मेडिकल कॉलेज कोटा में जापान से आई 48 लाख की पैथोलॉजी मशीन

0
409

राजस्थान की पहली पैथोलॉजी ग्रास स्टेशन मशीन कोटा में, पोस्टमार्टम आर्गन्स की ग्रास देने में होगी सुगमता

कोटा। मेडिकल कॉलेज कोटा में बुधवार को प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने फीता काटकर पैथौलोजी मशीन का उद्घाटन किया। इस दौरान डाॅ. सरदाना ने कहा कि पैथौलोजी ग्रास स्टेशन मशीन को 48 लाख की कीमत में जापान से आयात किया गया है।

इसके मेडिकल काॅलेज कोटा में स्थापित होना पैथाॅलोजी विभाग के साथ ही कोटा मेडिकल काॅलेज और शहर के लिए गौरव की बात है। कोटा में स्थापित की गई यह पैथाॅलाॅजी ग्रास स्टेशन राजस्थान की पहली मशीन है। जयपुर स्थित एसएमएस मेडिकल काॅलेज में भी इस प्रकार की मशीन स्थापित नहीं की गई है।

मेडिकल काॅलेज कोटा के लेक्चर रूम में आयोजित उद्घाटन समारोह में पैथाॅलोजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ.नरेश एन राॅय ने कहा कि पैथाॅलाॅजी ग्रास स्टेशन मशीन एडवांस्ड वर्जन है। इसके लिए नाॅर्मल बजट में जगह मिलना मुश्किल होता है। बजट में सुपर स्पेशियलिटी के लिए मशीनों पर जोर रहता है। कोटा मेडिकल काॅलेज में जांचों के लिए कईं मशीनें आई हैं।

कोटा का काॅलेज एसएमएस के बाद सबसे अधिक उपकरणों वाला मेडिकल काॅलेज है। यह मशीन आने वाली जनरेशन के लिए बहुत जरूरी थी। जिन समस्याओं का सामना वर्तमान पैथाॅलाॅजी विभाग को करना पड़ा है, अब इस उपकरण के आने के बाद आगे इन समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी। जूनियर्स के लिए इसे स्थापित करने में व्यक्तिगत रूप से भी रूचि ली थी।

फाॅर्मलीन से मिलेगी मुक्ति
डाॅ. नरेश एन राॅय ने कहा कि मेडिकल काॅलेज कोटा में करीबन 8 हजार से अधिक सर्जिकल सेम्पल्स तथा आर्गन ऑपरेशन के उपरांत जांच के लिए आते हैं। वहीं 200 से 300 पोस्टमार्टम होते हैं, जिनमें 3 से 4 आर्गन होते हैं। इनकी ग्राॅस करते हुए चिकित्सकों और तकनीशियनों को गंभीर खतरा रहता है।

इनसे निकलने वाला विषैला पदार्थ फाॅर्मलीन गंभीर बीमारियां पैदा करता है। इससे कैंसर, श्वसन, त्वचा, आंखों की समस्या, एलर्जी समेत विभिन्न समस्याओं के चलते अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं माना जाता है। ऐसे में काॅलेज में पैथाॅलोजी मशीन के स्थापित होने के बाद इन समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। यह मशीन अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भी है। इसमें फार्मलीन का एक्सपोजर नहीं होता है। इसके पहले विभागाध्यक्ष डाॅ. नीलू वशिष्ठ, डाॅ. राजीव सक्सेना, डाॅ. आरके सिंह ने अपने विचार रखे।