जीतते वो हैं जिनमें चौखट को पार करने का साहस हो: दीपा मलिक

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कोटा। एलन के जवाहर नगर स्थित सत्यार्थ परिसर में आयोजित मोटिवेशनल सेशन को संबोधित करते हुए दीपा मलिक ने कहा कि कोटा आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैंने कक्षा 7 और 8 की पढ़ाई केन्द्रीय विद्यालय कोटा से पूरी की थी और जीवन संघर्ष भी सीखा। हमें हार कभी नहीं माननी चाहिए।

उन्होनें कहा कि हमें अच्छे और बुरे में फर्क करना, आगे बढ़ना, हमारा ज्ञान सिखाता है और कोटा ज्ञान दे रहा है। इसीलिए कोटा आकर खुशी हो रही है। यहां की ख्याति दूर-दूर तक है। मैं स्टूडेंट्स से कहना चाहती हूं कि प्रयास करना कभी मत छोड़ना। मेरे साथ कई बार ऐसा हुआ। डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो, अब आने वाले ओलंपिक में ये प्रतियोगिताएं नहीं हैं तो तैराकी और दूसरी तैयारियां कर रही हूं।

स्वयं के अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में आपको कई अवसर मिलते हैं, आपको उन्हें सिर्फ पहचानने की जरूरत है। एक मंजिल मिलती है तो अगली मंजिल पाने का हौंसला मिलता है। मौका दरवाजे पर दस्तक देता है, जीतते वो हैं जिनमें उस चौखट को पार करने का साहस हो। मैं जिन पहियों पर चलकर आपके बीच आई हूं, वहीं मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। हम अपने दिल की बात नहीं सुनते क्योंकि हम यह सोचते हैं कि लोग क्या सोचेंगे।

मेरा आधी शरीर संवेदना शून्य है। केवल हाथ काम करते हैं लेकिन सकारात्मक सोच ही हमेशा मुझे आगे लेकर गई। मैं रूकी नहीं, थकी नहीं। इसी शरीर से उठना-बैठना सीखा और खेलों में नाम कमाकर एक उदाहरण बन गई। जब मैं किसी पुरस्कार को प्राप्त करती तो लोग बोलते कि आप बहुत लकी हो। मुझे इस शब्द से नफरत है, क्योंकि मुझे कोई भी उपलब्धि सिर्फ मेरी लगन और मेहनत से मिली है, लक से नहीं।

जिद ने दिलाया मुकाम
मुझे नदी में उतर कर तैरना था जिसके लिए मुझे जिद पकड़नी पड़ी थी, क्योंकि हिंदुस्तान ने उस महिला को पहाड़ों में मोटर साइकिल चलाते, नदी में बहाव के विरुद्ध तैरते, पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर मोटरसाइकिल चलाते हुए नहीं देखा था, जिसके केवल हाथ ही काम करते थे। मेरी सनक को लोगों ने पागलपन तक कहा।

मैंने गाड़ियों में अपने हिसाब से बदलाव करवाए, नए-नए शहर जाना पड़ा, बहुत ट्रैवल किया, बहुत लोगों की मदद मांगनी पड़ी। चुनौतियां बहुत थीं, पैसा भी लगता। खुद मोटिवेशनल सेशंस करती, रैलियों की स्पॉन्सरशिप से पैसा बचाया, रेस्टोरेंट चला कर पैसा जुटाया। इसी शरीर से कुछ करना चाहती थी।

अब मैं खुश हूं कि जैसा सोचती थी, वैसा कर पाई हूं। मेरी शारीरिक परिस्थितियों को देखते हुए लोगों ने कहा कि ये महिला सिर्फ एक कमरे में जिदंगी गुजारेगी। लेकिन, आज मै इतने देशों में घूम चुकी हूं कि मेरा तीसरा पासपोर्ट भी भरने वाला है।