तेहरान। Hormuz Strait: अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी से ईरान को अभी तक 6 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। अमेरिकी नाकेबंदी ने ईरान की इकोनॉमी की कमर तोड़ना शुरू कर दिया है जो पहले से ही रसातल में थी।
मई में ईरान का कच्चा तेल निर्यात कम से कम छह साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू की थी और ट्रंप उसे ढाल बनाकर शांति समझौतों की शर्तों को मानने का प्रेशर बना रहे हैं। तेहरान ने इस कदम को गैर-कानूनी बताया है और अपने बंदरगाहों के आस-पास अमेरिकी जहाजों को जब्त करने की कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ीं और सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी क्षेत्र के मुख्य उत्पादक देशों से होने वाले निर्यात में भारी कमी आई। हालांकि 13 अप्रैल को शुरू हुए नाकेबंदी से पहले ईरान काफी हद तक अपना तेल निर्यात जारी रखने में कामयाब रहा।
असल में ईरान को इसका जबरदस्त फायदा भी हुआ और इसके तेल निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी हुई लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी शुरू होने के बाद स्थिति तेजी से बदल गई।
अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान को नुकसान
होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला तेल निर्यात ईरान के कुल निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत है। अलजजीरा के शिपिंग के ताजा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि घेराबंदी की वजह से ईरान की तरफ से विदेशों में बेचे जा सकने वाले कच्चे तेल की मात्रा में भारी कमी आई है खासकर चीन को जो उसका सबसे बड़ा ग्राहक है। जानकारों का कहना है कि नाकेबंदी की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था को अब भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है जिससे यह सवाल उठ रहा है कि ईरान कब तक यह युद्ध जारी रख पाएगा?

