल मार्केट के संकेत
एशियाई बाजारों में बुधवार सुबह जोरदार तेजी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सबसे आगे रहा। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स क्रमशः 4.97 प्रतिशत और 5.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान सुधरने से बुधवार सुबह अमेरिकी शेयर वायदा बाजार में जोरदार तेजी देखी गई।

एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 2.32 प्रतिशत या 155 अंक बढ़कर 6,812 पर पहुंच गया, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 2.12 प्रतिशत या 993 अंक की बढ़त के साथ 47,805 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, रात में वॉल स्ट्रीट पर एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट क्रमशः 0.08 प्रतिशत और 0.10 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.18 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ।

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के लिए किन देशों ने कराई मध्यस्थता, जानिए

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद/तेहरान। US- Iran Ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर हो गया। यह बात अभी तक किसी के गले नहीं उत्तर रही। वह कौनसे देश है जिन्होंने इसमें अपनी भूमिका निभाई है। आइये जानें!

समाचार एजेंसी ने दो अधिकारियों के हवाले से नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के बीच चीन की एंट्री हुई। चीन, जो ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है उसने तेहरान को युद्धविराम के लिए समझाया। चीन ने ईरान को युद्धविराम के लिए मनाया और युद्धविराम के पक्ष में किया।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बातचीत में शामिल अधिकारियों ने बताया कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ रही थी चीनी अधिकारी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में थे ताकि वे तेहरान को संघर्ष-विराम समझौते का कोई रास्ता निकालने के लिए प्रोत्साहित कर सकें।

सीजफायर समझौते की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के हवाले से समाचार एजेंसी एपी ने बताया है कि बीजिंग मुख्य रूप से मध्यस्थों के साथ मिलकर काम कर रहा था जिनमें पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र शामिल थे। ऐसा करके वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था।

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बातचीत में शामिल अधिकारियों ने कहा है कि मध्यस्थता के प्रयासों में पाकिस्तान सबसे आगे था लेकिन पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच की खाई पाटने में मिस्र ने अहम भूमिका निभाई। गाजा में संघर्ष-विराम और ईरान में संघर्ष-विराम, दोनों में ही मिस्र की भूमिका निर्णायक रही। इन प्रयासों में तुर्की ने भी मदद की।

ईरान के सामने अमेरिका का सरेंडर

  1. ईरान में सत्ता परिवर्तन नाकाम-ईरान का शासन उसी इस्लामिक सरकार के अधीन है जिसे अमेरिका और इजरायल ने बार बार ‘आतंकी शासन’ कहा है। महीने भर से ज्यादा की लड़ाई के बाद ये शासन अब और मजबूत होकर उभरेगा। ईरान में सत्ता परिवर्तन की हर संभावना इस युद्धविराम के साथ करीब करीब खत्म माना जाए।
  2. होर्मुज पर ईरान को टोल का अधिकार-युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज एक सामान्य समुद्री रास्ता था लेकिन अब ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा। हफ्तों तक चले संघर्ष के बाद इस युद्ध से तेहरान की दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग पर प्रभाव और ज्यादा बढ़ गया है।
  3. ईरान में ही 450 किलो यूरेनियम-ईरान के 450 किलो समृद्ध यूरेनियम के भंडार को न तो जब्त किया गया है, न ही नष्ट किया गया है और न ही कहीं और ले जाया गया है। अमेरिका के लिए ये सबसे बड़ी नाकामी है।
  4. IRGC और मजबूत-अमेरिका और यूरोप ने IRGC को आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। लेकिन युद्ध के दौरान नागरिक नेताओं की मौत के बाद IRGC ने देश का शासन बहुत हद तक अपने हाथों में ले लिया है। अमेरिका को अब IRGC के प्रभाव वाली सरकार से बात करनी होगी।
  5. मिसाइल क्षमता बरकरार-ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन का विशाल भंडार अभी भी मौजूद है। जबकि अमेरिका की शर्त ईरानी मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करना था। उसकी लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता भी बनी हुई है और अब वो इसकी रेंज में और इजाफा करेगा। ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वह अभी भी खाड़ी क्षेत्र में लंबी दूरी तक हमले कर सकता है। खाड़ी में उसका वर्चस्व अब और बढ़ गया है।
  6. युद्धविराम के लिए कोई जल्दबाजी नहीं-वो अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे जो बार बार युद्ध से भाग निकलने के लिए युद्धविराम करना चाहते थे। ईरान नहीं। तेहरान ने युद्धविराम पर कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। वो अडिग रहा। उसने विरोधियों को अपने मजबूत इरादे का संकेत दे दिया है। इसका प्रभाव वर्षों तक देखा जाएगा।
  7. युद्धविराम के लिए भागते दिखे ट्रंप-डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम समझौते तक पहुंचने के लिए तमाम शर्तों को लिस्ट को ताक पर रख दिया। उन्होंने ईरान की शर्तों पर युद्धविराम किया है। ये उनका सरेंडर है। जिस होर्मुज को खुलवाने को वाइट हाउस अपनी जीत बता रहा है वो 28 फरवरी से पहले भी खुला था।
  8. अमेरिका-इजरायल के लक्ष्य अलग-अमेरिका और इजरायल अब युद्ध के लक्ष्यों को लेकर स्पष्ट रूप से बंटे हुए हैं। युद्ध के उद्देश्यों और स्वीकार्य अंतिम शर्तों को लेकर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच मतभेद अब और भी ज्यादा साफ हो गए हैं और ईरान ने इसी बात का फायदा उठाया है।
  9. अमेरिका को भारी नुकसान-इस युद्ध से अमेरिका के हथियार भंडार को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा है। उसका एयर डिफेंस सिस्टम भंडार बुरी तरह खाली हुआ है। ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए उसे बड़े पैमाने पर मिसाइल इंटरसेप्टर्स इस्तेमाल करने पड़े हैं। इस भंडार को भरने अब अमेरिका को कई वर्ष लग जाएंगे।
  10. मिडिल ईस्ट में अमेरिका की विश्वसनीयता कमजोर-ईरान ने अमेरिका की मिडिल ईस्ट देशों में सुरक्षा देने वाले देश के तौर पर उसकी विश्वसनीयता को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है। ईरानी मिसाइलों ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और कतर में भयानक हमले किए। अमेरिका इन देशों की रक्षा नहीं कर सका। एक वक्त ऐसा लगा कि अमेरिका ने उन्हें अकेला छोड़ दिया है।

तेहरान में जश्न का माहौल है। ये उसकी क्षमता, उसके इरादे, ये उसकी हार नहीं मानने की जिद, ये उसकी वर्षों तक प्रतिबंधों में रहने के बावजूद जुझारूपन की जीत है। ये जीत एक सुपरपावर के घुटने टेकने की है। ये जीत वर्षों तक एक मिसाल रहेगी कि कोई भी देश अपने ताकत के घमंड में किसी और देश के अस्तित्व मिटाने की हिमाकत ना करे। ईरान ने ये लड़ाई अकेले लड़ी थी लेकिन उसने अपने से सौ गुना ताकतवर और घमंड में चूर देशों को अपने शर्तों पर युद्ध से भागने पर मजबूर कर दिया है।

होर्मुज से ईरान एवं ओमान को मिला टोल वसूली का अधिकार, जानिए ट्रंप कैसे झुके

तेहरान। होर्मुज स्ट्रेट को अगले 2 हफ्तों कर इस शर्त के साथ खोलने की इजाजत ईरान ने दी है कि वो इस दौरान इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से तेहरान टोल वसूलेगा। ईरान के साथ साथ ओमान को भी फायदा हुआ है और उसे भी टोल का हिस्सा मिलेगा।

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दो हफ्ते की सीजफायर योजना में ईरान और ओमान दोनों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति देना शामिल है। अधिकारी का कहना है कि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल पुनर्निर्माण के लिए करेगा। हालांकि फिलहाल यह अभी साफ नहीं है कि ओमान अपने पैसे का इस्तेमाल किस काम के लिए करेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान, दोनों के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है। दुनिया इस मार्ग को एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग मानती रही है और उसने पहले कभी इस पर कोई टोल नहीं दिया था। टाइम्स ऑफ इजरायल ने ईरान-अमेरिका युद्धविराम में शामिल अधिकारी के हवाले से नाम नहीं छापने की शर्त पर ये जानकारी दी है।

आकलन के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से अगर प्रति जहाज 10 मिलियन डॉलर का टोल वसूला जाए तो ईरान को हर महीने करीब साढ़े 4 अरब डॉलर का टोल मिल सकता है। युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल कारोबार का 20 प्रतिशत हिस्सा इससे गुजरता था। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद तेहरान ने होर्मुज को बंद कर दिया। इसका गंभीर असर एशियाई देशों पर देखने को मिला है।

अगर टोल लगने की बात सच साबित होती है तो इसका मतलब ये हुआ कि होर्मुज अब यह एक मुक्त अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग नहीं रह जाएगा। इसके अलावा दुनिया के कई ऐसे समुद्री रास्ते हैं जिन्हें कंट्रोल करने वाले देश टोल की मांग करेंगे। जैसे मलक्का स्ट्रेट।

होर्मुज से टोल वसूलने को लेकर ईरान ने सख्त रवैया अपना रखा था। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि जहाज इस जलडमरूमध्य से “ईरान के सशस्त्र बलों के साथ तालमेल बिठाकर” गुजर सकते हैं।

ईरान की दस-सूत्रीय योजना में साफ तौर पर “ईरान के सशस्त्र बलों के साथ तालमेल बिठाकर होर्मुज जलडमरूमध्य से नियंत्रित गुजरने” की बात कही गई है। इस योजना में यह भी बताया गया है कि यह प्रावधान ईरान को “एक अनोखी आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थिति” प्रदान करता है।

हालांकि डोनाल्ड ट्रंप और वाइट हाउस की तरफ से जो बयान जारी किए गये हैं उन्हें होर्मुज से टोल वसूले जाने और ईरानी सेना के साथ तालमेल बनाकर जहाजों के गुजरने को लेकर कोई बात नहीं की गई है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे अनुरोध किया कि मैं आज रात ईरान भेजे जा रही विनाशकारी ताकत को रोक लूं।

इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो जाए, मैं दो हफ्तों की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं। यह एक दो-तरफा युद्धविराम होगा!”

होर्मुज से टोल का स्ट्रक्चर क्या हो सकता है?
ईरान ने युद्ध के दौरान कुछ जहाजों से टोल वसूले हैं लेकिन वो जहाज किस देश के थे और कितना टोल वसूला गया इसली सटीक जानकारी नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में टोल 10-15 मिलियन डॉलर की बात कही गई है। लेकिन कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर ईरान को टोल वसूलने का अधिकार दिया जाता है तो वो 2 मिलियन डॉलर प्रति जहाज हो सकता है। इसके अलावा जहाज के प्रकार, माल और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर टोल की स्थिति भी बदल सकती है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इन शुल्कों के कारण वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री शिपिंग नियमों में स्थायी बदलाव आ सकता है।