विपरीत परिस्थितियों में भी साधक को अपना धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए: मुनि विवर्धनसागर

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पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव, 23 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाया

कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान बुधवार को मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर भगवान पारसनाथ का निर्वाण महोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया।

प्रवचन के दौरान गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने भगवान पारसनाथ के जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि साधना के मार्ग में कैसी भी विपरीत परिस्थितियां आएं, साधक को अपना धैर्य और समता भाव नहीं छोड़ना चाहिए।

भगवान पारसनाथ के जीवन में आए उपसर्गों का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि कमठ द्वारा किए गए उपसर्ग के बावजूद भगवान पारसनाथ ने शांत भाव बनाए रखा। इसी प्रकार पूर्व भव के संस्कारों और कर्मों के प्रभाव से उत्पन्न परिस्थितियों में भी भगवान ने क्षमा, करुणा और समता का परिचय दिया। उनके जीवन का संदेश है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा व पंकज खटोड ने बताया कि मोक्ष सप्तमी के अवसर पर भगवान पारसनाथ की टोंक की विशेष धार्मिक भावनाओं के साथ पूजा-अर्चना की गई। कोषाध्यक्ष ताराचंद बडला ने बताया कि तेइसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ के निर्वाण महोत्सव के अवसर पर प्रभु चरणों में 23 किलो का निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य नाथूलाल एवं अशोक कुमार सांवला परिवार को प्राप्त हुआ।

श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ निर्वाण लाडू अर्पित कर भगवान पारसनाथ के मोक्ष कल्याणक की आराधना की। इस अवसर पर सम्मेद शिखरजी की रचना पर आधारित विशेष झांकी का भी लोकार्पण किया गया। झांकी ने सम्मेद शिखरजी की पावनता और भगवान पारसनाथ के निर्वाण कल्याणक की स्मृति को सजीव रूप प्रदान किया।

धर्मसभा में अध्यक्ष प्रकाश बज, पदम बड़ला, संरक्षक विमल जैन नांता, मनोज जैसवाल, नरेंद्र सेठिया, संजय सांवला, बसंतीलाल पाटनी, विनोद सारसोप, जम्बू बज, मनीष सेठी, स्वतंत्र पाटनी, अनिल हरसोरा, अनिल बड़जात्या सहित गुरु सेवा संघ परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।