नई दिल्ली। केंद्र ने मंगलवार को लोक सभा में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। यह विधेयक सरकार को यह तय करने की अनुमति देगा कि डिजिटल भुगतान का कौन सा माध्यम शुल्क-मुक्त होगा और किन पर शुल्क लिया जा सकता है। यह यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ग्लोबल ब्रोकरेज जेफरीज के एक नोट के अनुसार 2,000 रुपये से ऊपर के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर 15-30 आधार अंकों का मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगने से वित्त वर्ष 2027-28 तक 5,000 करोड़ रुपये से 10,000 करोड़ रुपये राजस्व आ सकता है।
सरकार ने भले ही भुगतान कानून में संशोधन पेश किया है, लेकिन यूपीआई पर एमडीआर लगाए जाने की राह दूर है। जेफरीज ने एक नोट में मंगलवार को कहा, ‘हमें लगता है कि एमडीआर बरकरार रखने और विस्तार व मुनाफे में सुधार में निवेश करने के बारे अधिक अनुशासित होने की संभावना है, बजाय इसके कि प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण के माध्यम से कमजोर किया जाए।’
यह पंद्रह दिनों के दौरान एमडीआर पर दूसरा अनुमान है। एमडीआर वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान लेनदेन करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं। बर्नस्टीन ने 28 जुलाई को ने 30-40 आधार अंक के उच्च शुल्क ढांचे का अनुमान लगाया था। 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान से लेनदेन की मात्रा केवल 4 प्रतिशत है, लेकिन लेनदेन के मूल्य में इसकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत है।

