नई दिल्ली। Red Chilli Price भाव ऊंचे होने के कारण वर्तमान में लालमिर्च में निर्यात मांग सीमित चल रही है। लेकिन मंडियों में आवक कम रह जाने एवं लोकल खरीद में सुधार होने के कारण विगत एक सप्ताह के दौरान लालमिर्च की कीमतों में 3/5 रुपए प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए अभी हाल-फिलहाल मंदे की संभावना नहीं है। क्योंकि चालू सीजन के दौरान लालमिर्च का उत्पादन 30/35 प्रतिशत की कमी आने के कारण मंडियों में स्टॉक कम रह गया है जबकि मध्य प्रदेश की नई फसल अक्टूबर माह के अंत तक शुरू होगी। बारिश की कमी से आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में बिजाई देरी से शुरू हुई है।
व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में लालमिर्च का स्टॉक 35/38 लाख बोरी होने के समाचार है जबकि गत वर्ष इसी समयवधि में स्टॉक 45/46 लाख बोरी का था।
खम्मम मंडी में भी लालमिर्च का स्टॉक 14/15 लाख बोरी होने के अनुमान है जबकि गत वर्ष स्टॉक 18/20 लाख बोरी का था। वारंगल में भी स्टॉक गत वर्ष की तुलना में 4/5 लाख बोरी कम रहने के समाचार है। वर्तमान में वारंगल में लालमिर्च का स्टॉक 12/13 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
जानकार सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश की नई फसल आने तक बाजार में मंदे की संभावना नहीं है। अगर आगामी दिनों में निर्यात मांग में वृद्धि होती है तो लालमिर्च के भाव सितम्बर माह में 8/10 रुपए प्रति किलो और बढ़ सकते हैं अगर निर्यात मांग नहीं बढ़ती तो वर्तमान भावों में 3/5 रुपए का मन्दा-तेजी चलता रहेगा।
वर्तमान में गुंटूर मंडी में लालमिर्च तेजा का भाव 224/225 रुपए चल रहा है जबकि खम्मम में तेजा का भाव 229/230 रुपए बोला जा रहा है। वारंगल में भाव 218/220 रुपए बोला जा रहा है।
कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आ जाने के कारण वर्तमान में मंडियों में किसानी माल की आवक काफी कम रह गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुन्टूर मंडी में आवक 14/15 हजार बोरी की रह गई है जबकि वारंगल एवं खम्मम में आवक 4/5 हजार बोरी की हो रही है। भाव ऊंचे होने के कारण निर्यात व्यापार कम है।
मध्य प्रदेश में लालमिर्च की बिजाई गत वर्ष की तुलना में दोगुना अधिक क्षेत्रफल पर की गई है। बिजाई के पश्चात मौसम भी फसल के अनुकूल बना हुआ है। जिस कारण इस वर्ष मध्य प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में दोगुना होने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं।
गत वर्ष मध्य प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन 28/30 लाख बोरी का रहा था जोकि इस वर्ष बढ़कर 55/60 लाख बोरी की संभावना है। बशर्तें आगामी दिनों में फसल में रोग न लगे।
निर्यात : लालमिर्च के दाम ऊंचे होने के कारण इस वर्ष लालमिर्च का निर्यात प्रभावित हुआ है चीन की मांग कम रही। बांग्ला देश की खरीद भी सीमित बनी हुई है मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026-27 के प्रथम दो माह अप्रैल-मई-2026 के दौरान लालमिर्च का निर्यात मात्रात्मक रूप में 35 प्रतिशत घटा है लेकिन निर्यात कीमत अधिक मिलने के कारण आय गत वर्ष के बराबर रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल-मई- 2026 के दौरान लालमिर्च का निर्यात 119438 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 2603 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-मई- 2025 के दौरान लालमिर्च का निर्यात 185011 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 2592 करोड़ रुपए की हुई थी वर्ष 2025-26 के दौरान लालमिर्च का कुल निर्यात 683681 टन का रहा और प्राप्त आय 10395.59 करोड़ की रही।

