कोटा में नर्मदेश्वर स्थापना और मूल पाठ के साथ श्रीमद् भागवत कथा जारी
कोटा। श्री मंगलमय चमत्कारी धाम हनुमान सेवा समिति, विज्ञान नगर के तत्वावधान में आयोजित भगवान नर्मदेश्वर स्थापना समारोह एवं पंच कुण्डीय महायज्ञ के पावन अवसर पर भक्ति की अविरल धारा बह रही है।
कॉमर्स कॉलेज मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान देश के सुप्रसिद्ध कथाव्यास ‘भगवत भास्कर’ कृष्ण चंद्र ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन के सार और साधना के महत्व से परिचित कराया।
इससे पहले मंदिर परिसर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के तहत् शनिवार को भी यज्ञ में आहुतियां दी गईं। यज्ञ के साथ-साथ मंदिर परिसर में 108 श्रीमद् भागवत मूल पाठ और चारों वेदों का सस्वर पाठ भक्तों के लिए आकर्षण और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना रहा।
कथा के दौरान महाराज ने धन की शुचिता पर विशेष बल देते हुए कहा कि ईमानदारी से अर्जित किए गए धन में समृद्धि होती है, जबकि बेईमानी से कमाए गए धन में साक्षात कलयुग का निवास होता है। उन्होंने कहा कि साधना के लिए वेद, वेदांत और उपनिषद जैसे साधन सुलभ हैं, जिनसे संसार में सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने ‘धर्मो रक्षति रक्षित:’ का सूत्र देते हुए समझाया कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा स्वयं करता है।
कार्यक्रम के दौरान विधायक संदीप शर्मा, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर निमित्त रंजन चौधरी, कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीपी सारस्वत, नगर निगम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी, भाजपा शहर जिला महामंत्री शैलेंद्र ऋषि, महंत अशोक तिवारी, अजय चतुर्वेदी और किशन पाठक सहित कई भक्तगण उपस्थित रहे।
मन और इंद्रियों पर विजय का मार्ग बताया
मन की चंचलता पर प्रहार करते हुए महाराज ने कहा कि यदि मन को वश में करना है, तो पहले आसन को जीतना होगा। उन्होंने नित्य प्राणायाम की आवश्यकता बताते हुए पूरक, कुंभक और रेचक को सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने सत्संग की महिमा गाते हुए कहा कि व्यक्ति के भीतर गुण और दोष संगति से ही आते हैं, इसलिए सत्संग को जीवन का हिस्सा बनाएं।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान महाराज ने जब “अपने रथ को सन्मार्ग पर लगाते चलो, कृष्ण गोविंद गोपाल गाते चलो…” और “कौन है गुलशन के जिस गुलशन में रोशन तू नहीं..” जैसे मधुर भजन गाए, तो पूरा पांडाल भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा कि जब तक हम नासमझ होते हैं, तभी तक पाने की इच्छा रहती है, लेकिन ब्रह्म का साक्षात्कार होते ही सब कुछ शून्य प्रतीत होने लगता है।
कथा का समय अब इस प्रकार रहेगा
10 मई: शाम 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक।
11 से 14 मई: दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक।

