ब्रिक्स के मंच से आर्थिक सहयोग, सुरक्षित व्यापार मार्ग व स्थानीय मुद्रा इस्तेमाल पर जोर

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भारत, रूस और ईरान ने अमेरिका को दिया मैसेज, ट्रम्प तिलमलाये

नई दिल्ली। ब्रिक्स बिजनेस फोरम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बड़बोले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दे दिया। तीनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग, सुरक्षित व्यापार मार्गों और स्थानीय मुद्राओं के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया।

ये बातें ऐसे समय में कही गईं जब डॉलर के दबदबे को चुनौती देने की ब्रिक्स की कोशिशों की अमेरिका आलोचना कर रहा है; इससे मौजूदा ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के विकल्पों को मजबूत करने की इस गुट की महत्वाकांक्षा साफ हो चुका है।

सुरक्षित समुद्री रास्तों के महत्व पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल ट्रेड के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों और सप्लाई रूट के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत नेविगेशन की आजादी और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा का समर्थक है। यह बात ऐसे समय में कही गई है जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण स्ट्रैट ऑफ होर्मुज़ में रुकावट आ रही है और सप्लाई रूट बाधित हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति मार्ग खुले रहें और नाविक सुरक्षित हों। यही वजह है कि भारत नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का दृढ़ समर्थक है।

वहीं पुतिन ने कहा कि ग्लोबल इकॉनमी में संरचनात्मक और गहरे बदलाव हो रहे हैं। उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं उन पारंपरिक आर्थिक ताकतों की जगह ले रही हैं, जिन्होंने 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में विकास को आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि स्थापित अर्थव्यवस्थाओं के पास अभी भी मजबूत पक्ष हैं, जैसे कि विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी व वैज्ञानिक फायदे, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्लोबल इकॉनमी का परिदृश्य बदल रहा है।

अभी दुनिया में स्ट्रक्चरल और गहरे बदलाव हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि जिन्हें दिग्गज लीडर कहा जाता है, जो 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में आर्थिक विकास में सबसे आगे थे, उनकी जगह अब विकास के नए इंजन ले रहे हैं। जब मैं पुराने कहता हूं, तो यह सिर्फ कहने की बात है। हम सभी समझते हैं कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं।
व्लादिमीर पुतिन, रूस के राष्ट्रपति

पुतिन ने आगे कहा, ‘इन तथाकथित पुराने लीडरों के पास अभी भी बड़ी ताकतें और अच्छी तरह से विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी फायदे, वैज्ञानिक फायदे, वैज्ञानिक स्कूल वगैरह मौजूद हैं। यह दुख की बात है, लेकिन चीज़ों का स्वभाव ऐसा नहीं है। मानवता और इकॉनमी का स्वभाव ऐसा नहीं है। दुनिया हमेशा बदलती रहती है।’

लोकल करेंसी सिस्टम लाने का सुझाव
इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने ईरान की भौगोलिक स्थिति, ऊर्जा संसाधनों और परिवहन को ब्रिक्स की आर्थिक संपर्क व्यवस्था के लिए रणनीतिक कड़ी के रूप में पेश किया।

पेजेश्कियान ने ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि समूह को अपनी आर्थिक क्षमता से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण का अधिक एकीकृत नेटवर्क तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुद्रा जोखिम से निपटने के तंत्र और आपसी भुगतान व्यवस्था के साथ राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार राजनीतिक झटकों के प्रति कम संवेदनशील होगा।

पेजेश्कियान ने ये भी दिए सुझाव

  • पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति और ऊर्जा भंडार के कारण ब्रिक्स की ऊर्जा, खाद्य और परिवहन आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। उन्होंने व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे को अधिक एकीकृत करने की जरूरत बताई। इसमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, नियामकीय बाधाओं को कम करना और सीमापार बाजारों को मजबूत करना शामिल है।
  • उन्होंने बड़ी बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के बीमा के लिए 10 अरब डॉलर की शुरुआती पूंजी वाली ब्रिक्स की संयुक्त पुनर्बीमा कंपनी बनाने का भी प्रस्ताव रखा। इससे निजी क्षेत्र का भरोसा बढ़ेगा।
  • शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए पेजेश्कियान ने कहा कि सीमित संख्या में मुद्राओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण मौजूदा वित्तीय प्रणाली राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है।