Mustard: घरेलू मंडियों में सरसों की आवक घटकर एक तिहाई 78.50 लाख टन रह गई

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जयपुर। मार्च अप्रैल की तुलना में जुलाई- अगस्त के दौरान घरेलू मंडियों में सरसों की आवक घटकर महज एक तिहाई रह गई जबकि इसका थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊंचा चल रहा है लेकिन फिर भी सीजन की इस अवधि के लिए आवक को सामान्य माना जा सकता है।

जयपुर के चांदपोल की अनाज मंडी में प्रतिष्ठान- मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल चतर द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष के दौरान मार्च से अगस्त के छह महीनों में देशभर की मंडियों में कुल 78.50 लाख टन सरसों की आवक हुई जिसमें से केवल 50 हजार टन की खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा की गई जबकि शेष स्टॉक व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं तेल मिलर्स द्वारा खरीदा गया।

वस्तुतः इस बार सरसों का भाव एमएसपी से ऊंचा रहने के कारण नैफेड / हैफेड को इसकी खरीद का ज्यादा अवसर नहीं मिल सका। इन एजेंसियों के पास पहले से 1.00 लाख टन सरसों का स्टॉक था जबकि 50 हजार टन की नई खरीद के साथ कुल स्टॉक 150 लाख टन पर पहुंचा। इसमें से 1.25 लाख टन की बिक्री हो चुकी है और अब उसके पास सिर्फ 25 हजार टन सरसों का स्टॉक उपलब्ध है।

सरसों की आवक मार्च में 19 लाख टन, अप्रैल में 20 लाख टन, मई में 15.50 लाख टन, जून में 10 लाख टन, जुलाई में 7 लाख टन एवं अगस्त में 6.50 लाख टन आंकी गई है। 1 मार्च से आरंभ हुए रबी मार्केटिंग सीजन में 107.25 लाख टन सरसों के उत्पादन का अनुमान लगाया गया जबकि 2 लाख टन का पुराना स्टॉक मौजूद था। इसमें से 78.50 लाख टन का स्टॉक मंडियों में आ गया और 1 सितम्बर को किसानों के पास 30.75 लाख टन का स्टॉक बच गया।

मार्च-अगस्त 2026 की छमाही में कुल 69 लाख टन सरसों की क्रशिंग होने का अनुमान है। क्रशर्स / प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों / स्टॉकिस्टों के पास पिछले स्टॉक को मिलाकर 11.25 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ है।

इस तरह किसानों के पास 20.75 लाख टन, स्टॉकिस्टों / प्रोसेसर्स के पास 11.25 लाख टन एवं सरकारी एजेंसियों के पास 25 हजार टन को मिलाकर देश में फिलहाल कुल 42.25 लाख टन सरसों का स्टॉक मौजूद है।