कोटा। अग्रवाल वैष्णव मोमियां पंचायत के तत्वावधान में गुरुवार को नरसिंह जयंती पर स्थानीय गांधी चौक में भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार, भगवान नरसिंह का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। इस दौरान भगवान नरसिंह के स्वरूप द्वारा अधर्म के प्रतीक हिरण्यकश्यपु के 25 फीट ऊंचे पुतले का वध किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सूर्यास्त के समय ठीक सायं 6:45 बजे भगवान नरसिंह के उग्र प्राकट्य के साथ हुई। जैसे ही भगवान ने पुतले का संहार किया, पूरा क्षेत्र “जय श्री नरसिंह” और “जय श्री हरि” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इसके पश्चात, भक्त प्रह्लाद के अनुनय-विनय और हाथ जोड़ने पर भगवान नरसिंह का क्रोध शांत हुआ, जो उपस्थित जनसमूह के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा कोटा के महामंत्री जगदीश जिन्दल, भाजपा नेता पंकज मेहता, भाजपा महामंत्री जगदीश जिंदल, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष हेमराज जिन्दल, जिला अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सिंघल, महामंत्री रमेश गोयल, ट्रस्टी सोहनलाल गुप्ता, कैलाश गुप्ता, चेतन प्रकाश मित्तल, सुरेंद्र गोयल विचित्र थे।
पंकज मेहता ने भगवान नरसिंह की महत्ता बताते हुए कहा कि वे शक्ति व पराक्रम के अधिष्ठाता देव हैं। जगदीश जिंदल ने भगवान से देश की खुशहाली, सुख-समृद्धि और आरोग्य की मंगल कामना की। प्रवक्ता संजय गोयल और सुनीता गोयल ने बताया कि हिरण्यकश्यप को मिले विशेष वरदान के कारण भगवान ने खंभे से प्रकट होकर यह विशिष्ट अवतार लिया था। जो यह संदेश देता है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं।
इस अवसर पर गिर्राज मित्तल, रमा रमण मित्तल, गोपाल मित्तल, नरेंद्र नरेंद्र मित्तल, शिव बंसल, महिला मंडल की संरक्षिका सावित्री गुप्ता, अध्यक्ष शिखा मित्तल, सचिव सुनीता गोयल उपस्थित थे।
पुतले के अवशेष घर ले गए
संस्था के अध्यक्ष चेतन मित्तल गोंद वाले व महामंत्री महेंद्र मित्तल मठ वाले ने बताया कि समारोह के दौरान धार्मिक मान्यताओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। हिरण्यकश्यप वध के उपरांत श्रद्धालुओं में पुतले के अवशेष, जैसे कागज और लकड़ियां, अपने घर ले जाने की होड़ मच गई।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, इन लकड़ियों को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से साल भर नकारात्मक ऊर्जा और परेशानियां दूर रहती हैं। वहीं, बड़ी संख्या में माताएं अपने छोटे बच्चों को भगवान नरसिंह के स्वरूप की गोद में बिठाकर आशीर्वाद दिलाती नजर आईं। जनश्रुति है कि भगवान नरसिंह की गोद में बैठने से बच्चों का मानसिक भय दूर होता है और वे मौसमी बीमारियों व व्याधियों से सुरक्षित रहते हैं।
सजी आकर्षक झांकियां, किया मंचन
महिला अध्यक्ष शिखा मित्तल व सचिव सुनीता गोयल ने बताया कि आयोजन में भव्य झांकियों ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भगवान नरसिंह के साथ-साथ राम दरबार, शिवजी, हनुमान और भक्त प्रह्लाद की सजीव झांकियां सजाई गईं। कार्यक्रम के अंत में विशाल महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों दीपकों की रोशनी से गांधी चौक जगमगा उठा। इसके पश्चात उपस्थित जनसमूह को शीतल ठंडाई और विशेष प्रसाद का वितरण किया गया।
128 साल पुरानी है वध की परम्परा
प्रवक्ता संजय गोयल ने इस आयोजन की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह परंपरा पिछले 128 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। प्राचीन काल में यह आयोजन रामपुरा चौक में आयोजित होता था, लेकिन सन 1905 में तत्कालीन रियासत के दरबार द्वारा नरसिंह धर्मशाला के सम्मुख (वर्तमान गांधी चौक) स्थान उपलब्ध कराए जाने के बाद से यह उत्सव यहीं मनाया जा रहा है।

