मुम्बई। Chana Price: एक तरफ प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण थोक मंडियों में चना की आपूर्ति कम हो रही है तो दूसरी ओर इसकी मांग भी कमजोर देखी जा रही है। इसके फलस्वरूप सीमित उतार-चढ़ाव के साथ एक निश्चित सीमा में स्थिर बना हुआ है और निकट भविष्य में बाजार की इस स्थिति में भारी बदलाव होना मुश्किल लगता है।
एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के अनुसार अगले कुछ दिनों तक चना तथा उड़द का भाव या तो स्थिर या कुछ मजबूत रह सकता है और तुवर की कीमतों में भी ज्यादा बदलाव आना मुश्किल लगता है। मिलर्स और व्यापारी केवल अपनी तात्कालिक जरूरतों के लायक दलहन की खरीद कर रहे हैं। आवक कम होने से दाम में नरमी आने की संभावना भी ज्यादा नहीं है।
चना दाल तथा बेसन में मांग कमजोर देखी जा रही है और मानसून की गति सुस्त बनी हुई है। सरकारी एजेंसियों- नैफेड तथा एनसीसीएफ के पास चना का विशाल स्टॉक मौजूद है। इससे बाजार पर कुछ हद तक मनोवैज्ञानिक दबाव बना हुआ है। आपूर्ति एवं उपलब्धता में कमी आने तथा कीमत तेज होने पर चना के इस सरकारी स्टॉक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
विदेशों से देशी चना एवं पीली मटर का आयात कम हो रहा है। नीचे मूल्य पर चना की खरीदारी बढ़ सकती है मगर दाम बढ़ते ही कारोबार सुस्त पड़ सकता है। सरकारी एजेंसियों द्वारा 2025-26 के रबी सीजन में करीब 21 लाख टन चना खरीदा गया।
फिलहाल चना का अधिकांश स्टॉक उत्पादकों एवं सरकारी एजेंसियों के पास मौजूद है जबकि मिलर्स एवं व्यापारियों के पास इसका सीमित स्टॉक बचा हुआ है। थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास चल रहा है।
आगामी समय में चना का भाव घरेलू मांग, किसानों की बिक्री, सरकार की विपणन नीति और आयात का ‘पड़ता’ जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में चना का दाम 6000 से 6100 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन काफी घटने की संभावना है।

