सबको हंसाना, लेकिन कभी किसी पर हंसना मत: मुनि विवर्धनसागर महाराज

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत धर्मसभा को संबोधित करते हुए बुधवार को गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनता है, जब उसके विचार, वाणी और व्यवहार में करुणा, संवेदना और आत्मसंयम का समावेश हो।

उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक धर्म दूसरों के जीवन में खुशियां बांटना है, न कि किसी की पीड़ा का कारण बनना। “सबको हंसाना, लेकिन कभी किसी पर हंसना मत। सबके दुःख बांटना, लेकिन किसी को दुःखी मत करना। सबकी राह में दीप जलाना, लेकिन किसी का दिल मत जलाना। यही जीवन की सच्ची रीत है। जैसा बोओगे, वैसा ही पाओगे।”

मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य के प्रत्येक कर्म का फल निश्चित है। जो व्यक्ति प्रेम, दया, सेवा और सद्भाव के बीज बोता है, उसे जीवन में सुख, शांति और सम्मान की प्राप्ति होती है। वहीं ईर्ष्या, अहंकार, कटुता और द्वेष का मार्ग अंततः दुःख और अशांति की ओर ले जाता है।

कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक राजमल पटौदी, सकल समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बडला ,ताराचंद बडला, मनोज जैसवाल, चंद्रप्रभु दिगम्बर नवयुवक मंडल और गुरु सेवा संघ परिवार के सदस्य मौजूद रहे।