करौली। राजस्थान हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते को लेकर पूरे देश में चर्चा हो रही है। 32 साल बाद हुए समझौते को लेकर माना जा रहा है कि राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में किसानों और आम जनता को बड़ा फायदा होगा। इसी क्रम में भजनलाल सरकार और किसानों के बीच एक और मामले को लेकर 30 जून की देर रात फैसला हो गया।
मामला करौली जिले का करीब 20 साल पुराना ‘पांचना बांध विवाद’ से जुड़ा है। इस पर आखिरकार मंगलवार रात 12:00 बजे मैराथन बैठकों के दौर के बाद पूरी तरह सुलह हो गई। सरकार, स्थानीय प्रशासन और किसान संगठनों के बीच बनी इस आम सहमति के बाद अब आगामी 7 दिनों के भीतर बांध से पानी छोड़ने की अंतिम तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।
पांचना बांध से कमांड एरिया (बयाना, रूपवास और भरतपुर क्षेत्र) के गांवों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से सवाई माधोपुर के खंडीप गांव में किसान आंदोलन चल रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर और करौली में प्रशासनिक अधिकारियों और दोनों पक्षों के किसान प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं।
लिखित समझौते पर हस्ताक्षर हुए
इसी क्रम में मंगलवार शाम से शुरू हुई अंतिम दौर की बैठक आधी रात तक चली। बताया जा रहा है कि कई दौर में चली इस बैठक में एक बार ऐसी स्थिति बनी कि मंत्री उठकर चले गए। लेकिन फिर दोबारा वार्ता शुरू हुई। रात ठीक 12:00 बजे दोनों पक्षों (कमांड और भराव क्षेत्र के किसानों) के बीच बीच का रास्ता निकालते हुए एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसके बाद सालों पुराना यह गतिरोध हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
20 साल से उलझा था यह विवाद
पांचना बांध से पानी छोड़ने को लेकर भराव क्षेत्र (अपस्ट्रीम) और कमांड एरिया (डाउनस्ट्रीम) के किसानों के बीच दो दशकों से विवाद चल रहा था। कमांड एरिया के किसान सिंचाई के लिए पानी की मांग कर रहे थे, जबकि भराव क्षेत्र के ग्रामीणों का तर्क था कि पानी छोड़ने से उनके कुओं का जलस्तर गिर जाएगा। साथ ही पेयजल का संकट खड़ा हो जाएगा। लेकिन इस मामले में हुए लिखित समझौते के अनुसार 50 करोड़ की पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना के तहत सिंचाई और पीने का पानी दिया जाएगा।
जानकारों की मानें तो पांचना बांध विवाद की मुख्य वजह राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी भी मानी जा रही थी। कहा जा रहा है कि सामाजिक सामंजस्य न बैठ पाने के कारण यह मामला 2006 से ही ठंडे बस्ते में था, लेकिन अब जिसे तकनीकी और व्यावहारिक स्तर पर सुलझा लिया गया है।
अब आगे क्या? जानें समझौते की शर्तें
बताया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक जलसंधि के तहत दोनों पक्षों की चिंताओं का ध्यान रखा गया है। सरकार बांध से इस तरह पानी रेगुलेट करेगी जिससे कमांड एरिया के खेतों को सिंचाई का पानी भी मिल सके। साथ ही भराव क्षेत्र के गांवों में वॉटर टेबल (भूजल स्तर) भी प्रभावित न हो।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगले 7 दिनों के भीतर बांध के कैनाल सिस्टम (नहरों) की मरम्मत और पानी के बंटवारे का तकनीकी शेड्यूल तैयार कर लिया जाएगा। इसके तुरंत बाद पानी छोड़ने की वास्तविक तारीख की घोषणा कर दी जाएगी।

