भारत ने अमेरिका से पाकिस्तान को लगाई फटकार, जानिए क्या बोला

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वॉशिंगटन। पाकिस्तान सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत के खिलाफ नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है। कुछ हफ्ते पहले इस्लामाबाद में एक कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गई थी। इसमें सिंधु जल संधि के भारत की तरह से रोकने पर चर्चा की गई और पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ दुष्प्रचार किया था। इसी पर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने एक लेख के जरिए पाकिस्तान को करार दवाब दिया है।

विनय क्वात्रा ने ‘द वीक’ में लिखा है कि इस्लामाबाद कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के एक पूर्व विदेश मंत्री ने धमकी दी कि अगर सिंधु नदी प्रणाली को लेकर पाकिस्तान की मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह भारत के खिलाफ युद्ध करेगा। अपनी अंदरूनी समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ युद्ध की धमकी देना इस्लामाबाद की एक आम नीति बन गई है।

आतंकी हमले के विरोध में रोका सिंधु जल संधि
विनय क्वात्रा ने लिखा है कि संधि को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला भारत ने तब किया जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर एक भयानक हमला हुआ। यह हमला लश्कर-ए-तैयबा संगठन से जुड़े पाकिस्तानी और पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों ने किया था।

उन्होंने 26 लोगों की हत्या कर दी जिनमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए हमलों के बाद से भारत में किसी आतंकवादी हमले में आम नागरिकों की यह सबसे बड़ी संख्या में मौत थी।

उन्होंने लिखा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे और संधि में असमानता के कारण भारत के उन इलाकों में दशकों तक विकास रुका रहा जिन्हें बेहतर जल अधिकारों से लाभ हो सकता था। इसके बावजूद भारत ने संधि का पालन किया।

उसने 1965, 1971 और 1999 में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़े और दशकों तक लगातार दुश्मनी और सीमा-पार आतंकवाद जारी रखा जिसमें 2001 में भारत की संसद पर हमला, 2008 में मुंबई आतंकी हमला, 2016 में उरी और पठानकोट हमले, 2019 में पुलवामा हमला और 2025 में पहलगाम हमला शामिल हैं। पाकिस्तान के लगातार जारी आतंकी अभियानों के कारण भारत में 40,000 से ज्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं।

‘पाकिस्तान ने बहुत पहले खत्म कर दिया था संधि’
विनय क्वात्रा ने लिखा है कि ‘यह एक ऐसी संधि थी जिसपर भारत की तरफ से कोई फैसला लेने से पहले ही पाकिस्तान ने उसे खत्म कर दिया था।’ उन्होंने अपने लेख में आगे लिखा है कि यह याद रखना जरूरी है कि संधि की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह ‘सद्भावना और दोस्ती की भावना’ के साथ की गई थी। पाकिस्तान ने उस सद्भावना और दोस्ती को खत्म करने में आधी सदी लगा दी। संधि को ठंडे बस्ते में डालने का मतलब बस उस चीज को स्वीकार करना है जिसे पाकिस्तान के बर्ताव ने पहले ही खत्म कर दिया था।

उन्होंने आगे लिखा कि जो लोग भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की वकालत करते हैं उन्होंने या तो पिछली बातचीत के इतिहास पर ध्यान नहीं दिया है या फिर उन्हें लगता है कि बार-बार वही काम करके अलग नतीजों की उम्मीद करना पागलपन नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत का रुख साफ कर दिया है ‘आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते… आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते… पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते।’