शब्दों के साधक गीतऋषि दुर्गादान सिंह गौड़ को साहित्य जगत ने किया याद

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कोटा। राजस्थानी भाषा के सुप्रसिद्ध गीतकार एवं श्रृंगार रस के सिरमौर कवि ‘गीतऋषि’ दुर्गादान सिंह गौड़ के आकस्मिक निधन पर भारतेंदु हरिश्चंद्र साहित्य समिति, कोटा की ओर से शुक्रवार को माहेश्वरी भवन में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

सभा में शहर के साहित्यकारों, कवियों, साहित्य प्रेमियों, गणमान्य नागरिकों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए याद किया।

माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष एवं अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी सभा पूर्वांचल के उप सभापति राजेश कृष्ण बिरला ने कहा कि दुर्गादान सिंह गौड़ का निधन राजस्थान के गीत-साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है।

उन्होंने कहा कि कॉलेज जीवन से ही उनका कवि गौड़ से आत्मीय संपर्क रहा। उनकी रचनाओं में राजस्थान की माटी, संवेदना और जीवन के विविध रंगों की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती थी।

वक्ताओं ने कहा कि दुर्गादान सिंह गौड़ की कविताओं और गीतों में श्रृंगार की आदर्श स्थिति के साथ दर्द, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। भाव और शिल्प-सौंदर्य के साथ भावानुकूल लय एवं धुनों ने उन्हें राजस्थान के गीतकारों में विशिष्ट और सर्वोच्च स्थान दिलाया।

राष्ट्रीय कवि जगदीश सोलंकी ने उनके व्यक्तित्व, साहित्यिक यात्रा और रचनात्मक विशेषताओं को याद करते हुए उनकी कविताओं से जुड़े अनेक प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि गौड़ की रचनाओं की सहजता, भावप्रवणता और गीतात्मकता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

श्रद्धांजलि सभा में कोटा दशहरा मेले के दौरान कवि दुर्गादान सिंह गौड़ की स्मृति में स्थायी साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने का विचार भी सामने आया। उनके पुत्र निशामुनि गौड़ ने कहा कि वे अपने पिता की अधूरी साहित्यिक कृतियों को पूरा करने का प्रयास करेंगे।

सभा में भारतेन्द्र समिति अध्यक्ष हरिकृष्ण बिरला, बीजेपी के प्रवक्ता पंकज मेहता, राष्ट्रीय कवि जगदीश सोलंकी, महेन्द्र नेह, जितेन्द्र निर्मीही, रामेश्वर शर्मा, शिवराज सिंह गौड़, उनके पुत्र निशामुनि गौड़, सिद्धार्थ सिंह, रविन्द्र सिंह, इंदु सिंह, भारतेंदु समिति के महामंत्री सुनिल जायसवाल, लेखक प्रभात सिंघल, अरुण भार्गव, कवि मुकुट मणिराज, भगवती प्रसाद गौतम, होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान कोटा डिवीजन के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी आदि ने अपने उद्गार व्यक्त किए।