नई दिल्ली। Indian Economy: भारत सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर लगभग 346.36 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो इससे पहले जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों में 345.47 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से थोड़ा अधिक है।
यह संशोधन, देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि की तस्वीर को और स्पष्ट करता है। वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2026 के बीच मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 10.8 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर दर्ज की गई। हालांकि, घरेलू स्तर पर हुई इस मजबूत आर्थिक वृद्धि का असर वैश्विक रैंकिंग में नहीं दिखा।
संशोधित आंकड़ों के बावजूद भारत डॉलर के आधार पर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर पांचवें स्थान पर था, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में वह ब्रिटेन और जापान दोनों से पीछे हो गया। संशोधित आंकड़ों के बावजूद भारत डॉलर के आधार पर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
वित्त वर्ष 2025 में भारत ब्रिटेन से पहले पांचवें स्थान पर था लेकिन वित्त वर्ष 2026 में वह ब्रिटेन और जापान दोनों से पीछे हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी मुख्य वजह रुपये और डॉलर में मापी गई आर्थिक वृद्धि के बीच का अंतर है। पिछले एक दशक में रुपये के लगातार कमजोर होने से भारत की आर्थिक उत्पादन क्षमता का मूल्य डॉलर में परिवर्तित करने पर कम हो गया है, जिससे वैश्विक रैंकिंग में उसकी प्रगति सीमित रही।
इसी कारण वित्त वर्ष 2026 में भारत का जीडीपी लगभग 3.92 लाख करोड़ रुपये डॉलर रहा, जो ब्रिटेन के 4 लाख करोड़ डॉलर और जापान के 4.43 लाख करोड़ डॉलर के जीडीपी से कम है। ऐसे में घरेलू स्तर पर मजबूत आर्थिक वृद्धि के बावजूद जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का भारत का लंबे समय का सपना फिलहाल टल गया है।

