राजस्थान में दलहन-तिलहन फसलों की बिजाई में गत वर्ष के मुकाबले गिरावट

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जयपुर। मूंग के सबसे प्रमुख, मूंगफली के दूसरे तथा सोयाबीन के तीसरे, सबसे बड़े उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में यद्यपि विभिन्न दलहनों एवं तिलहनों के बिजाई क्षेत्र में मिश्रित रुख देखा जा रहा है लेकिन कुल मिलाकर इसका उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे है। बिजाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में पिछले साल के मुकाबले इस बार खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 39.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 36.88 लाख हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 26.85 लाख हेक्टेयर से गिरकर 24.61 लाख हेक्टेयर रह गया।

दलहन फसलों में मूंग का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 26.57 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर इस बार 23.17 लाख हेक्टेयर पर आ गया। इसकी खेती में किसानों की दिलचस्पी इसलिए घट गई क्योंकि एक तो इसका बाजार भाव ज्यादा आकर्षक नहीं रहा और दूसरे, इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोत्तरी की गई।

राजस्थान में चौला का रकबा भी 66 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 56 हजार हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर वहां मोठ का क्षेत्रफल 8.59 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 9.12 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का उत्पादन क्षेत्र 3.79 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.99 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

जहां तक तिलहन फसलों का सवाल है तो मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 12.86 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.24 लाख हेक्टेयर पर आ गया जबकि पहले यह गत वर्ष से आगे चल रहा था। सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 9.89 लाख हेक्टेयर से गिरकर 9.32 लाख हेक्टेयर पर आ गया। इसकी बिजाई में आरंभ से ही गिरावट का माहौल बना हुआ था।

राजस्थान अरंडी का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है लेकिन वहां इसका क्षेत्रफल गत वर्ष के 2.66 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 2.14 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर राज्य में तिल का उत्पादन क्षेत्र 1.44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। फसलों की हालत संतोषजनक बताई जा रही है।