नई दिल्ली। Ethanol Content: सरकार ने ज्यादा एथेनॉल मिले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी। अब 22% से 30% एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार ने इस बारे में एक नोटिफिकेशन जारी किया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाने को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे नए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) से छूट देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद अब E20 से ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन को बाजार में लाने का रास्ता साफ हो गया है।
कौन-कौन से नए ईंधन शामिल
सरकार ने चार नए तरह के एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को एक्साइज ड्यूटी छूट के दायरे में शामिल किया है।
- E22 : 22 फीसदी एथेनॉल, 78 फीसदी पेट्रोल
- E25 : 25 फीसदी एथेनॉल, 75 फीसदी पेट्रोल
- E27 : 27 फीसदी एथेनॉल, 73 फीसदी पेट्रोल
- E30 : 30 फीसदी एथेनॉल, 70 फीसदी पेट्रोल
- इन सभी ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी शून्य रहेगी, बशर्ते वे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के तय मानकों को पूरा करते हों।
जानकारों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से भविष्य में तेल की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही इससे एथेनॉल की मांग बढ़ेगी जिससे किसानों को भी फायदा होगा।
ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। यह 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इससे सरकार का आयात बिल बढ़ गया है और चालू खाते का घाटा बढ़ रहा है। इसका असर रुपये पर भी दिख रहा है और डॉलर के मुकाबले इसमें काफी गिरावट आई है।
भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा बड़ा आयातक और उपभोक्ता है। यही वजह है कि सरकार वैकल्पिक ईंधन पर जोर दे रहा है ताकि आयात में कमी की जा सके।
ज्ञातव्य है कि 2012 और मार्च 2023 के बीच बनी ज्यादातर कारें और दो-पहिया गाड़ियां E10 के अनुकूल थीं। इसी तरह अप्रैल 2023 से बनी गाड़ियां E20 के अनुकूल थीं यानी उन्हें 20% तक एथेनॉल मिले पेट्रोल के साथ चलने के लिए डिजाइन किया गया है। लेकिन अप्रैल 2025 से बेची जाने वाली गाड़ियां ही पूरी तरह से E20 के अनुकूल हैं। सरकार E22, E25, E27 और E30 के लिए भी स्टैंडर्ड तैयार कर रही है, जिससे पेट्रोल में 30% तक एथेनॉल मिलाने की इजाजत मिल सकेगी। इसके अलावा E25 गाड़ियों के लिए ट्रायल भी शुरू किए जा रहे हैं।
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स
ऑटो इंडस्ट्री के अधिकारियों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर पेट्रोल गाड़ियां E20 फ्यूल के साथ भी पूरी तरह से मटीरियल और फ्यूल के हिसाब से कम्प्लायंट नहीं हैं। इसलिए एथेनॉल ब्लेंडिंग में कोई भी अनिवार्य बढ़ोतरी न सिर्फ माइलेज कम करेगी बल्कि ऐसी गाड़ियों के मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ाएगी। इससे वीकल ओनर्स का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा।

