नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में भले ही रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा हो, लेकिन महंगाई (CPI) और आर्थिक विकास (GDP) को लेकर अपने अनुमान में बदलाव किया है। अच्छी बात यह है कि RBI ने ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है, जबकि महंगाई का अनुमान पहले के मुकाबले घटाया है।
RBI को अब उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.7% की दर से बढ़ेगी। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने 6.6% ग्रोथ का अनुमान लगाया था। यानी RBI ने अपने अनुमान में 0.1 फीसदी (10 बेसिस प्वाइंट) की बढ़ोतरी की है।
तिमाही के हिसाब से GDP ग्रोथ का अनुमान इस तरह है
- पहली तिमाही: 7%
- दूसरी तिमाही: 6.4%
- तीसरी तिमाही: 6.5%
- चौथी तिमाही: 6.8%
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शुरुआती नतीजे अच्छे हैं, प्राइवेट कंजप्शन मजबूत बनी हुई है और घरेलू मांग के दम पर सेवा क्षेत्र में भी तेजी जारी रहने की उम्मीद है।
महंगाई का अनुमान घटाया
RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है। गवर्नर ने कहा कि फिलहाल हेडलाइन महंगाई बढ़ी है, लेकिन इसकी बड़ी वजह खाद्य और ईंधन से जुड़ा दबाव है। वहीं, कोर महंगाई अभी भी काबू में है और तीसरी तिमाही में ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें नरमी आने की उम्मीद है।
तिमाही के हिसाब से CPI का अनुमान इस तरह है
- दूसरी तिमाही: 4.7%
- तीसरी तिमाही: 5.9%
- चौथी तिमाही: 5.5%
इसके अलावा RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.3% रखा है।
फिर भी RBI क्यों सतर्क है?
हालांकि ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया गया है और महंगाई का अनुमान घटाया गया है, लेकिन RBI का कहना है कि जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता और अल नीनो की वजह से कमजोर मानसून जैसी चुनौतियां आगे महंगाई और ग्रोथ दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और आगे के फैसले के लिए आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखने की बात कही।

