नई दिल्ली। 1 अगस्त को गुरुग्राम में आयोजित COOIT-MOPA की क्रॉप कमेटी की बैठक में सरसों उत्पादन का अनुमान 117.50 लाख टन से घटाकर 110.25 लाख टन कर दिया गया। उत्पादन अनुमान में 7.25 लाख टन की यह कटौती बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण तेजी का संकेत मानी जा रही है।
संशोधित आंकड़ों के अनुसार देश में सरसों की कुल उपलब्धता लगभग 111.25 लाख टन रहने का अनुमान है। मार्च से जुलाई 2026 के दौरान लगभग 72 लाख टन सरसों की मंडियों में आवक हो चुकी है, जबकि इसी अवधि में लगभग 61 लाख टन की पेराई की जा चुकी है। 31 जुलाई तक किसानों, प्रोसेसरों और HAFED के पास केवल 50.25 लाख टन स्टॉक शेष बताया गया है।
अब अगस्त से फरवरी तक के सात महीनों में इसी स्टॉक से बाजार की मांग पूरी करनी होगी। इसका अर्थ है कि औसतन केवल 7.17 लाख टन प्रतिमाह की पेराई संभव होगी, जो सामान्य मासिक खपत और क्रशिंग आवश्यकता की तुलना में काफी कम है। यदि उद्योग की मांग सामान्य स्तर पर बनी रहती है, तो सीजन के अंतिम महीनों में कच्चे माल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्पादन अनुमान में कटौती ऐसे समय हुई है जब पहले ही बड़ी मात्रा में सरसों की पेराई हो चुकी है। यदि किसानों के पास उपलब्ध स्टॉक अनुमान से कम निकलता है या वे ऊंचे भाव की उम्मीद में बिक्री धीमी रखते हैं, तो मिलों के बीच खरीद प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
वर्तमान आंकड़े सरसों बाजार के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। सीमित उपलब्धता, उत्पादन अनुमान में कटौती और सीजन के उत्तरार्ध में संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए सरसों तथा सरसों तेल की कीमतों में आगे और मजबूती की संभावना बनी हुई है। निकट अवधि में बाजार में होने वाले किसी भी सीमित सुधार को खरीदारी का अवसर माना जा सकता है, जबकि अंतिम तिमाही में आपूर्ति संबंधी चिंताएं भावों को और समर्थन दे सकती हैं।

