नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को उसने देशभर में चीनी डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है। यह 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेगी। इसका मकसद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना है।
इस आदेश के तहत, कोई भी चीनी डीलर चीनी मिलने की तारीख से 30 दिनों से ज्यादा समय तक स्टॉक नहीं रख पाएगा। न ही किसी भी समय 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी स्टॉक में रख सकेगा। ये पाबंदियां ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ और ‘चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025’ के तहत लगाई गई हैं।
क्या है इस कदम का मकसद
- सरकार ने कहा कि इस कदम का मकसद चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
- साथ ही उपभोक्ताओं की सुरक्षा और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है।
- सरकार ने यह भी कहा कि कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी डिमांड और सप्लाई के बुनियादी कारणों पर आधारित नहीं है।
निर्देश के अनुसार, सभी चीनी डीलरों को ‘खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग’ के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हर हफ्ते अपने चीनी स्टॉक की जानकारी देनी होगी। इन्वेंट्री को अपडेट करना होगा। सरकार ने कहा कि वह बाजार पर कड़ी नजर रखेगी। जरूरत पड़ने पर और कदम उठाएगी ताकि उचित कीमतों पर चीनी मिलती रहे।
जमाखोरी के मिले हैं मामले
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि उसे व्यापारियों, डीलरों और बिचौलियों की ओर से जमाखोरी के मामले मिले हैं। साथ ही, मिलों से चीनी की असल आवाजाही के बिना सट्टेबाजी और कागजी सौदे (पेपर ट्रेडिंग) के मामले भी सामने आए हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन गतिविधियों से कमी का बनावटी माहौल बना। इससे मिल-गेट और खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव हुआ। केंद्र ने फिर से कहा कि देश में घरेलू खपत को पूरा करने के लिए चीनी का पर्याप्त स्टॉक है। स्टॉक सीमा के बावजूद सही व्यापार और वितरण गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।

