इंटेक ने किया झाला हाउस का भौतिक निरीक्षण, संरक्षण की फिर उठाई मांग

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कोटा। कोटा की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल प्राचीन ‘झालाहाउस’ के संरक्षण और संवर्धन हेतु इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) द्वारा मंगलवार को भौतिक सत्यापन किया गया। इसके तहत् इंटेक के सदस्यों और विरासत विशेषज्ञों ने सम्पूर्ण ऐतिहासिक इमारत का बारीकी से निरीक्षण किया।

​निरीक्षण के दौरान इंटेक के कन्वीनर निखिलेश सेठी ने बताया कि पिछले 35 से 40 वर्षों की घोर प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इस भव्य विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। वर्तमान में पूरे परिसर, छतों और दीवारों पर दर्जनों वृक्ष असामान्य तरीके से पनप रहे हैं।

इन वृक्षों की गहरी जड़ों ने इमारत की मजबूत पट्टियों व दीवारों को तोड़कर तहस-नहस कर दिया है। यहाँ तक कि खिड़कियों और दरवाजों के बीच से भी पेड़ बाहर निकल रहे हैं। इंटेक टीम ने ऐसे लगभग 20 खतरनाक पेड़ों को चिह्नित कर उन पर क्रॉस के टैग लगाए हैं।

उल्लेखनीय है कि गत 28 जून को इंटेक ने विरासत प्रेमी संगठनों ‘हाड़ौती हेरिटेज वॉक्स’ एवं ‘हाड़ौती हेरिटेज सोसाइटी’ के साथ मिलकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत कराया था। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए स्पीकर बिरला ने अपना अनुकरणीय विरासत प्रेम दर्शाया और परिसर में चल रहे तोड़-फोड़ के कार्य को तुरंत रुकवा दिया था।

को-कन्वीनर बहादुर सिंह हाड़ा ने स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए चार-सूत्री ज्ञापन में से केवल प्रथम बिंदु (तोड़-फोड़ रुकवाने) पर ही अमल हो सका है।

ज्ञापन के शेष तीन बिंदुओं पर क्रमानुसार आगे बढ़ते हुए, इमारत को ढहने से बचाने के लिए दीवारों और छतों पर उगे विशाल वृक्षों को वैज्ञानिक पद्धति से तुरंत हटवाना अत्यंत आवश्यक है। यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाया गया, तो इस बेजोड़ ऐतिहासिक धरोहर को बचा पाना असंभव हो जाएगा।

​इस संगोष्ठी एवं निरीक्षण कार्यक्रम में इंटेक के को-कन्वीनर बहादुर सिंह हाड़ा, प्रो. प्रहलाद दुबे, ब्रजेश विजयवर्गीय, राजकुमार नैनीवाल, अनिल शर्मा, गौरव झाला, सुषमा आहूजा, आदित्य सेठी तथा सौरभ लोढ़ा सहित शहर के अनेक विरासत प्रेमी और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।