वित्त वर्ष अप्रैल की जगह जनवरी से रखने की कवायद शुरू

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    नई दिल्ली। सरकार 1 जनवरी 2018 से वित्त वर्ष का चक्र बदलने पर सक्रियता से विचार कर रही है। उसका विचार है कि अप्रैल से शुरू होकर मार्च में खत्म होने के बजाय अब वित्त वर्ष जनवरी में शुरू हो और दिसंबर में खत्म हो जाए। अधिकारियों ने LEN_DEN NEWS को बताया कि अगर ऐसा होता है तो आय कर अधिनियम और कंपनी अधिनियम में बदलाव करने होंगे।

    साथ ही मौजूदा वित्त वर्ष कम कर तीन तिमाहियों तक सीमित करने के लिए बहीखाते में भी अच्छे खासे बदलाव करने की जरूरत होगी। अधिकारियों ने कहा कि वित्त वर्ष का समय बदलने से दिसंबर के अंत तक बजट पेश करना होगा और सबसे अहम बात यह है कि पूरी कवायद अगले छह महीने में करनी होगी।

    बजट वर्ष बदलने से जुड़ी चर्चाओं में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सरकार बजट वर्ष बदलने से पहले सभी विकल्पों पर विचार कर रही है।’ प्रधानमंत्री कार्यालय में नीति निर्धारण में लगे लोग दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं, जिनमें वित्त वर्ष को चरणबद्ध तरीके से अप्रैल-मार्च के बजाय जनवरी-दिसंबर करना और अगला बजट फरवरी के बजाय एक महीने पहले यानी जनवरी में पेश करना शामिल हैं।

    अधिकारी ने कहा, ‘अगर वित्त वर्ष 1 जनवरी, 2018 से बदला जाता है तो इस पर जल्द ही निर्णय लेना होगा।’ पूर्व सांख्यिकी प्रमुख और योजना आयोग से जुड़े सदस्य प्रणव सेन ने कहा कि अगला आम चुनाव अप्रैल, 2019 में होना है, जिसे देखते हुए सरकार वित्त वर्ष का नया खाका खींच सकती है। ऐसा हुआ तो केंद्र सरकार आचार संहिता के झमेले में पड़े बिना दिसंबर, 2018 में उपयुक्त बजट तैयार कर पाएगी।’