कोटा। ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ का आयोजन गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ससंघ (6 पिच्छी) के सानिध्य में चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
विवर्धनसागर महाराज ने कर्म सिद्धांत और आत्मकल्याण पर सारगर्भित प्रवचन देते हुए कहा कि मृत्यु तो अवश्यंभावी है, लेकिन मृत्यु के बाद आत्मा की गति व्यक्ति के कर्मों से निर्धारित होती है।
उन्होंने कहा कि जैसे कोई व्यक्ति जिस दिशा में जाने वाली ट्रेन में बैठता है, वह उसी गंतव्य तक पहुंचता है, उसी प्रकार मनुष्य के शुभ और अशुभ कर्म ही उसकी आगामी गति का निर्धारण करते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल मृत्यु के बाद नाम के आगे ‘स्वर्गवासी’ लिख देने से आत्मा स्वर्ग नहीं पहुंच जाती। आत्मा की वास्तविक गति उसके जीवनभर किए गए कर्मों की प्रकृति पर निर्भर करती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में सद्कर्म, संयम और धर्म का आचरण करना चाहिए।
इस अवसर पर समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, परम संरक्षक विमल जैन नांता, अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला,मनोज जैसवाल, नरेश वेद, राजेन्द्र गोधा, पंकज खटोड़, ताराचंद बड़ला, टीकम पाटनी, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, राजकुमार पाटनी, पूर्व न्यायाधीश जिनेन्द्र जैन सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

