सोना-चांदी के आयात पर बैंकों की टैक्स छूट खत्म करने का जीएसटी परिषद का विचार

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नई दिल्ली। सोना, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर बैंकों और सरकार की ओर से नामित एजेंसियों को मिलने वाली कर छूट खत्म हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी परिषद सात अक्टूबर की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार कर सकती है।

फिलहाल यह प्रस्ताव है और इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इन कीमती धातुओं के आयात पर सामान्य तौर पर तीन फीसदी एकीकृत जीएसटी लगता है। लेकिन बैंकों और नामित एजेंसियों को इससे छूट मिली हुई है। सरकार समय-समय पर इन एजेंसियों की सूची जारी करती है।

सूत्रों के मुताबिक, यह छूट 2017 में कारोबार को आसान बनाने के लिए दी गई थी। उस समय इन धातुओं का आयात सीमित अधिकृत माध्यमों से होता था। अब छूट वापस लेने से कीमती धातुओं के एक्सचेंज, बैंकों और नामित एजेंसियों पर कर के लिहाज से समान व्यवस्था लागू हो सकेगी। केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद इस बदलाव पर विचार करेगी।

आयात को लेकर सरकार की चिंता
सोने, चांदी और दूसरी कीमती धातुओं के आयात में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश में सोने के आयात की बड़ी वजह आभूषण उद्योग की मांग है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध के बाद आयात बिल बढ़ने से रुपये पर भी दबाव आया है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोना खरीदने से बचने की अपील की है।

पहले आयात शुल्क
सरकार ने गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने के लिए मई में सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। प्लेटिनम पर शुल्क भी 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी किया गया था। अब बैंकों और नामित एजेंसियों को मिली एकीकृत जीएसटी की छूट वापस लेने पर विचार हो सकता है। यह आयात शुल्क से अलग कर है।

आयात के आंकड़े
वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त के दौरान सोने का आयात सालाना आधार पर 3.38 फीसदी बढ़कर 17.47 अरब डॉलर रहा। वहीं, चांदी का आयात 8.81 फीसदी घटकर 1.74 अरब डॉलर रह गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्ताव मंजूर होने पर नई व्यवस्था कब से लागू होगी। खुदरा कीमतों पर इसके असर का भी कोई अनुमान नहीं दिया गया है।