ऊंचे बाजार भाव से सोयाबीन समेत अधिकांश तिलहन का क्षेत्रफल बढ़ने की उम्मीद

0
11

नई दिल्ली। खरीफ सीजन के दो प्रमुख तिलहन- सोयाबीन एवं मूंगफली का थोक मंडी भाव पिछले कुछ महीनों से सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है जिससे उत्पादकों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है और वे इसका बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का जोरदार प्रयास कर सकते हैं।

शीघ्र ही खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई जोर पकड़ने की संभावना है। खरीफ सीजन में मूंगफली एवं सोयाबीन के साथ-साथ सूरजमुखी, तिल, अरंडी एवं नाइजर सीड जैसे तिलहनों की भी खेती होती है।

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के समीक्षकों का कहना है कि बिजाई का अभियान, आरंभ होने से पूर्व किसानों को विभिन्न तिलहन फसलों का ऊंचा एवं लाभप्रद मूल्य प्राप्त हो रहा है जिससे इसकी खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण बढ़ सकता है।

2026-27 सीजन के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5708 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि थोक मंडी भाव इससे भी ऊपर चल रहा है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अनुसार मांग एवं आपूर्ति का समीकरण जटिल होने से सोयाबीन की कीमतों में भारी तेजी आई है। 5 जून 2026 को इंदौर में इसका एक्स मंडी भाव 68,000 रुपए प्रति टन दर्ज किया गया जो 5 जून 2025 को प्रचलित मूल्य 43,396 रुपए प्रति टन से काफी ऊंचा था।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों की तमाम महत्वपूर्ण मंडियों में सोयाबीन का दाम एमएसपी से काफी ऊपर चल रहा है।

इसी तरह सौराष्ट्र संभाग की मंडियों में 5 जून को मूंगफली का औसत भाव 72,000 रुपए प्रति टन दर्ज किया गया जबकि गत वर्ष की इसी अवधि में इसका मूल्य 53,720 रुपए प्रति टन रहा था। 2026-27 सीजन के लिए मूंगफली का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 7517 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। सूरजमुखी की कीमत भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।