- कोटा व्यापार महासंघ के प्रयासों से हॉस्टल व्यवसायियों को बड़ी राहत
- कॉन्ट्रैक्ट लोड 50 किलोवाट से कम करवाने पर नहीं लगेगा अतिरिक्त शुल्क
कोटा। Hostel electricity bill dispute resolved: हॉस्टल व्यवसायियों एवं व्यापारियों को बिजली के बिलों में स्थायी शुल्क के नाम पर कई गुना बढ़ी राशि से राहत दिलाने के लिए कोटा व्यापार महासंघ के प्रयास सफल रहे। इस माह KEDL द्वारा भेजे गए बिजली के बिलों में पूर्व में ₹400 से ₹800 तक लिए जा रहे स्थायी शुल्क को बढ़ाकर ₹16,000 से ₹27,000 तक कर दिए जाने से व्यापारियों एवं हॉस्टल व्यवसायियों में भारी आक्रोश व्याप्त था।
इस गंभीर मामले को कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के समक्ष उठाया। ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में व्यवसायियों को राहत देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।\
कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी के नेतृत्व में हॉस्टल व्यवसायियों एवं व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एसी अजय कुमार जैन से मुलाकात कर इस समस्या से अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि बिना पूर्व सूचना एवं स्पष्ट कारण के स्थायी शुल्क में 40 से 60 गुना तक वृद्धि करके बिजली के बिल भेजे गए हैं। अचानक इतनी बड़ी राशि के बिल आने से व्यापारियों एवं हॉस्टल व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है। इससे सबसे अधिक प्रभावित हॉस्टल व्यवसायी हुए हैं।
अशोक माहेश्वरी ने अधिकारियों को कई बिजली बिल प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान में कोटा का हॉस्टल व्यवसाय एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भारी मंदी के दौर से गुजर रही हैं। कई हॉस्टल बंद पड़े हैं, जिनमें बिजली की खपत नाममात्र की है। इसके बावजूद भारी-भरकम स्थायी शुल्क जोड़कर बिल भेजे जा रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक बंद हॉस्टल में जहां मासिक बिजली खपत मात्र 375 यूनिट है, वहां ₹27,000 स्थायी शुल्क जोड़कर ₹35,046 का बिल भेजा गया है। इस हिसाब से बिजली की प्रति यूनिट लागत लगभग ₹90 तक पहुंच रही है। इस प्रकार के बिल अनेक हॉस्टल व्यवसायियों एवं व्यापारियों को भेजे गए हैं, जो किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं हैं।
चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा एवं इंद्रा विहार विकास समिति के अध्यक्ष अशोक लड्ढा ने बताया कि कोटा का हॉस्टल व्यवसाय वर्तमान में गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। व्यवसायियों के लिए बिजली के बिल, बैंक की किस्तें एवं कर्मचारियों का खर्च वहन करना भी मुश्किल हो गया है। कई व्यवसायी कर्ज लेकर अपने खर्चों का भुगतान कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में बिजली के बिलों में अनावश्यक आर्थिक भार डालना व्यवसायियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि कई हॉस्टल बंद होने के बावजूद चोरी की आशंका के कारण बिजली कनेक्शन कटवाना संभव नहीं है। ऐसे में स्थायी शुल्क के नाम पर हजारों रुपये के अतिरिक्त बिल भेजना व्यवसायियों की परेशानी को और बढ़ा रहा है।
बैठक में KEDL के अधिकारी राजेश पाटौदी एवं जे. वेंकटेश ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए व्यवसायियों को राहत दिलाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि कई हॉस्टलों में वर्तमान में कोचिंग विद्यार्थी नहीं होने के कारण 110 किलोवाट के स्वीकृत कनेक्शन पर भी वास्तविक बिजली खपत मात्र 2 से 3 किलोवाट रह गई है।
अधिकारियों ने सुझाव दिया कि जिन व्यवसायियों को आवश्यकता से अधिक कॉन्ट्रैक्ट लोड स्वीकृत है, वे इसे कम करवाने के लिए आवेदन करें। कॉन्ट्रैक्ट लोड 50 किलोवाट से कम करवाने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे व्यवसायियों को अपने बिजली बिलों का अनावश्यक भार कम करने में मदद मिलेगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मौजूदा ट्रांसफार्मर, मीटर एवं केबल में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एसी अजय कुमार जैन ने आश्वस्त किया कि व्यापारियों एवं हॉस्टल व्यवसायियों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक भार डालने की प्रक्रिया बिना पूर्व सूचना के लागू नहीं होने दी जाएगी।
अशोक माहेश्वरी ने बिजली विभाग की अन्य विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि कुछ उपभोक्ताओं के यहां स्वयं का ट्रांसफार्मर लगा होने के बावजूद पिछले 10 वर्षों से बिजली बिलों में ट्रांसफार्मर किराए के नाम पर ₹5,500 प्रतिमाह जोड़े जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले की भी जांच कराकर व्यवसायियों को राहत दिलाने की मांग की।
कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी, इंद्रा विहार विकास समिति के अध्यक्ष अशोक लड्ढा एवं चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा ने इस गंभीर मामले पर त्वरित कार्रवाई करने तथा व्यापारियों एवं हॉस्टल व्यवसायियों को राहत दिलाने के प्रयासों के लिए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उन्होंने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एसी अजय कुमार जैन XEN जोहरी तथा KEDL के अधिकारी राजेश पाटौदी एवं जे. वेंकटेश का भी धन्यवाद ज्ञापित किया और आशा व्यक्त की कि इन निर्णयों से हॉस्टल व्यवसायियों एवं अन्य व्यापारियों को राहत मिलेगी।

