वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि 2 अप्रैल से बराबरी के शुल्क बिना किसी अपवाद के सभी देशों पर लागू होंगे। ट्रंप ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार करार के लिए शुल्क रियायत पर बातचीत कर रहे हैं।
ट्रंप ने रविवार को एयरफोर्स वन में संवाददाताओं से कहा, ‘आप इसकी शुरुआत सभी देशों से और अनिवार्य तौर पर उन तमाम देशों से देखेंगे जिनके बारे में हम बात कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि बराबरी का शुल्क केवल उन 10-15 देशों पर लक्षित नहीं होगा जिनका अमेरिका के साथ व्यापार असंतुलन अधिक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शुल्क व्यापक मगर ‘उदार’ होंगे।
भारत का नाम लिए बिना ट्रंप ने एशिया में व्यापार प्रथाओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘आप एशिया के हर एक देश पर नजर डालिए, उन्होंने व्यापार में अमेरिका के साथ क्या किया है। मैं यह नहीं कहूंगा कि किसी ने हमारे साथ उचित या अच्छा व्यवहार किया है।’
ट्रंप का मानना है कि बराबरी के शुल्क न होने के कारण पिछले कुछ वर्षों के दौरान अमेरिका का व्यापार घाटा काफी अधिक रहा है। ट्रंप इस शुल्क को अनुचित वैश्विक प्रतिस्पर्धा से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बचाने और संरक्षणवादी नीतियों के साथ अमेरिका को फिर से महान बनाने का एक साधन मानते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका शुल्क को कैसे लागू करेगा। अभी तक यह भी खुलासा नहीं किया गया है कि शुल्क की गणना किस प्रकार की जाएगी। ऐसे में अन्य देशों को इससे निपटने के लिए कोई रणनीति तैयार करने में परेशानी हो रही है।
व्यापार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का कहना है कि बराबरी का शुल्क पूरे देश के स्तर पर अथवा क्षेत्र एवं उत्पाद विशेष को लक्षित करते हुए लगाया जा सकता है। अगर इसे देश के स्तर पर लागू किया गया तो वहां से आयातित सभी उत्पाद इसके दायरे में होंगे।
गणना संबंधी जटिलताओं और उसमें लगने वाले समय एवं लागू करने की समय-सीमा को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि इसे देश के स्तर पर व्यापक तरीके से लागू करना अपेक्षाकृत आसान होगा। हालांकि इसे लागू किए जाने की तिथि नजदीक आते ही ट्रंप के रुख में भी नरमी दिख रही है। उन्होंने पिछले सप्ताह यह कहते हुए अपने रुख में नरमी का संकेत दिया था कि ये शुल्क संभवतः ‘पारस्परिक के मुकाबले अधिक उदार’ होंगे।