भारत ने दुनिया को फिर चौंका दिया; बड़े-बड़े अर्थशास्‍त्री रह गए दंग, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। India GDP Growth:भारत ने उम्मीद से बेहतर आर्थिक विकास दर से एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। ग्लोबल अनिश्चितता, तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया में तनाव जैसी चिंताओं के बावजूद उसने जबरदस्‍त ग्रोथ दर्ज की है।

शुक्रवार को ये दमदार आंकड़े जारी होते ही दोबारा भारत की चर्चा दुनिया में होने लगी। इस तेज आर्थिक रफ्तार उन आलोचकों और अर्थशास्‍त्र‍ियों के लिए जवाब है जो लगातार सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं।

इन चीजों ने अर्थव्यवस्था को बढ़ाया आगे
मजबूत निवेश, जोरदार कंस्ट्रक्शन और बैंकिंग गतिविधियां, घरेलू मांग में मजबूती, सर्विस सेक्टर में अच्छी ग्रोथ और बेहतर कृषि प्रदर्शन ने अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि की तारीफ करते हुए इसे सुधारों और 140 करोड़ भारतीयों की कड़ी मेहनत का नतीजा बताया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद पर जोर दिया।

हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि सब्सिडी की बढ़ती लागत और पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी रहने वाली रुकावटें आने वाले महीनों में ग्रोथ के लिए चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।

बीते रोज ये आंकड़े उसके कुछ घंटे बाद आए जब सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई उपाय घोषित किए। इनमें विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर टैक्‍स से छूट देने वाला एक अध्यादेश भी शामिल है।

ऐसे होगा FII को फायदा
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सरकारी बॉन्ड पर 12.5 फीसदी का लॉन्‍ग-टर्म कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स (LTCG) देना पड़ता था। अगर बॉन्ड 12 महीने से कम समय के लिए रखा जाता था तो शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स की दर 20 फीसदी थी। इन दोनों टैक्‍स को खत्म कर दिया गया है। सरकारी प्रतिभूतियों पर विदेशी निवेशकों की ओर से अर्जित ब्याज आय पर लगने वाले विदहोल्डिंग टैक्स को भी हटा दिया गया है।

GDP के आंकड़े बताते हैं कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और उसके आर्थिक नतीजों के बावजूद यह भरोसा कम से कम इस साल मार्च तक बना हुआ है। साल (2025-26) के दौरान GDP के फीसदी के रूप में PFCE यानी निजी अंतिम उपभोग व्यय (वास्तविक रूप में) 55.7 फीसदी रहा, जो पिछले साल के स्तर के बराबर है।

ये चुनौतियां हैं सामने
भारत अपनी ईंधन जरूरतों का लगभग 80 फीसदी आयात करता है। इससे वह बाहरी अस्थिरता के प्रति संवेदनशील हो जाता है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर भारत इस विकास इंजन को बाहरी तेल सप्‍लाई में रुकावट का बंधक नहीं बनने दे सकता।

आंकड़े विश्‍लेषकों के अनुमानों से ज्‍यादा
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में शानदार 7.8% की बढ़ोतरी हुई।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पूरे साल की GDP ग्रोथ 7.7% रही।
जबकि ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 7.9% की बढ़ोतरी हुई।
यह सभी सेक्टर में आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दिखाता है।