ट्रंप ने फिर बढ़ाई भारत की टेंशन, रूस से तेल खरीद पर लगाएगा प्रतिबंध

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नई दिल्‍ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की टेंशन फिर बढ़ा दी है। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ मिडिल ईस्‍ट संघर्ष खत्म करने के समझौते के बाद होर्मुज स्‍ट्रेट से कच्चे तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो गई है।

ऐसे में वॉशिंगटन जल्द ही रूसी तेल शिपमेंट पर फिर से प्रतिबंध लगाने की स्थिति में होगा। भारत अपनी जरूरत का आधे से ज्‍यादा क्रूड रूस से इंपोर्ट कर रहा है। ऐसे में अगर रूस पर प्रतिबंध लगते हैं तो उसका भारत पर असर पड़ना लाजिमी है।

फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘जल्द ही हम ऐसा (रूस पर सैंक्‍शन) कर पाएंगे क्योंकि ईरान के साथ समझौते के बाद होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल का प्रवाह हो रहा है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब G7 नेता यूक्रेन पर हमले को लेकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा था।

प्रतिबंधों में छूट से दबाव हुआ था कम
अमेरिका ने पहले रूसी तेल के कुछ ऐसे शिपमेंट के लिए अस्थायी रूप से प्रतिबंधों में छूट दी थी। उसे बढ़ाया भी था। यह छूट उन खेपों के लिए थी जो पहले से ही समंदर में थे। साथ ही जिनकी आवाजाही जारी रहनी थी। इस कदम ने रूस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे कुछ यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंता पैदा कर दी थी। मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बाद अमेरिका ने रूसी तेल शिपमेंट पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी थी। बाद में यूक्रेन युद्ध जारी रहने के कारण इस छूट को बढ़ा दिया गया था।

यह छूट तब दी गई थी जब ग्‍लोबल क्रूड ऑयल के बाजारों को पश्चिम एशिया में संघर्ष और ऊर्जा के लिए अहम रास्ते ‘होर्मुज स्‍ट्रेट’ के आसपास रुकावटों के कारण सप्लाई से जुड़ी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा था।

रूस पर जेलेंस्की ने लगाया यह आरोप
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि G7 नेता यूक्रेन का समर्थन करने में एकजुट हैं। उनका मानना है कि कीव युद्धविराम के लिए बातचीत को तैयार है। साथ ही, उन्होंने रूस पर शांति के प्रति गंभीर इरादा न दिखाने का आरोप लगाया। जेलेंस्की ने कहा, ‘आज पूरा ‘सेवन’ (G7 समूह) सर्वसम्मति से यूक्रेन का समर्थन करता है।’ G7 की ये चर्चाएं ऊर्जा सुरक्षा और प्रतिबंधों को लागू करने को लेकर व्यापक चिंताओं के बीच भी हुईं। यूरोपीय नेता रूस के तेल और गैस से होने वाली कमाई के खिलाफ सख्त उपायों की मांग कर रहे हैं। कारण कि यह मॉस्को के युद्ध प्रयासों के लिए फंडिंग का एक बड़ा स्रोत बना हुआ है।

भारत के लिए इसलिए बढ़ी टेंशन
भारत के नजरिए से यह चिंता का विषय है। कारण है कि रूस अभी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्‍लायर है। भारत अपनी जरूरत का 53% कच्चा तेल अकेले रूस से आयात कर रहा है।

अगर अमेरिका रूसी तेल पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लागू करता है तो भारत के लिए रूस से सस्ता तेल खरीदना मुश्किल हो जाएगा। यही नहीं, भारतीय रिफाइनरियों को ‘सेकेंडरी सैंक्‍शंस’ का खतरा झेलना पड़ सकता है।

इसके चलते भारत को अन्य महंगे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है। इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा। घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो जाएगा।