सूरजमुखी तेल का आयात 30% बढ़कर 35 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचाने का अनुमान

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नई दिल्ली। Edible oil: केन्द्र सरकार द्वारा कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य किए जाने के बाद देश में सूरजमुखी तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। उद्योग अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2026-27 में सूरजमुखी तेल का आयात लगभग 25 से 30 प्रतिशत बढ़कर 35 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। आयात शुल्क में कमी से खाद्य तेल बाजार में सूरजमुखी तेल की हिस्सेदारी बढ़ेगी, सोयाबीन तेल के आयात में कमी और खाद्य तेल के दाम कम होने की उम्मीद है।

केन्द्र सरकार ने हाल ही में कच्चे सूरजमुखी तेल पर मौलिक आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत तथा रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत निर्धारित कर दिया है। भारत में मुख्यत: क्रूड सूरजमुखी तेल का ही आयात किया जाता है जबकि नेपाल से सूरजमुखी तेल का थोड़ा-बहुत आयात होता है जिस पर कोई शुल्क नहीं लगता है।

सूरजमुखी तेल का आयात 30 फीसदी बढ़ने का अनुमान
खाद्य तेल उद्योग संस्था सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अनुसार शुल्क कटौती के कारण 2026-27 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) में सूरजमुखी तेल का आयात करीब 30 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी के साथ 35 लाख टन पर पहुंच जाने की उम्मीद है । सीमा शुल्क लगभग समाप्त हो जाने से क्रूड सूरजमुखी तेल का आयात सस्ता होगा और घरेलू बाजार मूल्य में नरमी आने से इसकी मांग एवं खपत में बढ़ोत्तरी होगी।

सोयाबीन तेल के आयात में 10 फीसदी गिरावट का अनुमान
आगामी विपणन वर्ष में सोयाबीन तेल का आयात लगभग 10.7 प्रतिशत घटकर करीब 50 लाख टन रहने का अनुमान है। दूसरी ओर, पाम तेल का आयात लगभग 80 लाख टन के स्तर पर स्थिर रहने की संभावना है। भारत अपनी वनस्पति तेल की लगभग दो-तिहाई जरूरत आयात के माध्यम से पूरी करता है। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से पाम तेल, सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल का आयात करता है। वर्ष 2026-27 में देश का कुल वनस्पति तेल आयात लगभग 1.65 से 1.70 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

पाम तेल का आयात स्थिर रहने की संभावना
पाम तेल का सवाल है तो इसका आयात लगभग सामान्य या स्थिर रहने की संभावना है। एसोसिएशन के मुताबिक 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में देश के अंदर लगभग 80 लाख टन पाम तेल का आयात हो सकता है। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में हुई कटौती का निर्णय 24 सितम्बर से प्रभावी हुआ है जबकि 31 अक्टूबर को मौजूदा मार्केटिंग सीजन समाप्त हो जाएगा इसलिए चालू सीजन में खाद्य तेलों के आयात पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगले मार्केटिंग सीजन में काफी अंतर दिखाई पड़ सकता है।

कम होगें खाद्य तेलों के दाम
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि आयात शुल्क में कमी का सीधा असर खाद्य तेलों की कीमतों, आयात के पैटर्न और घरेलू बाजार की मांग पर दिखाई देने लगा है। सूरजमुखी तेल की कीमत अधिक प्रतिस्पर्धी होने से इसकी खपत बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध होंगे। सूरजमुखी तेल के आयात में वृद्धि का असर सोयाबीन तेल के आयात पर भी पड़ सकता है। वैश्विक बाजार में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। इंडोनेशिया में बायोडीजल की बढ़ती मांग तथा मौसम संबंधी जोखिमों के कारण पाम तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में पाम तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।