बैंकिंग सिस्टम में नकदी घटाने के लिए रिजर्व बैंक बेचेगा 1 लाख करोड़ से ज्यादा के बॉन्ड

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सितंबर में तीन चरणों में खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के जरिये 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के बॉन्ड की बिक्री का ऐलान किया है। बैंकिंग तंत्र में उपलब्ध अधिक नकदी पर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के एक बयान के कुछ ही घंटों बाद यह ऐलान किया गया।

मल्होत्रा ने कहा कि आवश्यकता से अधिक नकदी से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक के पास सभी विकल्प मौजूद हैं। आरबीआई ने यह कदम तब उठाया गया है जब दीर्घ अवधि वाले वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी के जरिये नकदी कम करने की केंद्रीय बैंक की दूसरी कोशिश पर बैंकों ने बहुत उत्साह नहीं दिखाया था।

आरबीआई के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को बैंकिंग तंत्र में शुद्ध अधिशेष नकदी 10.43 लाख करोड़ रुपये थी जबकि प्रमुख नकदी (कोर लिक्विडिटी) 13 लाख करोड़ से 14 लाख करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान है। ओएमओ बिक्री का मकसद दीर्घ अवधि की नकदी कम करना है जबकि वीआरआरआर नीलामी अल्प अवधि की रकम के लिए होती है।

एक निजी टेलीविजन चैनल सीएनबीसी-टीवी18 को दिए साक्षात्कार में नकदी कम करने के तरीकों के बारे में पूछे गए सवाल पर मल्होत्रा ने कहा,‘हमारे पास काफी तरीके हैं।’ उन्होंने ओएमओ और स्वैप का जिक्र किया, साथ ही कहा कि वीआरआरआर से शायद अधिक मदद न मिले।

बैंकों में नकदी आरक्षी अनुपात (सीआरआर) की जरूरत बढ़ाने पर पूछे एक सवाल पर मल्होत्रा ने कहा कि ‘कोई भी विकल्प खारिज नहीं किया जा सकता’। मगर उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई यह भी जानता है कि रियायती अदला-बदली प्रावधान (कंसेशनल स्वैप विंडो) के जरिये जुटाई गई एफसीएनआर(बी) जमा को सीआरआर से छूट दी गई थी।

बैंकिंग तंत्र में उपलब्ध नकदी अधिशेष मुख्य रूप से 127 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने की वजह से है। शुक्रवार को हुई 26-दिन की वीआरआरआर नीलामी में बैंकों ने 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित रकम के मुकाबले 60,449 करोड़ रुपये मूल्य की बोलियां लगाईं।

वहीं, चार-दिन की वीआरआरआर नीलामी में बोलियों की रकम 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित रकम की तुलना में 3.44 लाख करोड़ रुपये थी। मल्होत्रा ने कहा कि मकसद मौद्रिक नीति के परिचालन लक्ष्य (वेटेड एवरेज कॉल रेट) को रीपो दर के बराबर लाना है।

ओवरनाइट वेटेड एवरेज कॉल रेट (डब्ल्यूएसीआर) स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर के आस-पास था और गुरुवार को 4.98 प्रतिशत के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 5.02 प्रतिशत पर बंद हुआ। मल्होत्रा ने कहा कि अधिशेष नकदी की वजह से डब्ल्यूएसीआर कम है।

अगर नीतिगत दरें तय करने वाली समिति 5 से 7 अक्टूबर को होने वाली अगली बैठक में दरें बढ़ाती है (जिसका अनुमान बाजार में एक खेमा लगा रहा है) तो आरबीआई को यह सुनिश्चित करना होगा कि डब्ल्यूएसीआर रीपो दर (जो 5.25 प्रतिशत है) के करीब पहुंच जाए ताकि मौद्रिक नीति का असर मजबूती से आगे बढ़े। कारोबारियों का कहना है कि ओएमओ बिक्री से बॉन्ड यील्ड और बढ़ने की उम्मीद है।